बरेली, उत्तर प्रदेश: सोशल मीडिया पर वायरल होने और रील बनाने का जुनून एक बार फिर किसी की जान पर भारी पड़ते- पड़ते बचा। पीलीभीत जंक्शन के पास रात के अंधेरे में एक युवक ने रेलवे ट्रैक के बीचों-बीच फ्लैश लाइट जलाकर मोबाइल फोन रख दिया। करीब 109 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही टनकपुर-पीलीभीत पैसेंजर ट्रेन के लोको पायलट रवि ने दूर से चमकती रोशनी देखते ही इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। ट्रेन की स्पीड तेजी से घटकर 40 किमी/घंटे तक पहुंच गई और आखिरकार मोबाइल से महज 2-3 मीटर पहले ट्रेन रुक गई। ट्रेन रुकते ही युवक दौड़कर आया, मोबाइल उठाया और अंधेरे में भाग गया।
घटना का पूरा ब्योरा
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, लोको पायलट रवि ने सोशल मीडिया पर इस हादसे का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बुधवार रात करीब 8 बजे टनकपुर-पीलीभीत पैसेंजर ट्रेन पीलीभीत शहर की ओर बढ़ रही थी। ट्रेन की स्पीड धीरे-धीरे कम हो रही थी क्योंकि आगे मोड़ था और स्टेशन भी नजदीक था। मोड़ पूरा होते ही हेडलाइट से पटरी साफ दिखने लगी। तभी ट्रैक के बीच में एक चमकती रोशनी नजर आई।
पहले लगा कोई छोटी चीज होगी, लेकिन रोशनी लगातार दिख रही थी। डिस्टेंट सिग्नल हरा मिला था, इसलिए ट्रेन आगे बढ़ रही थी। लेकिन लोको पायलट और उनके साथी का ध्यान बार-बार उसी रोशनी पर जा रहा था। जैसे ही दूरी कम हुई, साफ दिखा कि ट्रैक के बीचों-बीच एक मोबाइल फोन रखा है और उसका फ्लैश या कैमरा लाइट जल रहा है।
दोनों लोको पायलटों ने आपस में बात की और फौरन इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। स्पीड पहले 90, फिर 70, फिर 40 किमी/घंटे तक आ गई। ट्रेन मोबाइल से महज 2-3 मीटर पहले रुक पाई। जैसे ही इंजन का दरवाजा खोला, पास के खंभे की आड़ में छिपा एक युवक दौड़कर आया, फोन उठाया और अंधेरे में भाग गया।
लोको पायलट की अपील
रवि ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोग रोमांच और इंटरनेट मीडिया के लिए ऐसी खतरनाक हरकतें न करें। रेलवे ट्रैक खेल या प्रयोग का मैदान नहीं है। दो मिनट की वीडियो के लिए किसी की पूरी यात्रा खतरे में न डालें। उन्होंने कहा कि अगर ट्रेन ब्रेक न लगती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
यह पहला मामला नहीं है। कुछ दिनों पहले शाहजहांपुर में रील बनाने के चक्कर में वंदे भारत एक्सप्रेस की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई थी। इसी तरह बरेली के रिठौरा के पास निर्माणाधीन बरेली-सितारगंज मार्ग पर पुल निर्माण के लिए रखी गई आरई वाल के बड़े स्लैब पर रील बनाते समय युवक पर कई स्लैब गिर गए थे, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी।
सोशल मीडिया और युवाओं का जुनून
सोशल मीडिया पर फेमस होने और वायरल होने का जुनून युवाओं में इतना बढ़ गया है कि वे अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। ट्रेन ट्रैक, निर्माण स्थल, ऊंची इमारतें, खतरनाक जगहों पर रील बनाना अब आम हो गया है। लोको पायलटों और रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि ऐसी हरकतें न सिर्फ खुद के लिए, बल्कि पूरी ट्रेन यात्रियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती हैं।
पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि ट्रेन ट्रैक या रेलवे संपत्ति पर रील बनाने से बचें। ऐसी हरकतें न सिर्फ कानूनी रूप से दंडनीय हैं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।
यह घटना एक बार फिर सोशल मीडिया के खतरों को उजागर करती है। युवाओं को समझना होगा कि दो मिनट की वीडियो के लिए पूरी जिंदगी दांव पर नहीं लगानी चाहिए।

