यूपी में कैशलेस इलाज योजना से जुड़ा एक और बड़ा वर्ग: योगी कैबिनेट ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों-कर्मचारियों को दी मंजूरी

Yogi Cabinet Decisions: योगी कैबिनेट ने उच्च शिक्षा विभाग से सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालयों के नियमित तथा स्ववित्तपोषित शिक्षकों-कर्मचारियों को कैशलेस इलाज योजना में शामिल करने का फैसला लिया है। इससे 1.28 लाख से अधिक शिक्षक-कर्मचारी लाभान्वित होंगे। प्रति व्यक्ति 2,479 रुपये प्रीमियम पर सरकारी खजाने पर 31.92 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा। लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होने से शिक्षक समुदाय में खुशी का माहौल है।

Samvadika Desk
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (इमेज - सोशल मीडिया)
Highlights
  • उच्च शिक्षा के शिक्षकों-कर्मचारियों को मिली कैशलेस इलाज की सुविधा!
  • लंबे समय से चली आ रही शिक्षक संगठनों की मांग पूरी!
  • सरकारी और निजी अस्पतालों में बिना जेब खर्च के इलाज!

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार ने कैशलेस इलाज की सुविधा से प्रदेश के एक और बड़े वर्ग को जोड़ने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में हुई कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालयों के नियमित तथा स्ववित्तपोषित शिक्षकों-कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।

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योजना में शामिल होंगे ये लोग

मीडिया रिपोर्ट के हवाले से, कैबिनेट के इस निर्णय के अनुसार अब अशासकीय (एडेड) महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को भी कैशलेस इलाज मिलेगा। स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षक-कर्मचारी भी इस योजना के दायरे में आएंगे। प्रति शिक्षक-कर्मचारी के लिए 2,479 रुपये का प्रीमियम खर्च आएगा। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से सरकारी खजाने पर करीब 31.92 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई

उच्च शिक्षा के स्ववित्तपोषित और अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों-कर्मचारियों को कैशलेस इलाज योजना में शामिल करने की मांग काफी समय से की जा रही थी। जनवरी 2026 में हुई कैबिनेट बैठक में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के स्ववित्तपोषित एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों-महाविद्यालयों के शिक्षकों और उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज देने की घोषणा की गई थी। लेकिन तब उच्च शिक्षा के अनुदानित और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षक-कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया था।

उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) समेत कई शिक्षक संगठनों ने सरकार को पत्र लिखकर छूटे हुए शिक्षकों-कर्मचारियों को योजना में शामिल करने की अपील की थी। शिक्षकों का कहना था कि नियमित शिक्षकों की कमी के चलते निजी स्रोतों से रखे गए शिक्षक-शिक्षिकाएं लंबे समय से काम कर रहे हैं। उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलना चाहिए। मंगलवार को कैबिनेट की मंजूरी से इन संगठनों से जुड़े पदाधिकारी और आम शिक्षक-कर्मचारी बेहद खुश हैं।

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निजी अस्पतालों से भी जुड़ेंगी सुविधाएं

इस योजना के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज मिलेगा। इससे शिक्षकों और कर्मचारियों को इलाज के लिए जेब से पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार का मानना है कि यह फैसला शिक्षक समुदाय के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए बहुत बड़ा कदम है।

मंगलवार की कैबिनेट बैठक में विकास और सुशासन से जुड़े कुल 30 प्रस्तावों पर मुहर लगी। उच्च शिक्षा के शिक्षकों-कर्मचारियों को कैशलेस इलाज योजना में शामिल करना इनमें से एक महत्वपूर्ण निर्णय था। यह फैसला प्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

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