बस्ती: बाल विवाह ने फंसाया दूल्हा, माता-पिता और पंडित को, पुलिस ने 6 लोगों पर दर्ज किया मुकदमा

Basti News: बस्ती में 16 वर्षीय किशोरी की शादी के मामले में पुलिस ने दूल्हा, माता-पिता और पंडित सहित छह लोगों पर बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया। सोशल मीडिया से मिली सूचना के बाद जाँच में किशोरी की नाबालिग होने की पुष्टि हुई।

Samvadika Desk
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प्रतीकात्मक इमेज
Highlights
  • बस्ती में 16 साल की किशोरी की शादी, 6 लोगों पर बाल विवाह का केस!
  • पुलिस ने दूल्हा, माता-पिता और पंडित के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा!
  • सोशल मीडिया से मिली सूचना, पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई!

बस्ती, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक बाल विवाह का मामला सामने आया है, जिसमें दूल्हा, वर-वधू के माता-पिता और फेरे कराने वाले पंडित पर मुकदमा दर्ज हो गया है। मुंडेरवा थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छह लोगों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।

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बाल विवाह का खुलासा

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, मुंडेरवा थाना क्षेत्र के एक गाँव में 24 अगस्त को 16 वर्षीय किशोरी की शादी 21 वर्षीय युवक के साथ हुई थी। पुलिस को सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों से इस बाल विवाह की सूचना मिली। थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस ने गाँव में जाकर जाँच की और दुल्हन की उम्र के दस्तावेज जुटाए। साक्ष्यों से पुष्टि हुई कि किशोरी की उम्र 16 साल है, जो शादी के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष से कम है।

पुलिस की कार्रवाई

जाँच के बाद गाँव के चौकीदार ने तहरीर दी, जिसमें बताया गया कि किशोरी की शादी गाँव के ही एक मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से हुई। इस शादी में दूल्हा, वर-वधू के माता-पिता, और पंडित शामिल थे। पुलिस ने बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत दूल्हे, उसके माता-पिता, किशोरी के माता-पिता, और फेरे कराने वाले पंडित के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। मामले की जाँच सब-इंस्पेक्टर गिरीशचंद्र यादव को सौंपी गई है।

किशोरी को सौंपा परिजनों को

पुलिस ने किशोरी को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्लूसी) के समक्ष पेश किया। सीडब्लूसी ने जाँच के बाद किशोरी को उसके माता-पिता की सुपुर्दगी में घर भेज दिया। पुलिस का कहना है कि मामला गंभीर है, और सभी पहलुओं की जाँच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या किशोरी की सहमति थी या उस पर शादी के लिए दबाव डाला गया।

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सामाजिक और कानूनी सवाल

यह घटना बाल विवाह की गंभीर समस्या को उजागर करती है। 16 वर्षीय किशोरी की शादी न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उसके भविष्य और शिक्षा पर भी सवाल उठाता है। यह मामला समाज से जागरूकता, परिवारों से बच्चों की उम्र और शिक्षा पर ध्यान देने, और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की माँग करता है। बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत सजा का प्रावधान इस तरह के अपराधों पर लगाम लगाने का प्रयास है।

गाँव में चर्चा

बस्ती के इस गाँव में बाल विवाह का मामला चर्चा का विषय बन गया है। लोग इस बात पर हैरान हैं कि माता-पिता और पंडित जैसे जिम्मेदार लोग भी इस गैरकानूनी शादी में शामिल थे। स्थानीय लोग पुलिस की कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं, लेकिन यह भी सवाल उठा रहे हैं कि ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता की कमी क्यों है।

जाँच में जुटी पुलिस

पुलिस मामले की गहन जाँच कर रही है। दूल्हा, माता-पिता, और पंडित के खिलाफ दर्ज मुकदमे के आधार पर सबूत जुटाए जा रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि शादी के पीछे कोई दबाव या सामाजिक परंपरा तो नहीं थी। यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी बहस का विषय बन गया है। लोग पुलिस की जाँच और कोर्ट के फैसले पर नजर रखे हुए हैं।

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