बरेली, उत्तर प्रदेश: बरेली में एक बार फिर अंतरधार्मिक प्रेम कहानी ने सुर्खियां बटोरी हैं। मुस्लिम युवती आशिया ने अपने हिंदू प्रेमी मोनू से प्यार किया और सनातन धर्म अपनाकर नाम बदलकर ‘अंशिका’ कर लिया। दोनों ने बरेली के अगस्त मुनि आश्रम में पंडित केके शंखधार के माध्यम से वैदिक रीति-रिवाजों से शादी रचाई। आशिया ने तीन तलाक, हलाला और हिजाब जैसी प्रथाओं को नापसंद करते हुए कहा कि वह अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जीना चाहती है। यह शादी कानूनी औपचारिकताओं के साथ पूरी हुई और दोनों परिवारों की सहमति से संपन्न हुई।
मेले में हुई पहली मुलाकात, चार साल बाद प्यार ने ली शादी की शक्ल
मीडिया जानकारी के अनुसार, अंशिका (पूर्व नाम आशिया) थाना मीरगंज क्षेत्र की रहने वाली 20 वर्षीय युवती हैं। उनके परिवार में चार भाई और दो बहनें हैं। चार साल पहले भोजीपुरा क्षेत्र में आयोजित एक मेले में उनकी मुलाकात मोनू से हुई। उस समय आशिया अपनी बहन के घर आई हुई थीं और मेले में घूमने गई थीं। पहली नजर में ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया। नंबर एक्सचेंज हुए, बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता गहरा प्यार बन गया।
आशिया ने बताया कि वह पिछले चार सालों से सनातन धर्म को मानती आ रही थीं। नियमित रूप से मंदिर जाती थीं और हिंदू परंपराओं से बहुत प्रभावित थीं। मोनू से मिलने के बाद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों को और करीब से समझा और अपनाया।
परिवार का विरोध, फिर अपनी मर्जी से शादी
आशिया ने जब परिवार को मोनू के बारे में बताया तो परिजनों ने विरोध किया। लेकिन आशिया अपने फैसले पर अडिग रहीं। उन्होंने कहा, “मुझे तीन तलाक, हलाला और हिजाब जैसी प्रथाएं पसंद नहीं हैं। मैं अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हूं।”
परिजनों की मंजूरी न मिलने पर आशिया ने अपना फैसला खुद लिया। वह मोनू से मिलीं और दोनों ने जयपुर के आर्य समाज मंदिर में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करके शादी कर ली। अगस्त मुनि आश्रम के महंत पंडित केके शंखधार ने मीडिया को बताया कि युवती और युवक की ओर से सारे कागजी काम पूरे किए गए। उसके बाद युवती का शुद्धिकरण और घर वापसी की प्रक्रिया कराई गई। फिर सनातन धर्म के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सात फेरे लिए गए। महंत ने जोर देकर कहा कि यह शादी पूरी तरह युवती की स्वेच्छा से हुई है, किसी तरह का दबाव नहीं था।
शादी के बाद घर में बधाई का माहौल
शादी के बाद आशिया अब अंशिका बन चुकी हैं। मोनू ने उसे घर लाकर वैदिक रीति से स्वागत किया। घर में बधाई गीत गूंजे, मुंह दिखाई हुई और पारंपरिक रस्में निभाई गईं। दोनों ने कहा कि वे अब खुशी से साथ रहेंगे।
यह प्रेम कहानी बरेली में चर्चा का विषय बन गई है। लोग आशिया की हिम्मत और मोनू के साथ उनके प्यार की तारीफ कर रहे हैं। यह घटना दिखाती है कि प्यार में लोग जाति-धर्म की दीवारें तोड़कर एक साथ आ सकते हैं। अंशिका और मोनू की यह जोड़ी अब नई जिंदगी की शुरुआत कर चुकी है।

