सोनभद्र, उत्तर प्रदेश: यूपी के सोनभद्र जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। विंढमगंज थाना क्षेत्र के धरती डोलवा गाँव में चार बच्चों की माँ ललिता और चार बच्चों के पिता संजय ने अपने परिवारों को छोड़कर मंदिर में शादी रचा ली। दोनों के पहले से पति-पत्नी और बच्चे हैं, फिर भी प्रेम में डूबे इस जोड़े की हरकत ने गाँव में हंगामा खड़ा कर दिया। गुस्साए गाँव वालों ने महापंचायत बुलाई और दोनों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया।
प्रेम की शुरुआत, परिवारों में भूचाल
जानकारी के अनुसार, संजय और ललिता, जो झारखंड बॉर्डर के पास दो गाँवों के रहने वाले हैं, के बीच चोरी-छिपे प्रेम पनप गया। दोनों के परिवारों को इसकी भनक तक नहीं थी। एक दिन दोनों गाँव से फरार हो गए और मंदिर में शादी कर ली। शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर डालने के बाद मामला खुला। ललिता के पति ने गुस्से में विंढमगंज थाने में शिकायत दर्ज की, जिसमें उसने संजय पर पत्नी और नाबालिग बेटी को भगाने का आरोप लगाया।
पुलिस की कार्रवाई, लेकिन कानूनी अड़चन
पुलिस ने तुरंत हरकत में आकर संजय और ललिता को थाने बुलाया। पूछताछ में दोनों ने आपसी सहमति से शादी की बात कही। थाना प्रभारी ने कानून का हवाला देते हुए उन्हें जाने की इजाज़त दे दी, क्योंकि दोनों बालिग हैं और स्वेच्छा से साथ थे। लेकिन इस फैसले ने गाँव वालों का गुस्सा और भड़का दिया।
महापंचायत में गरमाया माहौल
गाँव लौटते ही दोनों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। गाँव के देवी चबूतरे पर महापंचायत बुलाई गई, जिसमें ग्राम प्रधान सुरेंद्र पासवान और कई लोग शामिल हुए। पंचायत ने दोनों को अपने पुराने परिवारों के साथ लौटने को कहा, लेकिन संजय और ललिता साथ रहने पर अड़े रहे। गुस्साए पंचों ने दोनों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया और गाँव से सभी रिश्ते तोड़ने का फैसला सुनाया।
दोनों के परिवारों का दर्द
ग्राम प्रधान ने स्थानीय रिपोर्टर को बताया कि संजय की यह तीसरी शादी है। उसने पहली पत्नी को आरोप लगाकर छोड़ दिया था, और दूसरी पत्नी से उसके चार बच्चे (तीन बेटियाँ, एक बेटा, उम्र 14-17 साल) हैं। ललिता के भी चार बच्चे (दो बेटियाँ, दो बेटे) हैं, जिनमें सबसे बड़ी बेटी 16 साल की है। इस हरकत ने दोनों परिवारों को तोड़कर रख दिया। बच्चों के भविष्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।
गाँव में शर्मिंदगी
महापंचायत का मानना है कि इस घटना ने गाँव और समाज की इज्ज़त को ठेस पहुँचाई है। ग्राम प्रधान ने कहा कि यह भावी पीढ़ी को गलत संदेश दे सकता है। पंचायत ने सभी पहलुओं पर विचार कर यह कठोर फैसला लिया। गाँव वालों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि दोनों ने अपने बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी को नज़रअंदाज़ किया।
कानून और समाज का टकराव
पुलिस ने कानूनी रूप से हस्तक्षेप नहीं किया, क्योंकि शादी आपसी सहमति से हुई थी। लेकिन समाज ने इसे स्वीकार नहीं किया। ललिता के पति की शिकायत के बावजूद, पुलिस ने इसे व्यक्तिगत मामला माना। यह घटना कानून और सामाजिक मर्यादाओं के बीच टकराव को दर्शाती है।
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला परिवार, जिम्मेदारी, और सामाजिक मूल्यों पर गहरे सवाल उठाता है। यह समाज से बच्चों के भविष्य और पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता देने की माँग करता है। गाँव वाले चाहते हैं कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।

