स्टारलिंक की नई सर्विस से खत्म होगी मोबाइल टावर की जरूरत! 2027 तक ‘डायरेक्ट-टू-सेल’ शुरू, सैटेलाइट से सीधा कनेक्ट होगा फोन

Tech News: एलन मस्क की स्टारलिंक कंपनी 2027 तक 'डायरेक्ट-टू-सेल' सर्विस शुरू करेगी, जिससे मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे और मोबाइल टावर की जरूरत खत्म हो जाएगी। इसके लिए स्टारशिप रॉकेट से 1200 नए सैटेलाइट्स लॉन्च किए जाएंगे। सर्विस से वॉयस कॉल, SMS और डेटा की जमीन जैसी कनेक्टिविटी मिलेगी। दूर-दराज के इलाकों, पहाड़, जंगल और आपदा क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचेगा। भारत में भी यह सर्विस 2027 के बाद शुरू हो सकती है।

Samvadika Desk
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Highlights
  • सैटेलाइट से सीधा फोन कनेक्ट – कोई ग्राउंड टावर नहीं!
  • स्पेसएक्स के स्टारशिप से 1200 नए सैटेलाइट्स लॉन्च होंगे!
  • दूर-दराज के गांव, पहाड़, जंगल और समुद्र में भी नेटवर्क!

नई दिल्ली/बार्सिलोना: एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) अब मोबाइल फोन की दुनिया में क्रांति लाने वाली है। कंपनी ने घोषणा की है कि जून 2027 तक ‘डायरेक्ट-टू-सेल’ सर्विस शुरू हो जाएगी। इस सर्विस के जरिए यूजर्स को मोबाइल टावर या ग्राउंड नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ेगी – फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाएगा। मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC) 2026 में स्टारलिंक इंजीनियरिंग के वाइस प्रेसिडेंट माइकल निकोल्स ने यह जानकारी दी।

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1200 नए सैटेलाइट्स से बनेगा नेटवर्क

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, स्टारलिंक ने बताया कि इस सर्विस के लिए स्पेसएक्स के स्टारशिप रॉकेट से करीब 1200 नए सैटेलाइट्स लॉन्च किए जाएंगे। ये सैटेलाइट्स लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में तैनात होंगे। शुरुआत में 1200 सैटेलाइट्स से सेवा शुरू होगी और धीरे-धीरे नेटवर्क को और मजबूत किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि स्टारशिप की मदद से सैकड़ों छोटे-छोटे सैटेलाइट्स को बहुत तेजी से सही जगह पर पहुंचाया जा सकेगा।

जमीन जैसी कनेक्टिविटी मिलेगी

माइकल निकोल्स ने कहा कि स्टारलिंक मोबाइल का मुख्य उद्देश्य सैटेलाइट से कनेक्ट होने पर भी यूजर्स को जमीन जैसी ही कनेक्टिविटी देना है। यानी वॉयस कॉलिंग, SMS और डेटा की स्पीड और क्वालिटी में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह सर्विस उन इलाकों के लिए बहुत उपयोगी होगी जहां मोबाइल टावर नहीं पहुंच पाते – जैसे दूर-दराज के गांव, पहाड़, जंगल, समुद्र या आपदा प्रभावित क्षेत्र।

फिलहाल कितने सैटेलाइट्स में है तकनीक?

स्टारलिंक के मौजूदा कॉन्स्टेलेशन में 9,000 से ज्यादा सैटेलाइट्स हैं। इनमें से लगभग 600 सैटेलाइट्स में ‘डायरेक्ट-टू-सेल’ तकनीक पहले से शामिल है। 2027 में लॉन्च होने वाले नए सैटेलाइट्स के साथ यह नेटवर्क और मजबूत हो जाएगा। कंपनी ने कहा कि यह दूसरी पीढ़ी (सेकंड-जेनरेशन) का कॉन्स्टेलेशन होगा।

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भारत में कब मिलेगी यह सुविधा?

स्टारलिंक ने भारत में अपनी सर्विस शुरू करने की तैयारी की है। कंपनी ने पहले ही सरकार से अनुमति मांगी है और टेस्टिंग भी शुरू कर दी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो 2027 के बाद भारत में भी डायरेक्ट-टू-सेल सर्विस शुरू हो सकती है। इससे दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी का सपना साकार हो जाएगा।

क्या फायदे मिलेंगे यूजर्स को?

  • बिना टावर के भी वॉयस कॉल, SMS और इंटरनेट
  • आपदा, जंगल, पहाड़ या समुद्र में भी कनेक्टिविटी
  • ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में डिजिटल पहुंच
  • नेटवर्क कवरेज की कमी से छुटकारा

स्टारलिंक की यह सर्विस मोबाइल कम्युनिकेशन की दुनिया में एक बड़ा बदलाव लाने वाली है। 2027 तक यह तकनीक पूरी तरह शुरू हो जाएगी और दुनिया के कई हिस्सों में इंटरनेट और फोन की पहुंच में क्रांति आ जाएगी।

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