मिर्जापुर: 17 साल की लड़की को नहीं आए पीरियड्स, जाँच में खुलासा- शरीर में पुरुष गुण, दुर्लभ बीमारी ने चौंकाया

Mirjapur News: मिर्जापुर में 17 साल की एक किशोरी को मासिक धर्म न शुरू होने पर जाँच में पता चला कि उसे एंड्रोजन इंसेंसिटिविटी सिंड्रोम (AIS) है। बाहरी रूप से लड़की दिखने वाली किशोरी के शरीर में पुरुषों जैसे अंग और 46 XY क्रोमोसोम पाए गए। यह दुर्लभ जेनेटिक बीमारी, जिसमें शरीर पुरुष हार्मोन का जवाब नहीं देता, परिवार और डॉक्टरों के लिए चौंकाने वाली थी।

Samvadika Desk
4 Min Read
AI जनित प्रतीकात्मक इमेज
Highlights
  • मिर्जापुर: 17 साल की किशोरी को नहीं आए पीरियड्स, जाँच में चौंकाने वाला खुलासा!
  • डॉक्टरों ने पाया- लड़की का बाहरी रूप, लेकिन अंदर पुरुषों जैसे अंग!
  • जेनेटिक टेस्ट में 46 XY क्रोमोसोम, एंड्रोजन इंसेंसिटिविटी सिंड्रोम की पुष्टि!

मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल परिवार वालों, बल्कि डॉक्टरों को भी स्तब्ध कर दिया। 17 साल की एक किशोरी को मासिक धर्म शुरू नहीं हुआ, जिसके बाद जाँच में पता चला कि वह बाहर से लड़की दिखती है, लेकिन अंदर से उसके शरीर में पुरुषों जैसे गुण हैं। यह दुर्लभ बीमारी, जिसे एंड्रोजन इंसेंसिटिविटी सिंड्रोम (AIS) कहा जाता है, ने सबको चौंका दिया।

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पीरियड्स न शुरू होने से चिंता

आमतौर पर लड़कियों में मासिक धर्म 11 से 13 साल की उम्र में शुरू हो जाता है। कुछ मामलों में यह 10 साल की उम्र में भी शुरू हो सकता है। लेकिन मिर्जापुर की इस 17 वर्षीय किशोरी को इतनी उम्र तक पीरियड्स शुरू नहीं हुए। इस असामान्य स्थिति से परेशान परिवार तुरंत डॉक्टरों के पास पहुँचा। माता-पिता ने किशोरी का मेडिकल चेकअप करवाया ताकि इस रहस्य का पता लगाया जा सके।

जाँच में चौंकाने वाला खुलासा

डॉक्टरों ने कई टेस्ट किए, जिनमें अल्ट्रासाउंड और अन्य मेडिकल जाँच शामिल थीं। जब रिपोर्ट सामने आई, तो सभी हैरान रह गए। जाँच में पाया गया कि किशोरी का बाहरी रूप तो पूरी तरह लड़की जैसा है, लेकिन अंदरूनी अंग पुरुषों जैसे हैं। उसके शरीर में गर्भाशय नहीं था, और पुरुषों के अंडकोष मौजूद थे। यह खुलासा परिवार और डॉक्टरों के लिए सदमे जैसा था।

जेनेटिक टेस्ट ने खोला राज

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मामले को और समझने के लिए डॉक्टरों ने किशोरी का जेनेटिक टेस्ट कराया। इसमें पता चला कि उसके शरीर में 46 XY क्रोमोसोम हैं, जो आमतौर पर पुरुषों में पाए जाते हैं, जबकि लड़कियों में 46 XX क्रोमोसोम होते हैं। डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि किशोरी को एंड्रोजन इंसेंसिटिविटी सिंड्रोम (AIS) नाम की एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी है। इस वजह से उसका शरीर पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का जवाब नहीं देता, जिसके कारण बाहरी रूप लड़की जैसा विकसित हुआ, लेकिन अंदरूनी अंग पुरुषों जैसे हैं।

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एंड्रोजन इंसेंसिटिविटी सिंड्रोम क्या है?

एंड्रोजन इंसेंसिटिविटी सिंड्रोम (AIS) एक दुर्लभ वंशानुगत और यौन विकास विकार है। इस बीमारी से प्रभावित व्यक्ति जेनेटिक रूप से पुरुष (XY क्रोमोसोम) होते हैं, लेकिन उनका शरीर पुरुष हार्मोन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं देता। नतीजतन, उनके जननांग पुरुषों जैसे विकसित नहीं होते, और वे बाहरी रूप से लड़की जैसे दिखते हैं। इस स्थिति में गर्भाशय और डिंबग्रंथि नहीं होती, जिसके कारण मासिक धर्म शुरू नहीं होता और वयस्क होने पर बांझपन की समस्या हो सकती है।

AIS के लक्षण

AIS से पीड़ित व्यक्तियों में कुछ खास लक्षण दिख सकते हैं, जैसे यौवन के दौरान असामान्य रूप से लंबा कद, मासिक धर्म का न होना, जननांग क्षेत्र या बगल में बहुत कम या बिल्कुल बाल न होना, और संकीर्ण या छोटी योनि। मिर्जापुर की इस किशोरी में भी ये लक्षण मौजूद थे, जिसने डॉक्टरों को इस दुर्लभ बीमारी की ओर इशारा किया।

सामाजिक और चिकित्सीय सवाल

यह मामला स्वास्थ्य, जेनेटिक विकारों, और सामाजिक जागरूकता जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। AIS जैसी दुर्लभ बीमारियों के बारे में कम जानकारी होने के कारण परिवार और समाज अक्सर ऐसी स्थिति को समझ नहीं पाते। यह घटना समाज से चिकित्सीय जागरूकता, परिवारों से धैर्य, और चिकित्सा क्षेत्र से ऐसी बीमारियों के लिए बेहतर परामर्श की माँग करती है। साथ ही, यह सवाल उठता है कि क्या ऐसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं के लिए समाज को और शिक्षित करने की जरूरत है।

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