कानपुर, उत्तर प्रदेश: कानपुर में एक बार फिर इंसानियत की मिसाल देखने को मिली जब जिले के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने जनता दरबार में एक बुजुर्ग महिला की फरियाद सुनकर न केवल उनकी मदद की बल्कि मां-बेटे के टूटे रिश्ते को भी जोड़ दिया। मामला तब सामने आया जब 62 वर्षीय पूनम शर्मा नाम की महिला डीएम के सामने आंसुओं से भरी आंखों के साथ पहुंचीं और बताया कि बेटे-बहू ने उन्हें घर से निकाल दिया है।
बुजुर्ग महिला ने सुनाई अपनी व्यथा
इंडियाटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पूनम शर्मा ने डीएम को बताया कि उनके बेटे और बहू ने 25 अक्टूबर को उन्हें घर से निकाल दिया। साथ ही उनका मोबाइल, आधार कार्ड और पेंशन पासबुक भी छीन लिया गया। महिला ने बताया कि पिछले दो दिनों से वे सड़कों पर भटक रही हैं और कहीं ठिकाना नहीं है। यह सुनकर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह तुरंत सक्रिय हो गए। उन्होंने महिला को अपनी कुर्सी पर बैठाया, पानी और चाय पिलवाई और पूरे मामले की जानकारी ली।
डीएम ने बेटे को बुलाकर लगाई फटकार
बुजुर्ग महिला से जानकारी मिलने के बाद डीएम ने तत्काल बेटे को कार्यालय बुलवाया। जैसे ही बेटा पहुंचा, डीएम ने मां के सामने ही उसे सख्त लहजे में फटकार लगाई। उन्होंने कहा,
“मां को घर से निकालने की हिम्मत कैसे हुई? यह पेंशन आपकी नहीं, उनकी मेहनत की कमाई है।”
डीएम की डांट के बाद बेटे का सिर झुक गया। इसके बाद अधिकारी ने दोनों को अलग बैठाकर बातचीत कराई और धैर्यपूर्वक दोनों पक्षों की बात सुनी।
दो घंटे की काउंसलिंग के बाद बेटे ने मां से मांगी माफी
करीब दो घंटे चली बातचीत के बाद डीएम ने बेटे को समझाया कि मां-बेटे का रिश्ता सबसे मजबूत बंधन होता है और उसे तोड़ना सबसे बड़ा पाप है। डीएम की बातों का असर हुआ और बेटा भावुक होकर मां के पैरों में गिर गया। उसने माफी मांगी और मां ने भी उसे गले लगा लिया। वहां मौजूद अधिकारी और फरियादी इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे और तालियां बजाने लगे।
डीएम ने अगली सुबह खुद फोन कर पूछा हालचाल
घटना के अगले दिन डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुद फोन कर पूनम शर्मा का हालचाल लिया। उन्होंने पूछा,
“आंटी, सब ठीक है न? बेटा अब ठीक से व्यवहार कर रहा है?”
महिला ने जवाब दिया, “सब ठीक है साहब, अब कोई परेशानी नहीं। आपके जैसे बेटे के होते हुए मुझे डर कैसा।”
डीएम का यह कदम बताता है कि वे केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान भी हैं।
शहरभर में डीएम की हो रही सराहना
कानपुर में यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। लोग डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह की संवेदनशीलता और मानवीयता की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि अधिकारी ने न केवल कानून के तहत मदद की बल्कि एक परिवार को टूटने से बचा लिया।
पहले भी दिखा चुके हैं मानवीय पहल
यह पहली बार नहीं है जब डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस तरह की संवेदनशीलता दिखाई हो। वे पहले भी अपने निजी खर्चे से एक बुजुर्ग को कानों की मशीन दिला चुके हैं, कभी सरकारी गाड़ी से वृद्धों को घर तक छोड़ने गए हैं, तो कभी स्कूल में बच्चों के साथ बर्तन धोते नज़र आए हैं।
उनकी ऐसी कई पहलें प्रशासनिक सेवा को मानवीय रूप देने की मिसाल पेश करती हैं।
कानपुर की यह घटना बताती है कि जब प्रशासन में संवेदनशीलता शामिल होती है, तो न सिर्फ कानून काम करता है, बल्कि रिश्ते भी जुड़ते हैं। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने एक बार फिर साबित किया कि थोड़ी-सी इंसानियत किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।

