पटना, बिहार: लंबे समय बाद लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने अपने छोटे भाई और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। मंगलवार (13 जनवरी) को तेजप्रताप 10 सर्कुलर रोड स्थित लालू यादव के आवास पहुंचे। यहां उन्होंने पिता लालू प्रसाद यादव, मां राबड़ी देवी और भाई तेजस्वी से आशीर्वाद लिया। मुलाकात के दौरान तेजप्रताप ने अपनी भतीजी कात्यायनी (तेजस्वी की बेटी) को गोद में खिलाया, जो एक भावुक पल रहा। साथ ही उन्होंने कल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर आयोजित होने वाले ‘ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज’ कार्यक्रम का निमंत्रण दिया।
तेजप्रताप ने अपने एक्स हैंडल पर इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर कीं। पोस्ट में उन्होंने लिखा, “आज अपने पिताजी आदरणीय श्री लालू प्रसाद यादव जी, माता जी आदरणीय श्रीमती राबड़ी देवी जी से 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पहुंचकर मुलाकात कर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने छोटे भाई और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी से भी भेंट मुलाकात कर कल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले ‘ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज’ कार्यक्रम हेतु निमंत्रण पत्र देकर आमंत्रित किया। साथ ही आज अपनी प्यारी भतीजी कात्यायनी को गोद में खिलाने का अद्भुत पल भी प्राप्त हुआ।”
परिवार से अलगाव के बाद पहली मुलाकात
यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि तेजप्रताप को आरजेडी से निकाले जाने के बाद यह उनकी भाई तेजस्वी से पहली मुलाकात है। तेजप्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम की अपनी पार्टी बनाई और महुआ सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे तीसरे नंबर पर रहे और हार गए। 2020 में हसनपुर से विधायक चुने गए थे, लेकिन इस बार उन्होंने सीट बदल ली। आरजेडी ने भी उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारा था।
बिहार सरकार के कई मंत्रियों को भी दिया न्यौता
तेजप्रताप ने मकर संक्रांति के मौके पर बिहार सरकार के कई मंत्रियों को भी दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया। उन्होंने डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, दिलीप कुमार जायसवाल, लखेंद्र कुमार, रमा निषाद, रामकृपाल यादव और अशोक चौधरी समेत अन्य नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और न्यौता दिया।
दही-चूड़ा भोज का महत्व
मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज बिहार में एक पारंपरिक आयोजन है। तेजप्रताप का यह ‘ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज’ राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने वाला हो सकता है। परिवार में अलगाव के बाद यह मुलाकात और निमंत्रण राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह मुलाकात लालू परिवार में एक नई शुरुआत के संकेत दे रही है। तेजप्रताप और तेजस्वी की मुलाकात से राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह परिवारिक एकता की ओर पहला कदम है या सिर्फ मकर संक्रांति का सामाजिक आयोजन।

