बरेली: मेडिकल कॉलेज की नर्स निकली बच्चा चोर गिरोह की किंगपिन, अविवाहित गर्भवती महिलाएं थीं मुख्य टारगेट

Bareilly News: बरेली मेडिकल कॉलेज की नर्स सीता बच्चा चोरी और तस्करी के संगठित गिरोह की मुख्य सरगना निकली है। गिरोह अविवाहित गर्भवती महिलाओं को निशाना बनाता था। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

Samvadika Desk
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बरेली पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया (इमेज - TV9)
Highlights
  • मेडिकल कॉलेज की नर्स निकली बच्चा चोर गिरोह की सरगना!
  • अविवाहित गर्भवती महिलाओं को बनाया मुख्य टारगेट!
  • गाजियाबाद-बरेली-लखीमपुर तक फैला था पूरा नेटवर्क!
  • फर्जी डॉक्टर और बिचौलिए भी शामिल, 6 गिरफ्तार!

बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली पुलिस ने एक बड़े और संगठित बच्चा चोरी एवं तस्करी के रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह की मुख्य सरगना बरेली मेडिकल कॉलेज में तैनात एक नर्स सीता बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह अस्पतालों में अकेली आने वाली अविवाहित गर्भवती महिलाओं को निशाना बनाता था, उनके नवजात बच्चों को चुराकर या खरीदकर देश भर के आईवीएफ सेंटर्स और निजी अस्पतालों में बेचता था।

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मंदिर से बच्चे के अपहरण के बाद खुला राज

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 24 मई को मनौना धाम मंदिर परिसर से डेढ़ साल के बच्चे ऋषभ का अपहरण कर लिया गया था। पुलिस ने दो दिन बाद 26 मई को मुठभेड़ के दौरान दो अपहरणकर्ताओं योगेश कनौजिया और पवन सिंह को गिरफ्तार किया और बच्चे को सकुशल बचा लिया।

पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि यह अपहरण किसी साधारण घटना से कहीं बड़ा था। गिरोह बेऔलाद दंपतियों को बच्चा बेचने के लिए पूरी साजिश रचता था। इसमें बिचौलिए, फर्जी डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ सक्रिय रूप से शामिल थे।

गिरोह का खतरनाक तरीका काम करने का

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य अस्पतालों में गुपचुप तरीके से आने वाली अविवाहित गर्भवती महिलाओं से संपर्क करते थे। उन्हें डिलीवरी के समय पूरी मदद और गोपनीयता का भरोसा दिलाया जाता था। बच्चा पैदा होने के बाद उसे जबरन या धोखे से लेकर अवैध रूप से बेच दिया जाता था।

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गिरोह में भूमिकाएं बंटी हुई थीं — कुछ लोग शिकार (गर्भवती महिलाएं) ढूंढते, कुछ बच्चे का इंतजाम करते और बिचौलिए अमीर दंपतियों से संपर्क साधकर सौदा तय करते थे।

फर्जी डॉक्टरों और बिचौलियों का जाल

पूरे नेटवर्क को लखीमपुर निवासी उत्तम बाजपेयी समन्वय करता था। वह सीतापुर के फर्जी डॉक्टर संजय विश्वास और लखीमपुर खीरी के फर्जी डॉक्टर केशव राम उर्फ मंजेश के निर्देशन में काम करता था। ये फर्जी डॉक्टर बच्चों की सप्लाई का जिम्मा संभालते थे।

सभी बच्चों को अंत में बरेली मेडिकल कॉलेज की नर्स सीता को सौंपा जाता था। सीता बदायूं के दातागंज की रहने वाली है और फिलहाल मीरगंज में रहती है। पुलिस को पता चला है कि उसके देश भर के कई निजी अस्पतालों और आईवीएफ सेंटर्स से गहरे संबंध थे, जहां वह बच्चों का सौदा करती थी।

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पुलिस की सख्त कार्रवाई

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने कहा कि यह एक संगठित अपराध गिरोह है, इसलिए सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनकी अवैध रूप से कमाई गई संपत्तियों को भी कुर्क किया जाएगा।

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अंशिका वर्मा ने मीडिया को बताया कि गिरोह के तार कई चिकित्सा संस्थानों से जुड़े हुए हैं। योगेश और पवन की गिरफ्तारी के बाद अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी सदस्यों की तलाश जारी है।

यह मामला उत्तर प्रदेश में बच्चा तस्करी के बढ़ते खतरे को एक बार फिर उजागर करता है। पुलिस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह से तोड़ने और शामिल लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने का दावा कर रही है।

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