नादौती (करौली), राजस्थान: राजस्थान के करौली जिले के नादौती में जमीन के तकसीमा मामले में रिश्वत लेते पकड़ी गई एसडीएम काजल मीणा को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तारी के समय उन्होंने ‘गलती हो गई’ कहकर माफी माँगी, लेकिन पुख्ता सबूतों के आगे यह सफाई काम नहीं आई। उनके रीडर दिनेश सैनी और वरिष्ठ लिपिक प्रवीण धाकड़ को भी जेल भेजा गया है। पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की इस कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।
60 हजार की रिश्वत लेते पकड़े गए
एसीबी ने काजल मीणा को 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उनके पास से करीब 4 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी भी बरामद हुई। उनके रीडर दिनेश सैनी और वरिष्ठ लिपिक प्रवीण धाकड़ को भी हिरासत में लिया गया। एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञान सिंह चौधरी ने बताया कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित कर लिए गए हैं और जांच लगातार जारी है।
‘गलती हो गई’ की सफाई बेकार
गिरफ्तारी के समय काजल मीणा ने कहा कि उनसे गलती हो गई। लेकिन इस बयान को आधिकारिक दस्तावेजों में शामिल नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वत माँगने और लेने के पर्याप्त प्रमाण मिलने के बाद ही कार्रवाई की गई। पूरे मामले की जानकारी कार्मिक विभाग को भेज दी गई है, जहाँ से निलंबन की कार्रवाई होने की संभावना है।
दूसरी पोस्टिंग थी नादौती
काजल मीणा की यह दूसरी पोस्टिंग थी। उन्होंने 30 अक्टूबर 2025 को प्रतापगढ़ जिले के सुहागपुरा से स्थानांतरण के बाद नादौती में पदभार संभाला था। सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर क्षेत्र के बडौली गाँव की निवासी काजल मीणा का गृह क्षेत्र के पास पदस्थापन होने के कारण वे पहले से चर्चा में थीं। क्षेत्र में रिश्तेदारी होने के चलते उनकी कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठते रहे। काजल मीणा वर्ष 2024 बैच की राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं और आईआईटी मंडी की पूर्व छात्रा रह चुकी हैं।
एसीबी की गहन जांच जारी
एसीबी अब पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या यह रिश्वतखोरी का एकाकी मामला है या इसमें कोई बड़ा नेटवर्क शामिल है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सतर्क हैं और आगे की कार्रवाई के लिए सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं।
मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा
यह घटना राजस्थान के प्रशासनिक महकमे में सनसनी मचा रही है। कई अधिकारी और आम लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आईआईटी की पढ़ाई करने वाली एक अधिकारी इतनी जल्दी रिश्वतखोरी के मामले में कैसे फँस गई। एसीबी की कार्रवाई को सराहा जा रहा है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह एकाकी घटना है या सिस्टम में गहरी समस्या है।
आगे क्या होगा?
अब कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखा गया है। एसीबी की जांच पूरी होने के बाद अगली कार्रवाई तय होगी। इस मामले ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। लोग अब इसकी आगे की जाँच और नतीजे पर नजर रखे हुए हैं।

