नई दिल्ली: भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए जल्द ही एक नया और शानदार अनुभव लेकर आ रहा है। विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस स्लीपर वंदे भारत ट्रेन जुलाई 2025 के अंत तक पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है। रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें शुरू करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। पहली ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने हरी झंडी दिखा सकते हैं। यह ट्रेन न केवल रफ्तार में तेज होगी, बल्कि यात्रियों को आराम और सुरक्षा का भी नया मानक देगी।
पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल पूरा
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अनुसंधान डिज़ाइन और मानक संगठन (RDSO), लखनऊ ने ट्रेन की तकनीकी और स्पीड जाँच को मंजूरी दे दी है। अब रेलवे बोर्ड ट्रेन के लिए रेलमार्ग और किराए को अंतिम रूप दे रहा है। जुलाई के अंत तक यह ट्रेन सेवा शुरू होने की उम्मीद है। पहली ट्रेन के बाद बाकी ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।
30 ट्रेनों की तैयारी
चालू वित्तीय वर्ष में 30 स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें चलाने का लक्ष्य है। बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने 10 ट्रेनें तैयार कर ली हैं। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में 8 से 10 ट्रेनों का निर्माण तेजी से चल रहा है। BEML और ICF मिलकर इन ट्रेनों के कोच बना रहे हैं, जो अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस हैं। पहली ट्रेन के शुरू होने के बाद बाकी ट्रेनें धीरे-धीरे पटरियों पर उतारी जाएँगी।
160 किमी/घंटा की रफ्तार
स्लीपर वंदे भारत ट्रेन को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से शुरू किया जाएगा, जो मौजूदा राजधानी, शताब्दी, और वंदे भारत (चेयरकार) ट्रेनों की अधिकतम 130 किमी/घंटा की गति से कहीं ज्यादा है। भविष्य में इनकी रफ्तार को चरणबद्ध तरीके से 240 किमी/घंटे तक बढ़ाने की योजना है। ये ट्रेनें मुख्य रूप से दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई रेलमार्गों पर चलेंगी, जहाँ हाई-स्पीड परिचालन के लिए “कवच” टक्कररोधी तकनीक और अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं। ट्रेन की डिज़ाइन 160 से 240 किमी/घंटे की रफ्तार को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
हाई-स्पीड कॉरिडोर की योजना
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि भारत विदेशी बुलेट ट्रेनों की जगह स्वदेशी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को हाई-स्पीड पर चलाने पर ध्यान देगा। उन्होंने बताया कि विश्व मानकों के अनुसार 240 किमी/घंटा की रफ्तार को हाई-स्पीड माना जाता है। इससे ज्यादा गति पर परिचालन की लागत बढ़ जाती है। इसीलिए जापान या यूरोपीय देशों के साथ बुलेट ट्रेन परियोजनाओं की कोई योजना नहीं है। इसके बजाय, 240 किमी/घंटा की रफ्तार के लिए अलग हाई-स्पीड एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएँगे।
यात्रियों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएँ
स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों को बेजोड़ आराम और सुविधाएँ प्रदान करेंगी। इनमें आधुनिक स्लीपर कोच, बेहतर सीट डिज़ाइन, उन्नत सुरक्षा सुविधाएँ, और तेज़ इंटरनेट कनेक्टिविटी शामिल होगी। ट्रेन का इंटीरियर और तकनीक विश्वस्तरीय मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह ट्रेन उन यात्रियों के लिए वरदान साबित होगी, जो रातभर के सफर में आराम और रफ्तार दोनों चाहते हैं।
रेलवे का विज़न
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर भारत के विज़न का हिस्सा है। यह प्रोजेक्ट न केवल यात्रियों को बेहतर अनुभव देगा, बल्कि स्वदेशी विनिर्माण को भी बढ़ावा देगा। रेलवे का लक्ष्य है कि 2025-26 के अंत तक 30 ट्रेनें शुरू हो जाएँ, जिससे देश के प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ा जा सके।

