कोलंबो, श्रीलंका: चक्रवात ‘दितवाह’ से तबाह श्रीलंका को मानवीय सहायता के नाम पर पाकिस्तान ने जो राहत सामग्री भेजी, वह एक्सपायरी हो चुकी निकली। पानी, दूध और बिस्कुट जैसे आइटम्स अक्टूबर 2024 की एक्सपायरी डेट वाले थे, जो अब एक साल पुराने हो चुके हैं। पाकिस्तानी उच्चायोग की जारी तस्वीरों ने ही इस फर्जीवाड़े की पोल खोल दी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की जमकर धुनाई हो रही है। श्रीलंका सरकार भड़क उठी है, जबकि पाकिस्तान को राजनयिक शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। इसी बीच, पाकिस्तान ने भारत को बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने तथ्यों के साथ उसके झूठ का पर्दाफाश कर दिया। यह घटना 1-2 दिसंबर 2025 को तेजी से उभरी, जब श्रीलंका में 355 से अधिक मौतें और लाखों प्रभावित हो चुके हैं।
एक्सपायरी राहत सामग्री: पाकिस्तान की पुरानी आदत दोहराई
पाकिस्तान ने चक्रवात ‘दितवाह’ से प्रभावित श्रीलंका को ‘मानवीय सहायता’ के तौर पर राहत पैकेट भेजे, लेकिन कोलंबो पहुंचते ही हकीकत सामने आ गई। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने सामान की जांच की तो पाया कि कई कार्टन एक्सपायरी या अयोग्य थे। दूध पाउडर, बिस्कुट और पानी की बोतलों पर अक्टूबर 2024 की तारीख थी, जो अब पूरी तरह बेकार हो चुके हैं। पाकिस्तानी उच्चायोग ने एक्स पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “हम हमेशा साथ खड़े हैं! श्रीलंका के बाढ़ प्रभावित भाइयों-बहनों के लिए पाकिस्तान से राहत पैकेट सफलतापूर्वक पहुंचे।” लेकिन यूजर्स ने तुरंत एक्सपायरी डेट्स को हाईलाइट कर दिया।
एक यूजर ने लिखा, “क्या शर्मनाक! पाकिस्तान श्रीलंका को एक्सपायरी फूड आइटम्स भेज रहा है। बाढ़ पीड़ितों के लिए बेहद घिनौना कृत्य!” एक अन्य ने कहा, “ये नीच किस्म के लोग हैं। हिंदू बहुल देश में भूकंप के दौरान बीफ भेजना और अब श्रीलंका को एक साल पुराना एक्सपायरी खाना – यही उनकी असलियत है।” यह पहली बार नहीं है। 2023 में तुर्की भूकंप के दौरान भी पाकिस्तान ने पुरानी, बाढ़ प्रभावित राहत सामग्री दोबारा भेज दी थी, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि धूमिल हुई थी।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की किरकिरी, श्रीलंका ने जताई कड़ी आपत्ति
एक्स पर वायरल तस्वीरों ने पाकिस्तान को सोशल मीडिया का कोर्ट मार्शल कर दिया। यूजर्स ने लिखा कि यह सामान 10 परिवारों के लिए भी पर्याप्त नहीं, ऊपर से एक्सपायरी। “कंगाल पाकिस्तान भारत की बराबरी करने के चक्कर में फेल हो गया,” एक पोस्ट में लिखा गया। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन और विदेश मंत्रालय ने इसे ‘गंभीर चिंता’ का विषय बताया। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलंबो ने पाकिस्तान से औपचारिक और अनौपचारिक आपत्ति जताई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह सहायता का मजाक है। हम ऐसे बेकार सामान को वितरित नहीं कर सकते।” इससे पाकिस्तान को राजनयिक झटका लगा, खासकर जब वह हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान का भारत विरोधी प्रचार: हवाई क्षेत्र पर झूठा आरोप
पाकिस्तान ने श्रीलंका को सहायता भेजने के बहाने भारत को घेरने की कोशिश की। पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया कि भारत ने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी। लेकिन भारत ने तथ्यों के साथ इस प्रोपेगैंडे को बेनकाब कर दिया। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने सोमवार दोपहर 1 बजे (IST) अनुरोध किया था, और भारत ने मानवीय आधार पर मात्र 4 घंटों में मंजूरी दे दी। शाम 5:30 बजे तक आधिकारिक सूचना भेज दी गई।
एक अधिकारी ने कहा, “पाकिस्तानी मीडिया हमेशा की तरह फर्जी खबरें फैला रहा है। ये आरोप बेबुनियाद और भ्रामक हैं। हवाई क्षेत्र के अनुरोधों पर स्थापित प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार कार्रवाई होती है।” बावजूद पाकिस्तान के अपने हवाई क्षेत्र पर भारतीय विमानों पर प्रतिबंध के, भारत ने यह कदम पूरी तरह मानवीय भावना से उठाया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने खुद 53 टन राहत सामग्री और रेस्क्यू टीम भेजी है।
चक्रवात ‘दितवाह’ का कहर: श्रीलंका में 355 मौतें, लाखों प्रभावित
चक्रवात ‘दितवाह’ ने श्रीलंका को दशकों का सबसे बुरा संकट दिया है। बाढ़ और भूस्खलन से 355 से अधिक लोग मारे गए, 10 लाख से ज्यादा प्रभावित हुए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, आपदा प्रतिक्रिया प्रयास अभिभूत हो चुके हैं। भारत और अन्य पड़ोसी देशों ने इमरजेंसी टीम भेजी हैं, जबकि पाकिस्तान का यह कदम श्रीलंका के लिए और निराशाजनक साबित हुआ।
पाकिस्तान की छवि पर एक और दाग: क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक तंगी से जूझते पाकिस्तान की यह हरकत उसकी ‘एड डिप्लोमेसी’ की विफलता दिखाती है। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में कहा गया कि “यह एक मृत अर्थव्यवस्था का मजाक है।” सोशल मीडिया पर #PakistanExpiredAid ट्रेंड कर रहा है, और यूजर्स भारत की त्वरित सहायता की तारीफ कर रहे हैं। श्रीलंका सरकार ने पाकिस्तान से स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटना पर नजर रखे हुए है। यह विवाद पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल खड़े कर रहा है, खासकर जब वह क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की होड़ में है।

