प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत के ‘तीन बच्चे पैदा करने’ वाले बयान का जिक्र कर कहा गया था कि मुसलमान ज्यादा बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि समाज की ताकत सिर्फ संख्या से नहीं बढ़ती। जैसे कुत्तों की बड़ी संख्या भी शेर की एक दहाड़ के सामने कुछ नहीं कर पाती, वैसे ही बच्चों की संख्या बढ़ाने से काम नहीं बनता। असली ताकत बच्चों को संस्कार और धर्म के प्रति दृढ़ बनाने में है।
‘संख्या से नहीं, संस्कार से समाज आगे बढ़ता है’
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कौन कितने बच्चे पैदा कर रहा है, यह उसका निजी मामला है। हमें अपनी घर की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान या हिंदू दोनों ही यह सोचते हैं कि संख्या बढ़ाकर काम बन जाएगा, तो यह गलत है। सिर्फ संख्या बढ़ जाने से समाज मजबूत नहीं होता। कई बार अधिक संख्या होने पर लोग आपस में ही लड़कर खत्म हो जाते हैं।
उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के वंशज यादवों का उदाहरण दिया। कहा कि यादवों को कोई बाहरी दुश्मन मारने नहीं आया था। वे अपनी अधिक संख्या और आपसी संघर्ष के कारण समाप्त हो गए थे। इसलिए संख्या के बारे में वही लोग ज्यादा बात करते हैं, जिन्हें सनातन धर्म की गहराई का ज्ञान नहीं है।
‘फसल हम उगाएं, काटने कोई और आ जाए तो क्या होगा?’
शंकराचार्य ने कहा कि समाज बच्चे पैदा करने से न खत्म होता है और न ही बढ़ता है। समाज अपनी संस्कृति, सभ्यता और धर्म पर टिके रहने से लंबे समय तक कायम रहता है और आगे बढ़ता है। सिर्फ बच्चे पैदा करने से कुछ नहीं होगा। अगर बच्चे को संस्कार नहीं दिए गए, तो एक दिन कोई उसे समझाकर धर्म परिवर्तन के लिए तैयार कर सकता है। उन्होंने कहा कि फसल हम उगाएं, सींचें और काटने कोई और आ जाए तो क्या होगा? इसलिए जरूरी है कि जितने भी बच्चे पैदा हों, उन्हें अच्छे संस्कार दिए जाएं और उन्हें अपने धर्म के प्रति दृढ़ बनाया जाए।
‘बच्चों की संख्या माता-पिता पर छोड़ दें’
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि कितने बच्चे पैदा करने हैं, यह माता-पिता पर छोड़ देना चाहिए। लेकिन इस बात पर जोर होना चाहिए कि जितने भी बच्चे हों, वे संस्कारवान और मजबूत हों। संख्या बल से कोई नहीं जीतता। कुत्तों की बड़ी संख्या होती है, लेकिन जब एक शेर आकर दहाड़ देता है तो सब भाग जाते हैं।
विवाद का पूरा संदर्भ
मामला मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के ‘तीन बच्चे पैदा करने’ वाले बयान का जिक्र किया था। मौलाना ने कहा था कि मुसलमान ज्यादा बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं। शंकराचार्य ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संख्या से ज्यादा संस्कार और धर्म की मजबूती पर जोर दिया।
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे समाज में सद्भाव और सही दिशा देने वाला बयान बता रहे हैं। शंकराचार्य का संदेश साफ है – समाज की असली ताकत संख्या में नहीं, बल्कि संस्कार और धर्म के प्रति दृढ़ता में छिपी है।

