बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने शहर को डिजिटल और आधुनिक छवि देने के लिए एक नई महत्वाकांक्षी परियोजना का ऐलान किया है। रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-7 में 11 मीटर ऊंचा अत्याधुनिक मीडिया टावर बनाया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत करीब 2.5 करोड़ रुपये है और यह उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा मीडिया टावर होगा। बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. ए. मनिकंडन ने बताया कि यह टावर कोयंबटूर के मॉडल की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य जनता तक सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे पहुंचाना है।
टावर की खासियतें और तकनीक
- विशाल डिस्प्ले एरिया: टावर में 8 मीटर का बड़ा डिस्प्ले एरिया होगा।
- 5,000+ एलईडी स्क्रीन: इसमें 5,000 से ज्यादा एलईडी लगाई जाएंगी, जो लाखों रंगों के साथ फ्लिकर इफेक्ट में रात के समय शानदार नजारा पेश करेंगी।
- ढलान वाली स्क्रीन: मुख्य स्क्रीन की डिजाइन सिंगापुर के प्रसिद्ध गार्डन बाय द वे पार्क की तरह ढलान वाली होगी, जिससे दूर से भी साफ दिखाई दे।
- कंट्रोल रूम: टावर में आधुनिक कंट्रोल रूम बनेगा, जहां से पूरा कंटेंट और मीडिया प्लेयर संचालित किया जाएगा।
मुख्य अभियंता एपीएन सिंह ने मीडिया पत्रकार को बताया कि टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य और उपयोग
बीडीए का कहना है कि यह टावर मुख्य रूप से केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और जागरूकता अभियानों का प्रचार करेगा। इसके अलावा स्क्रीन पर व्यावसायिक विज्ञापन भी चलाए जाएंगे, जिससे राजस्व अर्जित होगा। अधिकारियों की उम्मीद है कि यह टावर शहर की सुंदरता बढ़ाएगा, पर्यटन को प्रोत्साहन देगा और इसे प्रदेश के अन्य शहरों के लिए मॉडल परियोजना बनाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया
परियोजना की घोषणा के बाद शहर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे शहर के लिए डिजिटल सरप्राइज और आधुनिक विकास का प्रतीक बता रहे हैं। वहीं कई स्थानीय निवासी सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह टावर वास्तव में जनता की भलाई के लिए है या सिर्फ सरकारी प्रचार और व्यावसायिक विज्ञापनों का नया अड्डा बनकर रह जाएगा। कुछ का कहना है कि 2.5 करोड़ रुपये की यह लागत विकास के अन्य जरूरी कामों में लगाई जा सकती थी।
विकास की नई दिशा या दिखावा?
बीडीए इस परियोजना को शहर की नई पहचान के रूप में पेश कर रहा है। अगर यह टावर वाकई में सूचनाओं का हब बना और पर्यटन को बढ़ावा दिया, तो यह बरेली के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। लेकिन अगर यह सिर्फ सरकारी योजनाओं और विज्ञापनों का माध्यम बनकर रह गया, तो इसे दिखावटी विकास का एक और उदाहरण माना जा सकता है।
फिलहाल टेंडर प्रक्रिया शुरू होने और निर्माण कार्य के आगे बढ़ने पर सबकी नजरें टिकी हैं। आने वाले समय में यह टावर बरेली की डिजिटल छवि को नई ऊंचाई देगा या नहीं, यह समय ही बताएगा।

