लखनऊ, उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो-रक्षा और गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने वाली उन विभूतियों को सम्मानित करने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जो इस क्षेत्र में समर्पण से लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि गो-सेवा भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है और इस कार्य में योगदान देने वाले लोगों का सार्वजनिक सम्मान किया जाना चाहिए। यह निर्णय गोसेवा आयोग की बैठक में लिया गया, जहां मुख्यमंत्री ने निराश्रित गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की।
‘भूसा बैंक’ और गोचर भूमि पर विशेष जोर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने प्रत्येक गो-आश्रय स्थल में ‘भूसा बैंक’ की स्थापना पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि गोसेवा आयोग के पदाधिकारी और पशुधन विभाग के अधिकारी नियमित रूप से गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण करें। आयोग के पदाधिकारियों को 2-2 के समूह में मंडलवार भ्रमण करने को कहा गया है, ताकि ‘भूसा बैंक’ की स्थापना और गोचर भूमि के विस्तार कार्य को तेजी से पूरा किया जा सके। प्रत्येक भ्रमण की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी। इन भ्रमणों में वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी शामिल रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्री के नेतृत्व में राज्यव्यापी निरीक्षण और मुख्यालय स्तर से निदेशक द्वारा मासिक औचक निरीक्षण भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य
योगी ने कहा कि गो-संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती और सतत विकास का मजबूत आधार है। उन्होंने स्थानीय किसानों के साथ समन्वय स्थापित कर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ने के निर्देश दिए।
सीसीटीवी और पारदर्शिता पर फोकस
मुख्यमंत्री ने सभी गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सीएसआर फंड के प्रभावी उपयोग की संभावनाओं पर भी बल दिया। कहा कि पारदर्शिता और तकनीक आधारित निगरानी से व्यवस्थाएं और सुदृढ़ होंगी।
प्रदेश में गो-आश्रयों की वर्तमान स्थिति
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 7,527 गो-आश्रय स्थलों में 12.39 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इनमें:
- 6,433 अस्थायी स्थलों में 9.89 लाख गोवंश
- 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख गोवंश
- 323 कान्हा गो-आश्रयों में 77,925 गोवंश
- 253 कांजी हाउस में 13,576 गोवंश
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख लाभार्थियों को 1.83 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। इनके सत्यापन और समुचित भरण-पोषण के निर्देश दिए गए हैं।
भूसा, साइलेज और गोचर भूमि की उपलब्धता
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भूसा और साइलेज के टेंडर प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जा रही है। निगरानी व्यवस्था के तहत 74 जनपदों में 5,446 गो-आश्रय स्थलों पर 7,592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं। 52 जनपदों में कमांड एंड कंट्रोल रूम स्थापित हैं, जबकि शेष में प्रक्रिया चल रही है। गोचर भूमि के प्रभावी उपयोग के लिए 61,118 हेक्टेयर से अधिक भूमि उपलब्ध है, जिसमें से 10,641.99 हेक्टेयर को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ा गया है और 7,364.03 हेक्टेयर में हरे चारे का विकास किया जा चुका है।
गोबर गैस संयंत्र और अन्य उत्पाद
प्रदेश में 97 गोबर गैस संयंत्र संचालित हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और आय सृजन का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इनके विस्तार पर जोर दिया। विभिन्न जनपदों में स्वयं सहायता समूहों और एनजीओ द्वारा गो-पेंट, वर्मी कम्पोस्ट, गो-दीप जैसे उत्पादों के निर्माण को आत्मनिर्भरता का सफल मॉडल बताया। मुजफ्फरनगर का गो-अभयारण्य इस दिशा में उत्कृष्ट उदाहरण है।
वृहद गो-संरक्षण केंद्रों की प्रगति
630 स्वीकृत वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में से 518 पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष निर्माणाधीन हैं। पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में खुरपका-मुंहपका, गलाघोटू और लंपी स्किन डिजीज के विरुद्ध व्यापक टीकाकरण अभियान चल रहे हैं। पशुपालकों को निरंतर प्रशिक्षित किया जा रहा है।
यह बैठक गो-रक्षा और गो-आश्रयों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार के संकल्प को दर्शाती है। मुख्यमंत्री का यह फैसला गो-सेवा करने वालों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी प्रयास है।

