हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर 300 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें, तीन राज्यों का मेंटेनेंस हब बनेगा बरेली

Bareilly News: रेलवे ने गाजियाबाद-सीतापुर तक 403 किमी तीसरी-चौथी लाइन और रोजा-लखनऊ के बीच 158 किमी फोर लाइन प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर भी बरेली होकर गुजरेगा, जहां ट्रेनें 300 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी। भविष्य में बरेली को उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड का मेंटेनेंस हब बनाने की योजना है। इन परियोजनाओं से कनेक्टिविटी मजबूत होगी, माल ढुलाई आसान होगी और क्षेत्र का विकास तेज होगा।

Samvadika Desk
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बरेली जंक्शन (इमेज - सोशल मीडिया)
Highlights
  • बरेली होकर दौड़ेगी दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल!
  • वंदे भारत, तेजस और राजधानी ट्रेनों को मिलेगा आरक्षित कॉरिडोर!
  • 300 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी ट्रेनें!

बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली रेलवे के विकास में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। रेलवे ने गाजियाबाद से सीतापुर तक 403 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। साथ ही रोजा-लखनऊ के बीच 158 किलोमीटर के फोर लाइन प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष बजट में दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को भी मंजूरी दी है, जो बरेली होकर गुजरेगा। इस कॉरिडोर पर ट्रेनें 300 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। भविष्य में बरेली को उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड का प्रमुख मेंटेनेंस हब बनाने की योजना है।

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गाजियाबाद-सीतापुर तक फोर लाइन

रेलवे ने गाजियाबाद से मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, रोजा और सीतापुर तक 403 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन को मंजूरी दे दी है। गाजियाबाद-लखनऊ के बीच फोर लाइन प्रोजेक्ट के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे गति शक्ति योजना के तहत पिछले साल ही पूरा हो चुका है। रोजा-लखनऊ के बीच 158 किलोमीटर का फोर लाइन प्रोजेक्ट भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं से पूर्वांचल और पूर्वोत्तर राज्यों तक बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

हाईस्पीड रेल पर 300 किमी की रफ्तार

केंद्र सरकार ने दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है, जो बरेली होकर गुजरेगा। इस कॉरिडोर पर ट्रेनें 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। यह कॉरिडोर फास्ट, सुपर फास्ट, तेजस, वंदे भारत, राजधानी, दुरंतो और अमृत भारत जैसी ट्रेनों के लिए आरक्षित रहेगा। इससे मुख्य लाइन पर दबाव कम होगा और मालगाड़ियों का संचालन भी बढ़ेगा। कोयला, खाद्यान्न, रासायनिक खाद और इस्पात आदि की ढुलाई में सड़क पर निर्भरता घटेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में बचत होगी।

बरेली बनेगा तीन राज्यों का मेंटेनेंस हब

दिल्ली-लखनऊ रेलखंड पर बरेली एक प्रमुख स्टेशन है। भविष्य में बरेली को उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड का मेंटेनेंस हब बनाने की योजना है। इसके लिए बरेली जंक्शन, बरेली सिटी, सीबीगंज, इज्जतनगर, बरेली कैंट, रामगंगा, भोजीपुरा स्टेशनों के लिए 20 से ज्यादा बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। बरेली में वंदे भारत का मेंटेनेंस शेड भी प्रस्तावित है। भिटौरा स्टेशन पर कंटेनर डिपो बनाने की योजना है। दिल्ली-लखनऊ के बीच 493 किलोमीटर के मेंटेनेंस कॉरिडोर के लिए सर्वे कार्य चल रहा है।

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मुरादाबाद मंडल की तैयारी

मुरादाबाद मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य गुप्ता ने अमर उजाला के रिपोर्टर को बताया कि बरेली को रेलवे हब के रूप में विकसित करने की योजना है। दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की दिशा में भी काम तेजी से चल रहा है। गाजियाबाद-सीतापुर के बीच तीसरी और चौथी लाइन को मंजूरी मिल चुकी है। रोजा-लखनऊ के बीच फोर लाइन प्रोजेक्ट पर कार्य प्रगति पर है।

यातायात और अर्थव्यवस्था को फायदा

इन परियोजनाओं से बरेली की यातायात व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। मुख्य रेल लाइन पर दबाव कम होने से मालगाड़ियों का संचालन बढ़ेगा और सड़क परिवहन पर निर्भरता घटेगी। इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। बरेली को तीन राज्यों का मेंटेनेंस हब बनने से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

बरेलीवासियों में उत्साह

लंबे समय से मेट्रो और हाईस्पीड रेल की माँग कर रहे बरेलीवासियों में इस अपडेट से खुशी है। लोग अब इन परियोजनाओं के जल्द शुरू होने की उम्मीद कर रहे हैं। बरेली विकास प्राधिकरण और रेलवे अधिकारी भी इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। यह परियोजना बरेली को आधुनिक और विकसित शहर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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