बरेली बवाल के बाद मौलाना तौकीर रजा पर नई मुसीबत: पुराना कर्ज वसूलने के लिए नोटिस, संपत्ति कुर्की की तैयारी

Bareilly News: बरेली बवाल के बाद जेल में बंद मौलाना तौकीर रजा पर 1990 का 5,560 रुपये का कर्ज, जो ब्याज सहित 28,386 रुपये हो चुका है, वसूलने के लिए जिला सहकारी बैंक ने नोटिस भेजा। तय समय में भुगतान न होने पर संपत्ति कुर्की की तैयारी। बदायूं की संपत्तियां बिकने के बाद बरेली की प्रॉपर्टी पर नजर..

Samvadika Desk
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मौलाना तौकीर रजा (इमेज - सोशल मीडिया)
Highlights
  • बरेली: मौलाना तौकीर रजा पर 1990 का 28,386 रुपये का कर्ज बकाया!
  • जिला सहकारी बैंक ने भेजा वसूली नोटिस, संपत्ति कुर्की की चेतावनी!
  • बरेली बवाल के बाद खुली पुरानी फाइल, मौलाना की मुश्किलें बढ़ीं!

बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली में हाल के बवाल के बाद जेल में बंद मौलाना तौकीर रजा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब उनकी गर्दन पर तीन दशक पुराना सहकारी बैंक का कर्ज चढ़ गया है। बदायूं जिले के करतौली गांव के मूल निवासी तौकीर रजा ने 1990 में साधन सहकारी समिति से 5,560 रुपये का कर्ज लिया था, जो ब्याज सहित अब 28,386 रुपये से अधिक हो चुका है। जिला सहकारी बैंक ने इस रकम की वसूली के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुवार को मौलाना के बरेली स्थित घर पर वसूली नोटिस चस्पा करने के लिए टीम रवाना की गई। अगर तय समय में भुगतान नहीं हुआ, तो उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

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1990 का कर्ज, 1997 में खुली फाइल

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मामला 1990 का है, जब मौलाना तौकीर रजा ने रसूलपुर कुट्टी साधन सहकारी समिति से 5,560 रुपये का कृषि कर्ज लेकर खाद और बीज खरीदा था। इस कर्ज को उन्होंने न तो चुकाया और न ही इसका ब्याज अदा किया। 1996 में राज्य सरकार ने किसानों के कर्ज माफी की घोषणा की थी, लेकिन मौलाना का कर्ज इस योजना के दायरे में नहीं आया। 1997 में बैंक की जांच में यह मामला सामने आया, और उनके नाम पर बकाया रकम की पुष्टि हुई। उस समय से बैंक ने कई बार वसूली नोटिस जारी किए, लेकिन मौलाना के प्रभाव और रसूख के चलते भुगतान नहीं हुआ।

बरेली बवाल ने फिर खोली पुरानी फाइल

26 सितंबर को बरेली में जुमे की नमाज के बाद हुए बवाल के बाद मौलाना तौकीर रजा को मुख्य आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया। इस घटना के बाद जिला सहकारी बैंक ने पुरानी फाइलों को खंगालना शुरू किया। जांच में पता चला कि मौलाना पर 5,560 रुपये का मूलधन और 21,940 रुपये का ब्याज, यानी कुल 28,386 रुपये का बकाया है। अब बैंक इस रकम पर 2% अतिरिक्त ब्याज भी लगाने की तैयारी में है।

नोटिस और कुर्की की कार्रवाई शुरू

जिला सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी हरी बाबू भारती ने बताया कि मौलाना के बरेली स्थित घर पर वसूली नोटिस चस्पा करने के लिए गुरुवार को टीम भेजी गई है। उन्होंने कहा, “अगर तय समय में भुगतान नहीं हुआ, तो मौलाना की संपत्ति कुर्क की जाएगी। बैंक सभी बकायेदारों से वसूली के लिए सख्त नीति अपना रहा है।” सूत्रों के मुताबिक, बदायूं में मौलाना ने अपनी ज्यादातर संपत्तियां पहले ही बेच दी हैं। ऐसे में बैंक की नजर अब उनकी बरेली और अन्य जिलों की संपत्तियों पर है।

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प्रशासन और शासन का सहयोग

बैंक ने इस मामले की रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेज दी है, और वसूली को प्राथमिकता दी जा रही है। बदायूं और बरेली के राजस्व व पुलिस प्रशासन को भी इस प्रक्रिया में सहयोग के निर्देश दिए गए हैं। बैंक का कहना है कि जहां कहीं भी मौलाना की संपत्ति मिलेगी, वहां कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब शासन स्तर तक पहुंच चुका है, और जल्द ही बड़ा एक्शन देखने को मिल सकता है।

सामाजिक और राजनीतिक माहौल

बरेली बवाल के बाद मौलाना तौकीर रजा पहले से ही विवादों में हैं। उनकी गिरफ्तारी और उनके करीबियों की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई ने माहौल को गर्म कर रखा है। अब पुराने कर्ज का यह मामला उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रहा है। स्थानीय लोग इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे कानून की जीत मान रहे हैं, तो कुछ इसे मौलाना के खिलाफ सुनियोजित कार्रवाई बता रहे हैं।

क्या है बरेली बवाल का पृष्ठभूमि?

26 सितंबर को बरेली में जुमे की नमाज के बाद हुए उपद्रव में हिंसा और पथराव की घटनाएं हुई थीं। पुलिस ने इसे सुनियोजित साजिश करार देते हुए मौलाना तौकीर रजा को मुख्य आरोपी बनाया। उनकी गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने उनके और उनके सहयोगियों की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई शुरू की, जिसमें रजा पैलेस का ध्वस्तीकरण और फरहत खां के मकान की सीलिंग शामिल है। अब पुराने कर्ज की वसूली का यह मामला नया मोड़ ले रहा है।

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यह घटना न केवल मौलाना तौकीर रजा के लिए नई मुसीबत बन रही है, बल्कि यह भी दिखाती है कि पुराने बकायों की फाइलें भी किसी के रसूख को नहीं बख्शतीं। अब देखना यह है कि क्या मौलाना इस कर्ज को चुकाते हैं, या उनकी संपत्ति कुर्की का सामना करना पड़ेगा। बरेली और बदायूं में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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