लखनऊ/बलरामपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण रैकेट के सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के खिलाफ एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, छांगुर ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से हाथ मिलाने की साजिश रची थी। इसके लिए वह नेपाल में पाकिस्तानी दूतावास से संपर्क साधने की कोशिश में था। यूपी ATS ने उसके नेपाल कनेक्शन की गहन जाँच शुरू कर दी है, जिसमें विदेशी फंडिंग और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के सबूत मिले हैं। यह मामला 14 जुलाई 2025 तक और गंभीर हो गया है।
नेपाल में ISI से संपर्क की कोशिश
ATS के सूत्रों के मुताबिक, छांगुर ने नेपाल के पूर्व सैनिकों के एक सम्मेलन में हिस्सा लिया था, ताकि पाक दूतावास के जरिए ISI से नजदीकी बढ़ा सके। वह नेपाल के दांग जिले के एक प्रभावशाली धार्मिक नेता के साथ काठमांडू तक गया, लेकिन सुरक्षा कारणों से दूतावास में प्रवेश नहीं कर सका। उसका मकसद नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में खास लोगों की सूची तैयार करना और विदेशी फंडिंग के जरिए अपने नेटवर्क को मजबूत करना था।
बलरामपुर को इस्लामिक स्टेट बनाने की साजिश
जाँच में खुलासा हुआ कि छांगुर का सपना बलरामपुर को इस्लामिक स्टेट बनाना था। वह भारत-नेपाल सीमा पर बसे इस जिले के मुस्लिम बहुल क्षेत्र, खासकर उतरौला, को टारगेट कर रहा था। वह अपने सहयोगियों को फंडिंग देता था और हिंदू महिलाओं व अन्य लोगों को लालच देकर धर्मांतरण करवाता था। ATS को पता चला कि वह सऊदी अरब के इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक, मुस्लिम वर्ल्ड लीग, दावते इस्लाम, और इस्लामिक संघ ऑफ नेपाल जैसे संगठनों से जुड़ा था।
नीतू और नवीन की अहम भूमिका
छांगुर का यह नेटवर्क सिर्फ उसकी करीबी नीतू उर्फ नसरीन और उसके पति नवीन उर्फ जमालुद्दीन के भरोसे चलता था। दोनों 2015 में दुबई में धर्म परिवर्तन के बाद रैकेट में शामिल हुए थे। नीतू गरीब परिवारों को चमत्कार और आर्थिक मदद का लालच देकर फँसाती थी, जबकि नवीन कर्ज के जाल में उलझाकर लोगों को मजबूर करता था। इनके नाम पर बलरामपुर और पुणे में करोड़ों की संपत्तियाँ थीं।
विदेशी फंडिंग का जाल
ATS की जाँच में सामने आया कि छांगुर के नेटवर्क में विदेशी फंडिंग का बड़ा खेल था। नीतू के 8 बैंक खातों में 5 करोड़ और नवीन के खातों में 34 करोड़ रुपये विदेश से आए। यह पैसा धर्मांतरण और संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल हुआ। नेपाल और खाड़ी देशों से फंडिंग के सबूत मिले हैं, जिसके लिए NIA और ED से जाँच की माँग की गई है।
बुलडोजर एक्शन
8 जुलाई 2025 को नीतू के नाम की बलरामपुर की 70 कमरों वाली कोठी पर बुलडोजर चला, जो रैकेट का मुख्य केंद्र थी। यह कोठी सरकारी जमीन पर अवैध थी। 9 जुलाई को भी कार्रवाई जारी रही। छांगुर और नीतू को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया गया था, जहाँ वे 70 दिन से छिपे थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल
यह मामला न केवल धर्मांतरण, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है। छांगुर की ISI से संभावित साठगाँठ और विदेशी फंडिंग ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यह समाज से जागरूकता और सरकार से कठोर कार्रवाई की माँग करता है।
(ये जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

