दो सगी बहनों ने आपस में पति बदलने का फैसला लिया, बड़ी को छोटी के पति से हो गया प्यार; ग्वालियर हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

Gwalior News: ग्वालियर हाईकोर्ट में दो सगी बहनों ने आपस में पति बदलने की इच्छा जताई। बड़ी बहन छोटी बहन के पति के साथ रहना चाहती है, जबकि छोटी बहन भी अपने जीजा के साथ नया जीवन शुरू करना चाहती है। पति की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि दोनों महिलाएँ बालिग हैं और अपनी मर्जी से फैसला ले सकती हैं। याचिका खारिज कर दी गई।

Samvadika Desk
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AI जनित प्रतीकात्मक इमेज
Highlights
  • दो सगी बहनों ने आपस में पति बदलने का फैसला लिया!
  • बड़ी बहन को छोटी के पति से हो गया प्यार!
  • हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज की!

ग्वालियर, मध्य प्रदेश: कुछ दिनों पूर्व, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में एक ऐसा अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा। दो सगी बहनें आपस में अपनी पतियों को बदलना चाहती हैं। बड़ी बहन को छोटी बहन के पति से प्यार हो गया है, जबकि छोटी बहन भी अपने जीजा के साथ रहना चाहती है। इस उलझे हुए प्रेम त्रिकोण ने न सिर्फ परिवार को, बल्कि पूरी अदालत को भी हैरत में डाल दिया। आखिरकार हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यह अपहरण का मामला नहीं, बल्कि पारिवारिक विवाद है।

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पति ने लगाई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

मीडिया जानकारी के मुताबिक, दतिया जिले के रहने वाले गिरिजा शंकर ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मायाराम नाम के व्यक्ति ने उनकी पत्नी और बेटी को बंधक बना रखा है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि महिला को कोर्ट में पेश किया जाए। जब महिला कोर्ट में आई, तो पूरे मामले में बड़ा ट्विस्ट आ गया।

महिला ने कोर्ट में दिया चौंकाने वाला बयान

महिला ने कोर्टरूम में साफ कहा कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ है। वह अपनी मर्जी से मायाराम के साथ गई है। मायाराम उसकी छोटी बहन का पति है। महिला ने आगे बताया कि दोनों बहनें अब पति बदलना चाहती हैं। छोटी बहन ने भी कोर्ट में कोई आपत्ति नहीं जताई और कहा कि अगर बड़ी बहन हमारे पति के साथ रहना चाहती है, तो मुझे कोई समस्या नहीं है, लेकिन मुझे भी अपने जीजा के साथ रहने की अनुमति दी जाए।

दोनों बहनें वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं

जाँच में सामने आया कि दोनों बहनें अपनी शादीशुदा जिंदगी से संतुष्ट नहीं हैं। दोनों अपनी मर्जी से एक-दूसरे के पति के साथ नया वैवाहिक जीवन शुरू करना चाहती हैं। दोनों के बच्चे भी हैं, लेकिन बच्चों की देखभाल और भविष्य को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

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हाईकोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह अपहरण का मामला नहीं है। दोनों महिलाएँ बालिग हैं और अपनी मर्जी से फैसला ले रही हैं। इसलिए अदालत इस पारिवारिक विवाद में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

सामाजिक और कानूनी सवाल

यह मामला वैवाहिक संबंधों, पारिवारिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। दो सगी बहनों का पति बदलने का फैसला समाज में रिश्तों की मर्यादा पर सवाल खड़ा करता है। हाईकोर्ट का यह फैसला दिखाता है कि बालिग व्यक्तियों की सहमति से लिए गए फैसलों में अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन इससे सामाजिक बहस जरूर छिड़ गई है।

ग्वालियर में चर्चा

यह घटना ग्वालियर और आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बन गई है। लोग इस अनोखे मामले पर तरह-तरह की राय दे रहे हैं। कुछ इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता बता रहे हैं, तो कुछ पारिवारिक मूल्यों का हनन मान रहे हैं।

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