लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलाधिकारियों (डीएम) को तुरंत पहचान प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में रह रहे ऐसे विदेशी नागरिकों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पहचान होने के बाद उन्हें अस्थायी डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और आवश्यक सत्यापन पूरा होते ही उनके मूल देश वापस भेज दिया जाएगा। सीएम ने जोर देकर कहा कि कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव सरकार की प्राथमिकता हैं—इसमें कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
अवैध घुसपैठियों की पहचान और त्वरित कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने शनिवार (22 नवंबर 2025) को जारी निर्देशों में सभी जिलाधिकारियों को तत्काल अभियान चलाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए। “जो लोग बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे हैं, उनकी तलाश तुरंत हो और कानूनी कार्रवाई हो। व्यवस्था पर बोझ डालने वालों को कोई छूट नहीं मिलेगी।” नेपाल सीमा से सटे सात जिलों (पीलीभीत, बरेली, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर) में विशेष निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जहां घुसपैठ की आशंका अधिक है।
हर जिले में अस्थायी डिटेंशन सेंटर: सत्यापन तक रखें, फिर डिपोर्ट करें
सीएम के सबसे सख्त निर्देश डिटेंशन सेंटरों को लेकर हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में अस्थायी डिटेंशन सेंटर स्थापित किए जाएं, जहां पहचान होने वाले घुसपैठियों को रखा जाए। “विदेशी नागरिकों की सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक इन्हें इन सेंटरों में रखा जाए। उसके बाद स्थापित प्रक्रिया के अनुसार उन्हें उनके मूल देश डिपोर्ट कर दिया जाए।” एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि ये सेंटर मानवीय मूल्यों का पालन करते हुए बनाए जाएंगे, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्त होंगे। अवैध रूप से रहने वालों को किसी भी तरह की राहत नहीं मिलेगी—चाहे वे किसी भी देश के हों।
कानून-व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस: सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि अवैध घुसपैठ न केवल कानून-व्यवस्था को प्रभावित करती है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव को भी खतरे में डालती है। “प्रदेश में कोई अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम और एसएसपी अपनी टीमों को सक्रिय करें और तुरंत अभियान चलाएं।” उन्होंने कहा कि पहचान प्रक्रिया में स्थानीय पुलिस, इंटेलिजेंस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें लगेंगी। अवैध दस्तावेजों वाले लोगों को तुरंत हिरासत में लिया जाए।
नेपाल सीमा पर विशेष सतर्कता, डिपोर्टेशन प्रक्रिया तेज
उत्तर प्रदेश नेपाल से लगे सात जिलों में घुसपैठ की संभावना अधिक होने के कारण वहां विशेष अभियान चलेगा। नेपाल के साथ खुली सीमा होने से भारतीय नागरिकों का आवागमन स्वतंत्र है, लेकिन अन्य देशों के नागरिकों पर सख्त नजर रखी जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डिटेंशन सेंटरों में रहने वालों का सत्यापन FRRO (फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस) और MEA (विदेश मंत्रालय) के साथ समन्वय से होगा। सत्यापन पूरा होते ही डिपोर्टेशन प्रक्रिया तेज की जाएगी।
जनता दर्शन से मिले इनपुट पर आधारित अभियान
यह अभियान जनता दर्शन पोर्टल और संपूर्ण समाधान दिवस पर आने वाली शिकायतों पर भी आधारित होगा। सीएम ने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान में स्थानीय लोगों की मदद ली जाए। “प्रदेश की जनता राष्ट्रीय सुरक्षा में सहयोगी है। उनकी सूचनाओं पर तुरंत कार्रवाई हो।” एक सरकारी बयान में कहा गया कि यह कदम न केवल सुरक्षा मजबूत करेगा, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी बढ़ावा देगा।
योगी सरकार का यह फैसला अवैध घुसपैठ पर लगाम लगाने की दिशा में मजबूत कदम है। जिलों में डिटेंशन सेंटर स्थापित करने का काम तुरंत शुरू हो जाएगा। अधिकारियों को साप्ताहिक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। यह अभियान प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
(ये जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

