आगरा, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के आगरा में शाहगंज के केदार नगर कॉलोनी में धर्मांतरण का एक बड़ा अड्डा पकड़ा गया है। यहाँ हर रविवार को प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। पुलिस ने मुख्य संचालक राजकुमार लालवानी सहित आठ लोगों, जिनमें तीन महिलाएँ शामिल हैं, को गिरफ्तार किया है। सभी को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया। यह सनसनीखेज मामला चर्चा में है, और पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है।
प्रार्थना सभा या धर्मांतरण की साजिश?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शाहगंज पुलिस को स्थानीय निवासियों सुनील करमचंदानी और घनश्याम हेमलानी ने उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के माध्यम से केदार नगर में चल रहे धर्मांतरण की शिकायत की थी। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के निर्देश पर पुलिस ने राजकुमार लालवानी के घर पर नजर रखी। जाँच में पता चला कि हर रविवार को उनके घर पर प्रार्थना सभा के नाम पर भीड़ जुटती थी, जहाँ बाइबिल का पाठ पढ़ाया जाता था। लोगों को बताया जाता था कि हिंदू रीति-रिवाज जैसे टीका लगाना या कलावा बाँधना कष्ट दूर नहीं करता, जबकि ईसा मसीह के चमत्कार बीमारियों को ठीक करते हैं।
झाड़-फूंक और प्रलोभन
प्रार्थना सभाओं में तंत्र-मंत्र का झाँसा देकर झाड़-फूंक की जाती थी। लोगों को लुभाने के लिए दावा किया जाता था कि मसीह समाज गरीबों की मदद करता है, मिशनरी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा और मिशनरी अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलता है। इसके अलावा, यह भी कहा जाता था कि ईसाई धर्म अपनाने से नौकरी आसानी से मिलती है। इन सभाओं में बीमार लोग भी इलाज की उम्मीद में शामिल होते थे, जिससे धर्मांतरण का नेटवर्क और मजबूत हो रहा था।
राजकुमार लालवानी का नेटवर्क
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने मीडिया रिपोर्टर को बताया कि राजकुमार लालवानी, जो बिजली के सामान की दुकान चलाता है, चार साल पहले महाराष्ट्र के उल्लास नगर से आगरा आया था। उसने खुद ईसाई धर्म अपना लिया और इसका प्रचार शुरू किया। वह प्रार्थना सभाओं में बाइबिल और मसीह समाज की किताबें बाँटता था। ‘चर्च ऑफ गॉड’ नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें 86 सदस्य थे और रोज़ाना ईसाई धर्म के प्रचार के लिए संदेश व वीडियो शेयर किए जाते थे। हर प्रार्थना सभा का वीडियो यूट्यूब पर ‘चर्च ऑफ गॉड आगरा’ पेज पर अपलोड होता था। पुलिस को शक है कि राजकुमार को बाहर से आर्थिक मदद मिल रही थी।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
पुलिस ने छापेमारी में राजकुमार लालवानी (केदार नगर), जय कुमार (राधे हाईट्स, शास्त्रीपुरम), अरुण कुमार (बारहखंभा), कमल कुंडलानी (राहुल ग्रीन, दयालबाग), अनूप कुमार (पंचशील कॉलोनी, दौरेठा), और तीन महिलाओं—नीता, मीनू, और ट्विंकल—को गिरफ्तार किया। उनके पास से 15 बाइबिल, तीन गीतों की किताबें, चार डायरी, छह मोबाइल, दो कार, और 13,665 रुपये बरामद किए गए। सभी के खिलाफ विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम और संगठित अपराध की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
आगरा में पहले भी पकड़े गए मामले
आगरा में पहले भी धर्मांतरण के कई मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में सदर की दो सगी बहनों का इस्लाम में धर्मांतरण कराने वाला गिरोह पकड़ा गया था, जिन्हें कोलकाता से बरामद किया गया और 14 आरोपियों को जेल भेजा गया। पहले पुलिस ऐसे मामलों में शांतिभंग का चालान कर रफा-दफा कर देती थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू होने से सख्त कार्रवाई हो रही है। इस मामले में भी पुलिस गंभीरता से जाँच कर रही है और बाकी संदिग्धों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
सामाजिक और कानूनी सवाल
यह घटना धर्मांतरण, सामाजिक विश्वास, और प्रलोभन के जरिए साजिश जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करती है। प्रार्थना सभाओं के नाम पर बीमार लोगों को ठीक करने और मुफ्त सुविधाओं का लालच देकर धर्मांतरण कराना समाज में धार्मिक संवेदनशीलता को चुनौती देता है। यह मामला समाज से जागरूकता, परिवारों से सतर्कता, और प्रशासन से कठोर कार्रवाई की माँग करता है। साथ ही, यह सवाल उठता है कि क्या बाहरी फंडिंग से ऐसे नेटवर्क को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह प्रकरण न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और धार्मिक स्तर पर भी गहरी बहस छेड़ रहा है।

