मुंबई/तेहरान: मंदाना करीमी के बाद अब एक और ईरानी मूल की बॉलीवुड अभिनेत्री एलनाज नौरोजी ने ईरान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और लोकतंत्र पर बेबाक बयान दिए हैं। ‘बॉम्बे टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में एलनाज ने ईरान के इतिहास, सांस्कृतिक विविधता और सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के नेतृत्व वाले तंत्र पर खुलकर बात की। उनके बयानों ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है, खासकर प्रवासी ईरानियों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच।
ईरान कभी एकरूप धार्मिक देश नहीं रहा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एलनाज ने कहा कि ईरान का इतिहास सिर्फ एक धर्म या एक पहचान तक सीमित नहीं है। उन्होंने प्राचीन फारस का जिक्र करते हुए बताया कि उस दौर में समाज बहुत खुला और बहुलतावादी था। भारत की तरह ईरान भी कई परंपराओं, संस्कृतियों और समुदायों का संगम रहा है। एलनाज का कहना है कि इस्लाम के आने से पहले वहां ज़ोरास्ट्रियन धर्म प्रमुख था और समाज में विविधता की मजबूत जड़ें थीं। उन्होंने कहा कि ईरान को सिर्फ एक धार्मिक राष्ट्र के रूप में देखना उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता को नजरअंदाज करना है।
खामेनेई के शासन पर सवाल
मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर बोलते हुए एलनाज ने कहा कि ईरान की सत्ता संरचना जटिल और बहुस्तरीय है। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के नेतृत्व वाले तंत्र में कई संस्थाएं और समूह सक्रिय हैं, लेकिन यह ढांचा आम नागरिकों की उम्मीदों से काफी अलग नजर आता है। अभिनेत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उनकी नजर में यह व्यवस्था नागरिकों की आकांक्षाओं से मेल नहीं खाती।
भारत से मिला अनुभव: विविधता ताकत है
भारत में काम करने के अपने अनुभव साझा करते हुए एलनाज ने कहा कि अलग-अलग धर्म, संस्कृति और पहचान वाले लोग साथ रहकर भी एक मजबूत राष्ट्रीय भावना बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का बहुसांस्कृतिक समाज किसी भी देश के लिए मिसाल है। यही मॉडल ईरान के अतीत में भी देखने को मिलता था। भारत में काम करने से उन्हें यह समझ आया कि विविधता समाज की असली ताकत होती है।
‘तेहरान’ सीरीज से मिली पहचान
एलनाज नौरोजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेब सीरीज ‘तेहरान’ में अपने किरदार के लिए खास पहचान मिली है। इस सीरीज में क्षेत्रीय राजनीति और जासूसी की पृष्ठभूमि दिखाई गई है। उनके करियर ने उन्हें कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलने का मंच दिया है।
एलनाज के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब ईरान में राजनीतिक बदलाव और लोकतंत्र की मांग को लेकर बहस तेज है। उनके शब्दों ने प्रवासी ईरानियों और ईरान के भीतर के लोगों में नई उम्मीद जगाई है। साथ ही यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या ईरान अपने अतीत की विविधता और खुली सोच को फिर से अपनाएगा?

