जयपुर, राजस्थान: राजस्थान में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून बनने के बावजूद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे। भाजपा सरकार ने हाल ही में विधानसभा में एक बिल पास करवाया, जो जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन रोकने पर केंद्रित है। इस बिल को राज्यपाल और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू होने पर दोषियों को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। लेकिन इससे पहले ही राजधानी जयपुर के प्रताप नगर इलाके से एक नया मामला सुर्खियों में आ गया। यहां एक मकान के ऊपरी हॉल में संदिग्ध गतिविधियों के आरोप लगे, जिससे स्थानीय लोगों ने हंगामा मचा दिया। देर रात थाने पर भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने दोनों पक्षों को बिठाकर बातचीत की, लेकिन अभी तक धर्मांतरण की पुष्टि नहीं हुई है।
संदिग्ध हॉल पर संदेह: कॉलोनी वालों ने घेरा मकान, मचा हंगामा
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना जयपुर के प्रताप नगर सेक्टर 8 के एक आवासीय इलाके में रविवार शाम को हुई। स्थानीय निवासियों ने देखा कि एक मकान के ऊपरी हिस्से में बने हॉल में रोजाना लोगों की भीड़ जमा होती है। शुरू में इसे सामान्य सामाजिक आयोजन समझा गया, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, कॉलोनी वालों को शक होने लगा। उनका आरोप था कि वहां लोगों को धार्मिक भावनाओं को भड़काकर या दबाव डालकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। संदेह की पुष्टि के लिए कुछ युवक हॉल के पास पहुंचे और मकान को घेर लिया।
अचानक हंगामा मचने पर हॉल में मौजूद लोग बाहर निकल आए। इससे दो पक्षों के बीच तीखी नोंकझोंक हो गई, जो झड़प तक पहुंच गई। कॉलोनी वाले चिल्ला रहे थे कि यह परिवार पहले से ही चेतावनी के बावजूद संदिग्ध कार्यक्रम चला रहा है। एक तरफ जहां स्थानीय लोग सुरक्षा की बात कर रहे थे, वहीं मकान के निवासियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही प्रताप नगर थाने की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। उन्होंने स्थिति को शांत किया और दोनों पक्षों के कुछ सदस्यों को थाने ले गई।
थाने पर रात भर हंगामा: सोशल मीडिया ने फैलाई अफवाहें
शाम की घटना की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर फैली, तो हालात और बिगड़ गए। धर्मांतरण के शब्द ने लोगों को भड़का दिया, और दर्जनों की संख्या में स्थानीय निवासी प्रताप नगर थाने पर पहुंचने लगे। रात के 10 बजे तक थाने के बाहर भीड़ जमा हो गई, जहां लोग नारेबाजी कर रहे थे। कुछ लोग मांग कर रहे थे कि मकान की तलाशी ली जाए, तो कुछ आरोपी परिवार पर सख्त कार्रवाई की बात उठा रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए और अतिरिक्त फोर्स बुला ली।
एडिशनल डीसीपी आशाराम चौधरी ने मीडिया पत्रकार को बताया कि दोनों पक्षों से शिकायतें ली जा रही हैं। “फिलहाल धर्मांतरण का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। यह सामुदायिक आयोजन का मामला लग रहा है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही साफ तस्वीर सामने आएगी।” उन्होंने अपील की कि लोग अफवाहों पर भरोसा न करें और शांति बनाए रखें। मकान के परिवार ने कहा कि हॉल में धार्मिक चर्चा या प्रार्थना सभा होती है, न कि कोई जबरन परिवर्तन। लेकिन कॉलोनी वालों का दावा है कि परिवार को पहले ही स्थानीय स्तर पर चेतावनी दी जा चुकी थी।
पृष्ठभूमि: बीकानेर से जयपुर तक लगातार मामले
यह घटना राजस्थान में धर्मांतरण विवादों की कड़ी का हिस्सा लग रही है। दो दिन पहले बीकानेर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध वित्तीय लेन-देन के मामले में छापे मारे, जहां धर्मांतरण के संकेत मिले। नए कानून के लागू होने से पहले ऐसे केसों की संख्या बढ़ रही है, जो सामाजिक तनाव पैदा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवादों में पारदर्शिता और त्वरित जांच जरूरी है, ताकि निर्दोष न फंसें।
पुलिस ने मकान की तलाशी ली है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। फिलहाल दोनों पक्षों को समझाइश दी गई है, और आगे की कार्रवाई सबूतों पर निर्भर करेगी। यह मामला राजस्थान की राजधानी में शांति व्यवस्था के लिए एक परीक्षा बन गया है, जहां धार्मिक संवेदनशीलता को संभालना प्रशासन की प्राथमिकता है।

