सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मुस्लिम या ईसाई बनने पर अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा स्वतः समाप्त, केवल हिंदू, सिख और बौद्ध को ही मिलेगा आरक्षण

Supreme Court of India: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्मों तक सीमित है। यदि कोई व्यक्ति इनमें से किसी भी धर्म को छोड़कर मुस्लिम या ईसाई बन जाता है, तो उसका SC दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है। ऐसे व्यक्ति को न तो आरक्षण मिलेगा और न ही SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कोई संरक्षण।

Samvadika Desk
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Supreme Court of India (AI Generated Symbolic image)
Highlights
  • सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला: मुस्लिम या ईसाई बनते ही SC दर्जा खत्म!
  • अब धर्म बदलकर भी SC आरक्षण नहीं चलेगा, कोर्ट ने लगा दी मुहर!
  • केवल हिंदू, सिख और बौद्ध ही अनुसूचित जाति माने जाएंगे – सुप्रीम कोर्ट!

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे और धर्म परिवर्तन को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्पष्ट फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति का संवैधानिक प्रावधान केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म तक सीमित है। यदि कोई व्यक्ति इन तीनों धर्मों को छोड़कर मुस्लिम या ईसाई धर्म अपना लेता है, तो उसका अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।

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कोर्ट ने क्या कहा?

न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मंगलवार को दिए गए फैसले में स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति उस सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की स्थिति से बाहर आ जाता है, जिसके आधार पर SC को आरक्षण और संरक्षण दिए जाते हैं।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ऐसे व्यक्ति पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST एक्ट) के तहत कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह अब अनुसूचित जाति से नहीं रहता।

आंध्र प्रदेश का मामला

यह फैसला आंध्र प्रदेश के एक ईसाई पादरी चिंथाडा आनंद की अपील पर सुनाया गया। आनंद ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने उनके साथ जातिगत भेदभाव और गाली-गलौज की। उन्होंने SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर पुलिस ने FIR दर्ज की।

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आरोपी अक्काला रामिरेड्डी ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने FIR रद्द कर दी और कहा कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद आनंद अपना SC दर्जा खो चुके हैं, इसलिए उन्हें SC/ST एक्ट का संरक्षण नहीं मिल सकता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आनंद के पास SC सर्टिफिकेट होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं मानी जाती।

आनंद ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया।

कोर्ट का तर्क

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान निर्माताओं ने अनुसूचित जाति का दर्जा विशेष रूप से हिंदू, सिख और बौद्ध धर्मों तक सीमित रखा था। अन्य धर्मों (मुस्लिम और ईसाई) में परिवर्तन के बाद व्यक्ति उस सामाजिक पिछड़ेपन से बाहर आ जाता है, जिसके लिए SC आरक्षण और संरक्षण दिए जाते हैं। इसलिए धर्म परिवर्तन के बाद SC सर्टिफिकेट का कोई कानूनी मूल्य नहीं रह जाता।

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फैसले का महत्व

यह फैसला उन सभी मामलों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां दलित समुदाय के लोग ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद भी SC आरक्षण, सरकारी योजनाओं या SC/ST एक्ट के तहत सुरक्षा का दावा करते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर पूरी तरह स्पष्टता ला दी है।

यह फैसला संवैधानिक प्रावधानों की मूल भावना को मजबूती से दोहराता है और भविष्य में ऐसे विवादों पर रोशनी डालेगा।

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