हैदराबाद: संतान न होने की वजह से तलाक हो गया। परिवार ने दोबारा साथ आने से इनकार कर दिया। फिर भी पति-पत्नी एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाए। दोबारा घर बसाने और परिवार को मनाने के लिए दोनों ने एक खतरनाक रास्ता चुना – एक चार साल की मासूम बच्ची को चुराकर उसे अपनी संतान बताने की साजिश। लेकिन हैदराबाद के गोलकोंडा पुलिस ने 24 घंटे के अंदर ही पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया और बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया।
21 नवंबर, दोपहर 12:30 बजे: मासूम गायब
सालेह नगर कंचा की रहने वाली नुजहत फातिमा अपनी चार साल की बेटी सफिया बेगम को नानी के घर छोड़कर गई थीं। दोपहर साढ़े बारह बजे के करीब बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। अचानक गायब। नानी ने इधर-उधर ढूंढा, पड़ोसियों से पूछा – कोई पता नहीं। घबराकर नुजहत को खबर की और गोलकोंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने तुरंत BNSS की धारा 139(1) के तहत केस दर्ज किया और नौ विशेष टीमों का गठन किया। इलाके के सारे सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। एक फुटेज में बुर्का पहनी एक महिला बच्ची को गोद में लेकर ऑटो में बैठती दिखी। ऑटो का नंबर नोट किया गया। तकनीकी निगरानी और लोकल इनपुट के दम पर पुलिस कुछ ही घंटों में असली आरोपियों तक पहुंच गई।
आरोपी: तलाकशुदा पति-पत्नी, नाम – फैयाज और समरीन
- मोहम्मद फैयाज (25) – ऑटो ड्राइवर
- समरीन उर्फ सलमा बेगम (23) – फैयाज की पूर्व पत्नी
दोनों की शादी को कई साल हो चुके थे, लेकिन कोई संतान नहीं हुई। समरीन का एक बार गर्भपात भी हो चुका था। फैयाज के परिवार ने संतान न होने का हवाला देकर दबाव बनाया और तलाक करा दिया। तलाक के बाद भी दोनों एक-दूसरे से अलग नहीं रह पाए। दोबारा साथ आने की कोशिश की, लेकिन फैयाज का परिवार तैयार नहीं था। उनका एक ही तर्क – “संतान नहीं होगी तो घर कैसे चलेगा?”
इसी मजबूरी में दोनों ने प्लान बनाया – एक छोटी बच्ची चुराओ, उसे अपनी बताओ, परिवार मान जाएगा। 21 नवंबर को समरीन ने सालेह नगर में बच्ची को बहलाया-फुसलाया, गोद में उठाया और फैयाज के ऑटो में बैठकर फरार हो गई। बच्ची को समरीन के घर में छिपा कर रखा गया था।
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई: 24 घंटे में बच्ची बरामद
पुलिस ने जैसे ही फुटेज से ऑटो का पता लगाया, फैयाज को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने समरीन का नाम बताया। दोनों को गिरफ्तार कर बच्ची बरामद कर ली गई। बच्ची पूरी तरह सुरक्षित थी। पुलिस ने ऑटो, दो मोबाइल फोन और बच्ची के कपड़े भी जब्त किए।
गोलकोंडा इंस्पेक्टर ने मीडिया रिपोर्टर को बताया, “यह बहुत ही संवेदनशील केस था। बच्ची की सुरक्षा सबसे ऊपर थी। टीम ने दिन-रात काम किया और 24 घंटे के अंदर बच्ची को उसके माता-पिता को सौंप दिया।”
परिवार की मजबूरी, मासूम की जान से खेला
आरोपी दंपति का दर्द समझ में आता है, लेकिन उस दर्द को पूरा करने के लिए एक मासूम की जिंदगी दांव पर लगा देना – यह किसी भी सूरत में माफ़ी के लायक नहीं। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
यह घटना एक बार फिर समाज को आईना दिखाती है – संतान न होने का दर्द कितना भी हो, लेकिन उसकी भरपाई किसी और की संतान को चुराकर नहीं की जा सकती। हैदराबाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने एक मासूम की जान बचा ली और समाज को बड़ा सबक भी दिया।

