बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली के हाफिजगंज थाना क्षेत्र में एक महीने से दहशत का पर्याय बने तेंदुए को आखिरकार वन विभाग ने पकड़ लिया। बंद खेतान फैक्टरी परिसर में लगाए गए पिंजरे में मुर्गी का लालच देकर तेंदुए को कैद किया गया। इस खबर से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
एक महीने की दहशत
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, हाफिजगंज के फैजुल्लापुर, सेंथल, लाड़पुर, सनेकपुर, और हरहरपुर जैसे गाँवों में पिछले एक महीने से तेंदुए की मौजूदगी ने दहशत फैला रखी थी। ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुआ कभी खेतों में, तो कभी स्कूल के पास दिखाई देता था। शाम ढलने के बाद लोग घरों से निकलने से डरते थे, और खेती-बाड़ी का काम ठप हो गया था। किसान खेतों पर जाने से कतरा रहे थे, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा था।
चौकीदार की साहसी सूचना
26 जून को फैजुल्लापुर के पास बंद खेतान फैक्टरी में तेंदुए ने चौकीदार अजय कुमार की गाय पर हमला किया। अजय ने छत पर चढ़कर तेंदुए का वीडियो बनाया और उसे भगाकर गाय को बचा लिया। उन्होंने तुरंत वन विभाग को सूचित किया। वन विभाग ने फैक्टरी परिसर में दो कैमरे और एक पिंजरा लगाया, लेकिन तेंदुआ एक महीने तक चकमा देता रहा।
नई रणनीति और मुर्गी का जाल
ग्रामीणों की शिकायतों के बाद वन विभाग ने मेरठ से वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस खुशालिया को बुलाया। खुशालिया ने बताया कि तेंदुआ पहले भी पिंजरे में फंस चुका था, इसलिए नई रणनीति बनाई गई। आठ दिन पहले उन्होंने रेंज अधिकारी केके मिश्रा, वनकर्मी अकबर अली, और मोहम्मद अशरफ के साथ फैक्टरी परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया। तेंदुए के रास्ते पर पिंजरा लगाया गया और उसमें एक मुर्गी रखी गई।
बारिश में फंसा तेंदुआ
मंगलवार रात बारिश के कारण तेंदुए को जंगल में शिकार नहीं मिला। मुर्गी का लालच उसे पिंजरे तक खींच लाया, और वह कैद हो गया। बुधवार सुबह सूचना मिलते ही हाफिजगंज थाना प्रभारी पवन कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। वन विभाग के अधिकारी भी वहाँ पहुँचे और तेंदुए को सुरक्षित निकाला गया।
ग्रामीणों की राहत
तेंदुए को पकड़े जाने की खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों ने राहत की सांस ली और वन विभाग की तारीफ की। रेंजर नवाबगंज केके मिश्रा ने बताया कि तेंदुए को नजीबाबाद डिवीजन के जंगल में छोड़ा जाएगा, जहाँ वह सुरक्षित रहेगा और इंसानों को नुकसान नहीं पहुँचाएगा।
सामाजिक और पर्यावरणीय सबक
यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष को उजागर करती है। बढ़ते शहरीकरण और जंगलों की कटाई से वन्यजीव गाँवों की ओर आ रहे हैं। यह समाज और प्रशासन से जागरूकता और बेहतर वन्यजीव प्रबंधन की माँग करता है। वन विभाग की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को टाल दिया, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और प्रयास चाहिए।

