नई दिल्ली: मनोज बाजपेयी स्टारर आगामी नेटफ्लिक्स फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समुदाय और सोशल मीडिया पर छिड़े तीखे विवाद में अब राहत की उम्मीद जगी है। फिल्ममेकर नीरज पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि फिल्म का नाम पूरी तरह बदल दिया जाएगा। पुराना टाइटल और सारा प्रमोशनल मटीरियल वापस ले लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने फिल्ममेकर नीरज पांडे के एफिडेविट को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें उन्होंने पुष्टि की कि ‘घूसखोर पंडत’ का टाइटल बदल दिया जाएगा। कोर्ट ने इसे सकारात्मक कदम बताया और कहा कि उम्मीद है अब यह विवाद शांत हो जाएगा।
कोर्ट ने यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर भड़काऊ कंटेंट डालने वालों से भी विवाद शांत करने का आग्रह किया। साथ ही केंद्र सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को नोटिस जारी किया है, ताकि फिल्म की रिलीज और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
विवाद की शुरुआत 3 फरवरी 2026 को हुई, जब नेटफ्लिक्स ने अपने साल 2026 के ‘इंडिया प्लान’ में इस फिल्म का टीजर जारी किया। टीजर रिलीज होते ही टाइटल ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर ब्राह्मण समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने इसे ब्राह्मण समाज के खिलाफ अपमानजनक और बदनाम करने वाला बताया। सोशल मीडिया पर भारी विरोध हुआ, सड़कों पर प्रदर्शन हुए और मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
वकील विनीत जिंदल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म के नाम और कंटेंट पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि टाइटल ब्राह्मण समाज की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है।
फिल्म संस्थाओं और NHRC की भी आपत्ति
फिल्म मेकर्स कंबाइन और इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने भी टाइटल पर आपत्ति जताई थी। नोटिस में कहा गया था कि मेकर्स ने इंडस्ट्री के नियमों के अनुसार टाइटल रजिस्टर नहीं कराया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी सूचना प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेजा था। आयोग ने कहा था कि ऐसे टाइटल और कंटेंट से समाज में वैमनस्यता बढ़ती है और यह एक तरह की मनोवैज्ञानिक हिंसा है।
फिल्म में मनोज बाजपेयी का किरदार
फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी ‘अजय दीक्षित’ की भूमिका निभा रहे हैं। उनके रिश्वत लेने की आदतों की वजह से पुलिस महकमे में उन्हें ‘पंडित’ का निकनेम दिया गया है। फिल्म एक ही रात के घटनाक्रम पर आधारित है। इसमें नुसरत भरूचा और साकिब सलीम भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
अब क्या होगा नाम?
नेटफ्लिक्स और मेकर्स ने पुराना टाइटल और सारा प्रमोशनल मटीरियल हटा दिया है। नया नाम अभी फाइनल नहीं हुआ है। लेकिन कोर्ट में नाम बदलने की पुष्टि होने से विवाद शांत होने की उम्मीद है। ब्राह्मण समुदाय और अन्य लोगों के विरोध के बाद यह फैसला लिया गया है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि फिल्मों के नाम और कंटेंट से जुड़े विवाद कितनी तेजी से सामाजिक और कानूनी बहस में बदल सकते हैं। अब नया टाइटल आने के बाद फिल्म की रिलीज पर आगे का फैसला होगा।
(साभार नोट: समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार)

