पाकिस्तान: ट्रंप से दोस्ती और ईरान से बातचीत, असिम मुनीर बने ‘सुपर बॉस’, शहबाज सिर्फ चेहरा; लोकतंत्र पर सवाल

Pakistan News: पाकिस्तान में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, वार्ता का संचालन रावलपिंडी से हो रहा है, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सरकार की भूमिका गौण है। मुनीर ने ट्रंप से मुलाकात की और तेहरान भी गए। 27वें संवैधानिक संशोधन से सेना की शक्ति और बढ़ गई है। विश्लेषक इसे पाकिस्तान में लोकतंत्र पर सैन्य छाया गहरी होने का संकेत बता रहे हैं।

Samvadika Desk
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Image - ISPR Official/Youtube | Pakistan army chief Asim Munir
Highlights
  • पाकिस्तान में असिम मुनीर बने ‘सुपर बॉस’, शहबाज शरीफ सिर्फ चेहरा!
  • ट्रंप और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं सेना प्रमुख मुनीर!
  • लोकतंत्र पर उठ रहे गंभीर सवाल – सैन्य छाया गहरी!

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में एक बार फिर सैन्य नेतृत्व का प्रभाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की प्रमुख भूमिका ने साफ संकेत दिया है कि देश की विदेश नीति अब रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) से संचालित हो रही है, न कि इस्लामाबाद (संसद) से। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जो अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व से सीधे संपर्क कर दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनकी सरकार की भूमिका लगभग गौण नजर आ रही है।

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मुनीर ही चला रहे हैं देश की विदेश नीति

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-ईरान वार्ता का संचालन इस्लामाबाद के बजाय रावलपिंडी से हो रहा है। पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रक्रिया में सेना प्रमुख असिम मुनीर ही मुख्य संचालक हैं। विदेश मंत्रालय केवल जूनियर पार्टनर की भूमिका में है, जबकि सरकार के मंत्री सहायक बनकर रह गए हैं। मुनीर की यह भूमिका पाकिस्तान में सैन्य वर्चस्व को और मजबूत कर रही है।

ट्रंप ने शहबाज की जगह मुनीर को दिया महत्व

18 जून 2025 को असिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि मुनीर किसी राजनीतिक पद पर नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बजाय मुनीर के साथ ज्यादा समय बिताया और संवाद किया।

इस्लामाबाद बैठक में मुनीर की मौजूदगी

जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक हुई, तब भी मुनीर तीसरे पक्ष के रूप में मौजूद थे और वार्ता को दिशा दे रहे थे। हाल ही में मुनीर तेहरान भी गए, जहाँ उन्होंने वार्ता के अगले दौर को आगे बढ़ाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सार्वजनिक रूप से मुनीर की भूमिका की सराहना की और उन्हें दोनों देशों के बीच संदेश पहुँचाने में “महत्वपूर्ण” बताया।

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27वें संवैधानिक संशोधन से बढ़ी सेना की ताकत

नवंबर 2025 में पाकिस्तान में 27वें संवैधानिक संशोधन के जरिए सेना की शक्ति और बढ़ा दी गई। इस संशोधन के तहत ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ का नया पद बनाया गया, जो सेना प्रमुख के पास ही रहेगा। इससे मुनीर को नौसेना और वायुसेना पर भी नियंत्रण मिल गया है। साथ ही पाँच सितारा अधिकारियों को आजीवन कानूनी छूट भी प्रदान कर दी गई है। इससे नागरिक सरकार की कमजोरी और स्पष्ट हो गई है।

लोकतंत्र पर उठ रहे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि मुनीर का बढ़ता कद शहबाज शरीफ सरकार के लिए बड़ी टेंशन बन गया है। अगर अमेरिका-ईरान मध्यस्थता सफल होती है, तो मुनीर का प्रभाव और बढ़ेगा। वहीं, अगर बातचीत विफल हुई तो शहबाज सरकार को आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है। विश्लेषक कह रहे हैं कि पाकिस्तान में सेना का यह बढ़ता प्रभाव लोकतांत्रिक संतुलन के लिए खतरा है। चुनी हुई सरकार की स्वायत्तता लगातार सीमित होती जा रही है। भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और विपक्ष के दमन जैसी चिंताएँ भी बढ़ रही हैं।

पाकिस्तान में सैन्य छाया गहरी

यह घटनाक्रम पाकिस्तान में सैन्य हस्तक्षेप की पुरानी परंपरा को फिर से उजागर कर रहा है। असिम मुनीर अब न केवल सेना प्रमुख हैं, बल्कि देश की विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों के मुख्य संचालक बन चुके हैं। शहबाज शरीफ सरकार महज एक चेहरा बनकर रह गई है। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है और पाकिस्तान में सत्ता का असली केंद्र कहाँ है, इस पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

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