लखनऊ, उत्तर प्रदेश: योगी आदित्यनाथ सरकार अब प्रदेश के हर जिले में जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार के लिए एक बड़ा अभियान चला रही है। राज्य के सभी 75 जिलों में कम से कम 100-100 तालाबों को ‘मॉडल तालाब’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन तालाबों को प्लास्टिक मुक्त, ग्रे वाटर से सुरक्षित और पूरी तरह स्वच्छ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना को ‘मेरा तालाब-मेरी जिम्मेदारी’ अभियान से जोड़ा जाएगा, जिसके तहत ग्रामीण समुदाय को तालाबों की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी दी जाएगी।
पहले चरण में बड़े गांवों पर फोकस
पंचायती राज विभाग और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत तैयार की गई इस कार्ययोजना के अनुसार पहले चरण में 5,000 से अधिक आबादी वाले गांवों में तालाबों का चयन किया जाएगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सभी जिला पंचायती राज अधिकारियों को सर्कुलर जारी कर दिया गया है। चयनित तालाबों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि:
- कितने परिवारों का ग्रे वाटर (घरेलू अपशिष्ट जल) तालाब में जा रहा है
- कितनी नालियों से पानी सीधे तालाब में गिर रहा है
- प्रतिदिन औसतन कितना प्लास्टिक अपशिष्ट तालाब में फेंका जा रहा है
- तालाब का बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) स्तर कितना है
यह सर्वे इसलिए जरूरी है ताकि मॉडल तालाब विकसित होने के बाद तुलनात्मक सुधार का आकलन किया जा सके।
मॉडल तालाब बनाने की खास व्यवस्थाएं
जिला पंचायती राज अधिकारी नीलेश प्रताप सिंह ने बताया कि मॉडल तालाब विकसित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
- तालाब के चारों ओर ‘नो प्लास्टिक जोन’ घोषित किया जाएगा।
- ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पारित कराया जाएगा कि तालाब में प्लास्टिक अपशिष्ट नहीं फेंका जाएगा।
- तालाब में गिरने वाली नालियों पर प्लास्टिक ट्रैप वाली जाली और फिल्टर चैंबर लगाए जाएंगे। इससे प्लास्टिक और गंदगी तालाब में पहुंचने से पहले ही रुक जाएगी।
- ग्रे वाटर को तालाब में सीधे न जाने देने के लिए नाली के अंत में बायो फिल्टर सिस्टम लगाया जाएगा। इसमें कंकड़, रेत, केली और केना (एक प्रकार का खरपतवार) के पौधे लगाए जाएंगे, जो प्राकृतिक रूप से पानी को शुद्ध करेंगे।
- समुदाय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था होगी ताकि प्लास्टिक और ग्रे वाटर का प्रवाह स्थायी रूप से रोका जा सके।
इन उपायों से तालाब पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ हो जाएगा। ग्रे वाटर का स्थायी समाधान होगा और जल की गुणवत्ता में सुधार आएगा। इससे मच्छरजनित रोगों में कमी आएगी और ग्रामीण स्वास्थ्य में आशातीत सुधार होगा।
‘मेरा तालाब-मेरी जिम्मेदारी’ अभियान का उद्देश्य
यह अभियान ग्रामीण समुदाय को जागरूक करने और तालाबों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपने के लिए शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह योजना तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि तालाब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण जीवन का आधार हैं। इन तालाबों को मॉडल बनाने से जल संकट, प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं पर लगाम लगेगी।
यह योजना पूरे प्रदेश में लागू होगी और जल्द ही हर जिले में अभियान शुरू हो जाएगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इससे उनके तालाबों की सूरत बदल जाएगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल का स्रोत सुरक्षित रहेगा।

