बंगाल से घुसपैठियों का बड़े पैमाने पर पलायन: होल्डिंग सेंटर के खौफ से बांग्लादेशी नागरिक परिवार सहित भागे, बॉर्डर पर दिखी अफरा-तफरी

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार की ‘3-D नीति’ (Detect, Delete & Deport) के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों में भारी दहशत फैल गई है। उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर चेकपोस्ट पर सैकड़ों घुसपैठिए परिवारों समेत स्वेच्छा से वापस लौट रहे हैं। होल्डिंग सेंटर्स शुरू होते ही यह पलायन तेज हो गया है।

Samvadika Desk
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AI जनित प्रतीकात्मक इमेज
Highlights
  • बांग्लादेशी घुसपैठियों में दहशत, बड़े पैमाने पर पलायन शुरू!
  • शुभेंदु अधिकारी की 3-D नीति का सख्त असर दिखा!
  • घुसपैठियों के बयान – “जेल नहीं जाना, वापस जा रहे हैं”!

कोलकाता, पश्चिम बंगाल: नई भाजपा सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू होते ही बांग्लादेशी नागरिकों में भारी दहशत फैल गई है। उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट बॉर्डर पर पिछले दो दिनों से सैकड़ों घुसपैठिए परिवारों के साथ अपने देश लौटने के लिए उमड़ पड़े हैं। जेल जाने और होल्डिंग सेंटर्स में बंद होने के डर ने उन्हें मजबूर कर दिया है।

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महिलाओं और बच्चों समेत दिखी घबराहट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीमा की ओर बढ़ते इन लोगों के चेहरों पर साफ नजर आ रही घबराहट और अनिश्चितता देखी जा रही है। महिलाएं जल्दबाजी में कपड़ों के छोटे-छोटे बैग और प्लास्टिक की थैलियां थामे हुए हैं, जबकि बच्चों की आंखों में डर और भविष्य को लेकर असमंजस साफ दिख रहा है।

ये लोग वर्षों से कोलकाता, बारासात, दमदम, हावड़ा और आसपास के इलाकों में बस चुके थे। अब अचानक सख्ती की खबरें आने के बाद वे सब कुछ छोड़कर वापस भागने को मजबूर हो गए हैं।

होल्डिंग सेंटर्स का डर बना मुख्य कारण

राज्य सरकार द्वारा मालदा और मुर्शिदाबाद में होल्डिंग सेंटर्स शुरू किए जाने के बाद अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों में आतंक फैल गया है। सूत्रों के अनुसार, पकड़े जाने पर इन्हें सीमा पार पुशबैक (वापस भेजने) की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

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इससे पहले भी कई राज्यों में ऐसी कार्रवाई देखी गई थी, लेकिन बंगाल में नई सरकार के सख्त रुख ने इस बार बड़े पैमाने पर पलायन को जन्म दे दिया है।

वर्षों से बंगाल को बनाया था अपना घर

इनमें ज्यादातर लोग रिक्शा चलाने वाले, निर्माण मजदूर, घरेलू सहायिका, चमड़ा कारखानों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले थे। उन्होंने यहां अपनी छोटी-मोटी जिंदगी बसाकर रखी थी। अब अचानक माहौल बदलते देख वे सब छोड़कर जा रहे हैं।

घुसपैठियों के अपने बयान

28 वर्षीय नसीम मोल्ला ने मीडिया पत्रकार को बताया, “मैं कोलकाता के एक चमड़ा कारखाने में काम करता था। पहले सोचा था कि सिर्फ कागजात चेक होंगे, लेकिन अब फैक्ट्री मालिक भी कह रहा है कि कुछ दिन के लिए गायब हो जाओ। हम गरीब लोग हैं, जेल नहीं जाना चाहते।”

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42 वर्षीय अब्दुल करीम ने कहा, “मैं दस साल पहले मजदूरी करने आया था। यहां आधार, वोटर कार्ड और राशन कार्ड तक बन गया था। वोट भी डाला। लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल गया है।”

स्थानीय लोगों ने बताया

सीमावर्ती गांवों के रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले एक साल में यह दूसरा मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में लोग अचानक सीमा की ओर लौटते दिख रहे हैं। देर रात से लेकर सुबह तक छोटे-छोटे समूहों में लोग पहुंच रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी सरकार की 3-D नीति (Detect, Delete & Deport) के तहत चल रही कार्रवाई से अवैध घुसपैठियों पर साफ असर पड़ रहा है। राज्य सरकार का सख्त रुख जारी है और इस अभियान को और तेज करने के संकेत मिल रहे हैं।

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यह पलायन पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ की समस्या की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर रहा है।

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