बलरामपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन के अवैध धर्मांतरण रैकेट ने एक बार फिर सुर्खियाँ बटोरी हैं। ताजा खुलासे में पता चला कि वह ‘लव जिहाद ब्रिगेड’ नामक एक संगठित नेटवर्क चला रहा था, जिसका कमांडर रशीद उर्फ गाजी था। इस रैकेट ने हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फँसाकर और आर्थिक प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया। यह मामला 18 जुलाई 2025 तक सनसनीखेज बना हुआ है।
रशीद उर्फ गाजी: लव जिहाद का कमांडर
इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी ATS की जाँच में सामने आया कि छांगुर बाबा ने रशीद को अपनी ‘लव जिहाद ब्रिगेड’ का कमांडर बनाया था। रशीद, जिसे छांगुर ‘गाजी’ कहकर बुलाता था, धर्मांतरण की साजिश में मुख्य भूमिका निभाता था। ‘गाजी’ इस्लाम में उस योद्धा को कहा जाता है जो गैर-मुस्लिमों को हराकर धर्म परिवर्तन कराता है। रशीद बलरामपुर और आसपास के जिलों में इस नेटवर्क को मजबूत कर रहा था। वह पहले भी 2023 में आजमगढ़ में अवैध धर्मांतरण के लिए गिरफ्तार हो चुका था।
धर्मांतरण का लालच और रेट
रशीद को प्रत्येक व्यक्ति के धर्मांतरण के लिए 50,000 से 1 लाख रुपये मिलते थे, जबकि लव जिहाद के जरिए लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराने पर 3 से 5 लाख रुपये तक की रकम दी जाती थी। वह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाता और मुस्लिम युवाओं को प्रलोभन देकर हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए उकसाता था। रशीद नेपाल सीमा से सटे 46 गाँवों में जलसों के जरिए युवाओं को धर्मांतरण के लिए तैयार करता था।
गजवा-ए-हिंद की साजिश
छांगुर और रशीद ‘गजवा-ए-हिंद’ की योजना पर काम कर रहे थे, जिसका मतलब है इस्लाम को फैलाने के लिए जंग। रशीद मुस्लिम युवाओं को ‘काफिरों’ को हराकर उन्हें मुस्लिम बनाने के लिए भड़काता था। इस नेटवर्क को चलाने के लिए 10 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग की तैयारी थी, जो इस्लामिक देशों की संस्थाओं से आती थी। छांगुर इन गतिविधियों को कोड वर्ड्स जैसे ‘मिट्टी पलटना’ (धर्मांतरण) और ‘प्रोजेक्ट’ (लड़कियों को टारगेट करना) में संचालित करता था।
धर्मांतरण की प्रक्रिया
रशीद पहले टारगेट को कलमा पढ़वाता, फिर प्रतिबंधित पशु का मांस खिलाकर यह सुनिश्चित करता कि व्यक्ति का हिंदू धर्म से मोहभंग हो गया है। इस प्रक्रिया की वीडियो बनाकर छांगुर को भेजी जाती थी, जो इसे फंडिंग देने वाली इस्लामिक संस्थाओं को भेजता था। यह रणनीति न केवल धर्मांतरण को बढ़ावा देती थी, बल्कि विदेशी फंडिंग को भी सुनिश्चित करती थी।
विदेशी फंडिंग और नेटवर्क
जाँच में खुलासा हुआ कि छांगुर का नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर नेपाल, मुंबई, और खाड़ी देशों तक फैला था। रशीद से पूछताछ में विदेशी फंडिंग के स्रोतों और लेन-देन की अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है। ATS और ED इस नेटवर्क की गहराई तक जाने के लिए सक्रिय हैं, जिसमें 100 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग का पता चला है।
सामाजिक और राष्ट्रीय खतरा
यह मामला केवल धर्मांतरण तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा है। छांगुर और रशीद की साजिश गजवा-ए-हिंद के जरिए भारत की जनसांख्यिकी बदलने की थी। यह समाज से जागरूकता और सख्त कार्रवाई की माँग करता है।

