बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली में सरकारी जमीनों – तालाब, चकमार्ग, खाई और सीलिंग भूमि – पर अवैध रूप से कॉलोनियां बसाने का बड़ा मामला सामने आया है। जिला सहकारी संघ के पूर्व अध्यक्ष महेश पांडेय ने 22 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक शिकायत पहुंचाई। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शासन ने 19 दिसंबर को जिलाधिकारी को जांच और कार्रवाई के आदेश जारी किए। अब सदर तहसीलदार को तीन बड़ी कॉलोनियों – बदायूं मार्ग की साउथ सिटी, पीलीभीत बाइपास की हारमोनी और डोहरा मार्ग की होरीजन सुपरसिटी – की जमीन के अभिलेखों की गहन जांच सौंपी गई है। अगर अवैध कब्जा साबित हुआ तो कॉलोनियां सील होने से लेकर बुलडोजर एक्शन तक हो सकता है।
शिकायत में क्या-क्या आरोप?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महेश पांडेय ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं:
- कॉलोनाइजरों ने राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी रिपोर्ट बनवाईं और बीडीए (बरेली विकास प्राधिकरण) से नक्शे पास करा लिए।
- साउथ सिटी में तालाब, चकमार्ग और खाई की जमीन के तथ्य छिपाए गए।
- होरीजन सुपरसिटी की पूरी जमीन सीलिंग की है।
- सिल्वर स्टेट और हारमोनी कॉलोनी में भी तालाब और जलमग्न भूमि पर कब्जा किया गया।
- कॉलोनाइजरों ने खुद और परिजनों के नाम पर कई कंपनियां बनाईं – जैसे केसर बिल्डटेक, कावेरी इंटरप्राइजेज, प्राइम प्रॉपर्टीज, सिल्वर स्टेट आदि – और इन्हीं के जरिए अवैध निर्माण कराया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि खसरा और राजस्व रिकॉर्ड में साफ लिखा है कि ये जमीनें तालाब, खाई या सीलिंग श्रेणी की हैं, लेकिन इन्हें छिपाकर नक्शे पास करा लिए गए।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
शिकायत मिलते ही शासन ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए। एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने सदर तहसीलदार को तीनों कॉलोनियों की जमीन के अभिलेखों की जांच सौंप दी है। एडीएम ने कहा, “जांच रिपोर्ट जल्द मांगी गई है। अगर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या निर्माण पाया गया तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी।”
कॉलोनाइजरों में हड़कंप
इन तीनों कॉलोनियों में सैकड़ों प्लॉट बिक चुके हैं और कई घर बन चुके हैं। कार्रवाई की खबर से कॉलोनाइजरों और प्लॉट खरीदारों में हड़कंप मच गया है। कई खरीदार चिंतित हैं कि अगर जमीन अवैध निकली तो उनका निवेश डूब जाएगा।
अवैध कब्जे पर योगी सरकार की सख्ती
योगी सरकार शुरू से ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है। प्रदेश में हजारों एकड़ सरकारी जमीन माफियाओं से मुक्त कराई जा चुकी है। बरेली में भी पहले कई अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला है। यह मामला भी उसी मुहिम का हिस्सा लग रहा है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद बड़ा एक्शन होने की संभावना है। अगर आरोप साबित हुए तो न केवल कॉलोनियां सील होंगी, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और कॉलोनाइजरों पर भी कानूनी शिकंजा कसेगा। बरेली में सरकारी जमीन पर बसाई गईं इन कॉलोनियों का मामला अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है।

