गांव की सादगी में छिपी अरबों की संपत्ति: Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू की प्रेरणादायक कहानी – साइकिल से यात्रा, Arattai से नई ऊंचाई

Founder of Zoho: Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू की कहानी सादगी और सफलता का संगम है। तमिलनाडु के गांव में साइकिल से चलने वाले श्रीधर की नेटवर्थ 5 अरब डॉलर से ज्यादा है। उनका स्वदेशी ऐप Arattai Apple Store में नंबर 1 बन गया, 3.5 लाख डेली साइन-अप्स के साथ। IIT और प्रिंसटन से पढ़े श्रीधर ने Zoho को बिना फंडिंग के दिग्गज बनाया।

Samvadika Desk
8 Min Read
Zoho के सफलता की प्रेरणादायी कहानी
Highlights
  • श्रीधर वेम्बू: Zoho के फाउंडर, गांव में साइकिल से चलते, 5 अरब डॉलर की नेटवर्थ!
  • Arattai ऐप ने बनाया रिकॉर्ड, Apple Store में टॉप, 3.5 लाख डेली साइन-अप्स!
  • Arattai: स्वदेशी मैसेजिंग ऐप, WhatsApp को टक्कर, ग्रामीण यूजर्स के लिए खास!

Founder of Zoho: भारत के टेक जगत में एक ऐसा नाम जो सादगी और सफलता का अनोखा संगम है – श्रीधर वेम्बू। Zoho Corporation के संस्थापक और CEO के रूप में वे स्वदेशी मैसेजिंग ऐप Arattai के जरिए फिर से सुर्खियों में हैं। WhatsApp जैसे फीचर्स से लैस यह ऐप हाल ही में Apple App Store के सोशल नेटवर्किंग कैटेगरी में टॉप पर पहुंच गया, और दैनिक साइन-अप्स 3,000 से बढ़कर 3.5 लाख हो गए। लेकिन श्रीधर की असली पहचान उनकी साधारण जिंदगी है – तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में रहना, साइकिल पर लोकल यात्राएं करना, और फिर भी 5 अरब डॉलर से ज्यादा की नेटवर्थ। फोर्ब्स की 2024 टॉप-100 इंडियन बिलियनेयर्स लिस्ट में वे 51वें स्थान पर थे। आइए, इस अनोखे उद्यमी की पूरी कहानी को विस्तार से जानते हैं, जो न केवल टेक की दुनिया बल्कि ग्रामीण विकास की प्रेरणा भी है।

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शुरुआती जीवन: गांव से IIT तक का सफर

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीधर वेम्बू का जन्म 1968 में तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में हुआ था, जहां सादगी और मेहनत ही जीवन का मूल मंत्र था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन शिक्षा के प्रति लगाव ने उन्हें आगे बढ़ाया। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई स्थानीय स्तर पर पूरी की और फिर IIT मद्रास में प्रवेश लिया। 1989 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद वे अमेरिका चले गए। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से 1994 में पीएचडी पूरी की, जहां उन्होंने सिस्टम डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स पर रिसर्च की।

पीएचडी के बाद श्रीधर ने अमेरिका में क्वालकॉम जैसी प्रमुख कंपनी में सिस्टम डिजाइन इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया। लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया की चकाचौंध उन्हें भा नहीं सकी। वे भारत लौट आए और बड़े शहरों जैसे दिल्ली या मुंबई का रुख करने के बजाय तमिलनाडु के तेनकासी नामक छोटे से गांव में बस गए। यह फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। श्रीधर का मानना है कि ग्रामीण भारत में ही सच्ची नवाचार की जड़ें हैं, और यहीं से उन्होंने अपना साम्राज्य खड़ा किया।

Zoho की नींव: दो रिश्तेदारों और तीन दोस्तों से शुरू हुआ सफर

1996 में श्रीधर ने दो पारिवारिक सदस्यों और तीन दोस्तों के साथ मिलकर एडवांस्ड नेटवर्क (AdventNet) नामक कंपनी की शुरुआत की। यह कंपनी सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर फोकस करती थी, खासकर नेटवर्क मैनेजमेंट टूल्स पर। 2009 में इसका नाम बदलकर Zoho Corporation कर दिया गया, जो अब क्लाउड-बेस्ड बिजनेस सॉफ्टवेयर का दिग्गज है। Zoho का फोकस छोटे-मध्यम उद्यमों (SMEs) पर रहा, जहां उन्होंने CRM, ईमेल, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसे टूल्स बनाए। कंपनी ने कभी वेंचर कैपिटल फंडिंग नहीं ली – यह पूरी तरह बूटस्ट्रैप्ड है, जो श्रीधर की लंबी अवधि की सोच को दर्शाता है।

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Zoho ने वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की। इसके क्लाइंट्स में नेटफ्लिक्स, लोरियल और पेपाल जैसे नाम शामिल हैं। FY23 में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8,703 करोड़ रुपये रहा, भले ही तब सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री मंदी का शिकार हो रही थी। फरवरी 2024 की बरगुंडी प्राइवेट हुरुन इंडिया-500 रिपोर्ट में Zoho को नॉन-लिस्टेड कंपनियों में तीसरे स्थान पर रखा गया, जहां इसका मूल्यांकन 1.04 लाख करोड़ रुपये था। श्रीधर ने 2004 में Zoho यूनिवर्सिटी (अब Zoho स्कूल्स ऑफ लर्निंग) की स्थापना भी की, जो ग्रामीण युवाओं को टेक एजुकेशन प्रदान करती है। 2019 में वे तंजावुर चले गए, जहां वे ग्रामीण विकास पर फोकस करते हैं।

Arattai का कमाल: स्वदेशी मैसेजिंग ऐप ने तोड़ा रिकॉर्ड

Arattai – जो तमिल में “चैट” या “बातचीत” का मतलब है – Zoho का लेटेस्ट जेम है। यह ऐप जनवरी 2021 में सॉफ्ट-लॉन्च हुआ था, जब WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी चेंजेस ने भारत में स्वदेशी विकल्पों की मांग बढ़ा दी। Arattai एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग, वॉयस/वीडियो कॉल्स, ग्रुप चैट्स (1,000 सदस्यों तक), मीडिया शेयरिंग और चैनल्स जैसे फीचर्स ऑफर करता है। यह फ्री है, यूजर-फ्रेंडली, और लो-एंड फोन्स पर भी स्मूथ चलता है।

सितंबर 2025 में Arattai ने धमाल मचा दिया। दैनिक साइन-अप्स तीन दिनों में 100 गुना बढ़कर 3.5 लाख हो गए, जिससे Zoho को सर्वर्स बढ़ाने पड़े। यह Apple App Store के सोशल नेटवर्किंग कैटेगरी में नंबर 1 बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसे “सुरक्षित, यूजर-फ्रेंडली और पूरी तरह भारतीय” बताकर समर्थन दिया। श्रीधर ने कहा कि Arattai जैसी परियोजनाएं वित्तीय दबाव वाली पब्लिक कंपनियों में संभव नहीं होतीं। यह ऐप ग्रामीण और सेमी-अर्बन यूजर्स के लिए डिजाइन किया गया है, जो लो-बैंडविड्थ पर भी काम करता है।

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सादा जीवनशैली: अरबपति जो साइकिल पर चलते हैं

श्रीधर की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी है। 5 अरब डॉलर की संपत्ति के बावजूद वे तंजावुर के एक गांव में रहते हैं। लोकल ट्रिप्स साइकिल पर करते हैं, महंगे गैजेट्स या लग्जरी कारों से दूर रहते हैं। उनका मानना है कि सच्ची खुशी ग्रामीण जीवन और सामाजिक योगदान से आती है। वे कहते हैं, “मेरी सबसे बड़ी खुशी के सबक उन लोगों से आते हैं जिनकी संपत्ति लगभग शून्य है।” 2025 में भी उनकी यह फिलॉसफी बदली नहीं, भले ही Zoho ने चिप मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए क्षेत्रों में कदम रखा हो।

नेटवर्थ का सफर: 1.6 अरब से 5.85 अरब डॉलर तक

श्रीधर वेम्बू एंड फैमिली की नेटवर्थ का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है। 2018 में यह 1.6 अरब डॉलर थी, जो 2024 तक 5.8 अरब डॉलर हो गई। 2025 के अनुमानों के मुताबिक यह 3 से 5.85 अरब डॉलर के बीच है, जो उन्हें भारत के 39वें सबसे अमीर व्यक्ति बनाता है। उनकी बहन राधा वेम्बू, Zoho की को-फाउंडर, 3.2 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ टॉप अमीर महिलाओं में शुमार हैं। Zoho का 88% स्टेक श्रीधर के पास है, जो कंपनी की ग्रोथ का मुख्य कारण है।

IPO की अटकलें: जल्दबाजी नहीं, लंबी सोच

Arattai की सफलता के बाद Zoho IPO की अफवाहें तेज हो गईं, लेकिन श्रीधर ने साफ कर दिया कि कंपनी शेयर मार्केट में लिस्टिंग के लिए जल्दबाजी नहीं करेगी। X (पूर्व ट्विटर) पर उन्होंने लिखा, “Zoho एक इंडस्ट्रियल रिसर्च लैब है, जो खुद फंड जुटाती है। हम शॉर्ट-टर्म बेनिफिट्स को इग्नोर करते हैं, जब तक नुकसान न हो।” उनका फोकस इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी पर है, न कि स्टॉक प्राइस पर। जनवरी 2025 में वे CEO से चीफ साइंटिस्ट बने, ताकि R&D पर ज्यादा ध्यान दे सकें।

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श्रीधर वेम्बू की कहानी साबित करती है कि सच्ची सफलता पैसे से नहीं, बल्कि प्रभाव से मापी जाती है। Arattai जैसे ऐप्स से वे न केवल टेक इंडस्ट्री को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण भारत को डिजिटल दुनिया से जोड़ भी रहे हैं। उनकी सादगी आज के दौर में एक सबक है – अमीर बनो, लेकिन जड़ों से जुड़े रहो।

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