आगरा, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के आगरा में एक संगठित धर्मांतरण गैंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में नया मोड़ आया है। आगरा की दो सगी बहनों में से बड़ी बहन गैंग के खिलाफ अहम गवाह बन गई है। उसने पुलिस और कोर्ट में सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिसमें गैंग के संगठित तरीके से धर्म परिवर्तन कराने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने कोलकाता से दोनों बहनों को मुक्त कराया था और अब तक गैंग के 14 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। छोटी बहन के भी जल्द बयान दर्ज होने की उम्मीद है।
बहनों का कोलकाता से रेस्क्यू
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, आगरा के सदर थाना क्षेत्र से 24 मार्च 2025 को लापता हुई दो सगी बहनों को पुलिस ने कोलकाता से बरामद किया था। छह राज्यों में छापेमारी के बाद पुलिस ने 19 जुलाई को एक महिला एसबी कृष्णा उर्फ आयशा सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में गैंग के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान को दिल्ली से और उनके दो बेटों समेत तीन अन्य को हिरासत में लिया गया। सभी 14 आरोपी वर्तमान में आगरा जिला जेल में बंद हैं। पुलिस का दावा है कि यह गैंग विदेशी फंडिंग से युवक-युवतियों का धर्म परिवर्तन कराता था।
बड़ी बहन के सनसनीखेज बयान
बड़ी बहन ने पुलिस को दिए बयानों में गैंग की कार्यप्रणाली का खुलासा किया। गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ उसके कलमबंद बयान दर्ज हुए। उसने बताया कि एक कश्मीरी युवती ने साजिश के तहत उसे फँसाया और कश्मीर ले गई। वहाँ उसे उसके धर्म के खिलाफ भड़काया गया और इस्लाम को सबसे बड़ा धर्म बताकर ब्रेनवॉश किया गया। गैंग ने वीडियो भेजकर और बहस करके उसे उग्र बनाने की कोशिश की। धर्मांतरण के बाद उसका निकाह कराने की तैयारी थी। बड़ी बहन ने आयशा और अब्दुल रहमान के बारे में भी विस्तार से बताया। इन बयानों का अवलोकन सोमवार को विवेचक द्वारा किया जाएगा।
छोटी बहन भी देगी गवाही
पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने मीडिया रिपोर्टर को बताया कि बड़ी बहन ने गैंग के खिलाफ गवाही देने की इच्छा जताई थी। अब छोटी बहन भी बयान देने को तैयार है। पुलिस ने दोनों को सुरक्षा का भरोसा दिया है। परिजनों की मदद से दोनों बहनों की काउंसलिंग की गई, ताकि उनके मन से डर निकाला जा सके और सच सामने आए। छोटी बहन के बयानों से गैंग की और करतूतें उजागर होने की उम्मीद है।
तीन आरोपियों की जमानत खारिज
आगरा की सीजेएम कोर्ट ने गैंग के तीन अन्य आरोपियों—रिथ वनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम, अबू तालिब, और मोहम्मद अली उर्फ पीयूष—की जमानत याचिका खारिज कर दी। अभियोजन अधिकारी बृजमोहन सिंह कुशवाहा ने कोर्ट में तर्क दिया कि ये आरोपी प्रलोभन और जबरन धर्मांतरण के संगठित गिरोह का हिस्सा हैं। इनके विदेशी संपर्कों की जाँच चल रही है, और ठोस साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। कोर्ट ने इनके शातिर अपराधी होने के आधार पर जमानत नामंजूर की।
संगठित गैंग का खुलासा
पुलिस की जाँच में पता चला कि यह गैंग विदेशी फंडिंग से संचालित था और सुनियोजित ढंग से युवक-युवतियों को निशाना बनाता था। कोर्ट से कस्टडी रिमांड लेकर आरोपियों से पूछताछ की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। गैंग के सदस्य प्रलोभन, ब्रेनवॉश, और डर का इस्तेमाल कर धर्म परिवर्तन कराते थे। पुलिस अब इनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जाँच कर रही है, ताकि इस साजिश की पूरी परतें खुल सकें।
सामाजिक और कानूनी सवाल
यह मामला धर्मांतरण, संगठित अपराध, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाता है। दो बहनों को फँसाने और ब्रेनवॉश करने की साजिश ने समाज में डर और आक्रोश पैदा किया है। यह घटना पुलिस और प्रशासन से कठोर कार्रवाई, विदेशी फंडिंग की जाँच, और ऐसी गतिविधियों पर लगाम लगाने की माँग करती है। साथ ही, यह समाज से जागरूकता और युवाओं को ऐसी साजिशों से बचाने के लिए संवेदनशीलता की जरूरत को रेखांकित करता है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और बहनों की गवाही से इस गैंग का पूरी तरह पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

