बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम-2021 के तहत पहली सजा का ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। जिला जज ने तौफीक नामक युवक को एक युवती पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के मामले में तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 29,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से आधी राशि पीड़िता को दी जाएगी।
प्रेमजाल और धर्म परिवर्तन का दबाव
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, सिरौली थाना क्षेत्र के व्योधन खुर्द निवासी तौफीक पर पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाए। 20 अक्तूबर 2024 को दर्ज शिकायत में पीड़िता ने बताया कि तौफीक ने उसे गुमराह कर प्रेमजाल में फँसाया। उसने निकाह के लिए पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और उसका नाम बदलकर ‘शबनम’ रख दिया। तौफीक आए दिन रास्ता रोककर उसे तंग करता था और उसके साथी कर्मचारी को जान से मारने की धमकी भी दी। तौफीक के खिलाफ पहले से चोरी और लूट के कई मामले दर्ज थे, जिससे उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि का पता चलता है।
पुलिस और अदालत की कार्रवाई
पीड़िता की शिकायत पर सिरौली थाना पुलिस ने तौफीक के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम-2021 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मुकदमा दर्ज किया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद 20 दिसंबर 2024 को अदालत ने मामले का संज्ञान लिया और केस को जिला जज की अदालत में भेजा। 28 जनवरी 2025 को आरोप तय हुए, और मात्र छह महीने 20 दिन में सुनवाई पूरी कर जिला जज ने तौफीक को दोषी ठहराया। डीजीसी क्राइम रीतराम राजपूत ने बताया कि यह बरेली में इस अधिनियम के तहत पहली सजा है।
ऐतिहासिक फैसला
उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम-2021 के लागू होने के बाद बरेली की अदालत ने इस मामले में तेजी से सुनवाई पूरी की। जिला जज ने तौफीक को तीन साल की सश्रम कैद और 29,000 रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को दी जाए, ताकि उसे आर्थिक सहायता मिल सके। इस फैसले ने न केवल पीड़िता को न्याय दिलाया, बल्कि जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कड़ा संदेश भी दिया।
पीड़िता की शिकायत
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि तौफीक ने उसे कोचिंग के दौरान अपनी बातों में फँसाया। उसने शादी का झाँसा देकर पीड़िता को मानसिक रूप से परेशान किया और उसका नाम बदलकर शबनम रख दिया। तौफीक की धमकियों और उत्पीड़न से तंग आकर पीड़िता ने पुलिस में शिकायत की। उसने बताया कि तौफीक ने न केवल उसका रास्ता रोका, बल्कि उसके साथी को भी धमकी दी, जिससे वह डर के साये में जी रही थी।
सामाजिक और कानूनी सवाल
यह मामला लव जिहाद, जबरन धर्म परिवर्तन, और प्रेम के नाम पर धोखाधड़ी जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। तौफीक की आपराधिक पृष्ठभूमि और पीड़िता पर दबाव बनाने की कोशिश ने समाज में धार्मिक संवेदनशीलता और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। यह फैसला समाज से जागरूकता और युवतियों को ऐसी साजिशों से बचाने की माँग करता है। साथ ही, यह पुलिस और न्यायिक व्यवस्था से त्वरित और कठोर कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित करता है।
कानूनी मिसाल
बरेली में इस अधिनियम के तहत पहली सजा ने एक मिसाल कायम की है। यह फैसला उत्तर प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून के प्रभावी कार्यान्वयन को दर्शाता है। पीड़िता को आर्थिक सहायता और सजा का प्रावधान अन्य पीड़ितों को भी न्याय के लिए आगे आने का हौसला देगा। इस घटना ने बरेली और आसपास के इलाकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है, और लोग इस फैसले को सराह रहे हैं।

