लखनऊ/दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार ब्लास्ट और फरीदाबाद में 2,900 किलोग्राम विस्फोटकों की बरामदगी से जुड़े आतंकी मॉड्यूल में गिरफ्तार डॉ. शाहीन शाहिद और उसके भाई डॉ. परवेज अंसारी की यूपी एटीएस पूछताछ ने एक खौफनाक साजिश का पर्दाफाश कर दिया है। दोनों व्हाट्सएप ग्रुप पर वीडियो कॉल के जरिए ‘आतंक की पाठशाला’ चला रहे थे, जहां शाहीन महिलाओं को कट्टरता सिखाती थीं, जबकि परवेज युवाओं को जिहाद का पाठ पढ़ाता था। जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की महिला विंग ‘जमात-उल-मोमिनात’ की कमान संभाल रही शाहीन ने युवाओं को कहा, “आतंक नहीं, यह अल्लाह का पैगाम है। इसके लिए कुर्बानियां देनी होंगी।” एटीएस ने उनके फोन और गैजेट्स से 100 से अधिक सदस्यों वाले ग्रुप का खुलासा किया, जहां हिंसक वीडियो भेजे जाते थे।
व्हाट्सएप ग्रुप: 100+ सदस्य, वीडियो कॉल पर कट्टरता का कोर्स
पूछताछ में सामने आया कि शाहीन ने व्हाट्सएप पर एक गुप्त ग्रुप बनाया था, जिसमें देश के विभिन्न शहरों—लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, श्रीनगर, सहारनपुर, बहराइच, संभल, बिजनौर, मुरादाबाद—के 100 से अधिक युवा जुड़े थे। ये ग्रुप JeM के हैंडलर डॉ. उमर (श्रीनगर) के निर्देश पर चलता था। वीडियो कॉल सेशन नियमित होते थे, जहां शाहीन महिलाओं को संबोधित करतीं: “तुम्हें अपने शौहर से तलाक भी लेना पड़ सकता है। क्या तुम तैयार हो अल्लाह की राह पर कुर्बानी देने को?” सहमति मिलने पर उन्हें विंग में शामिल किया जाता। पुरुषों को परवेज और डॉ. आरिफ मीर (कानपुर) सिखाते थे। क्लास खत्म होने पर सभी जिहादी नारे लगाते—”अल्लाहु अकबर”, “जिहाद फिकिबिल्लाह”। एटीएस ने फोन से रिकॉर्डिंग बरामद कीं, जो JeM की मैगजीन ‘मदीना’ के हिंसक वीडियो से प्रेरित थीं।
‘आतंक अल्लाह का पैगाम’: युवाओं को ब्रेनवॉश का खौफनाक तरीका
शाहीन, जो इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं, JeM की महिला विंग ‘जमात-उल-मोमिनात’ की भारत प्रमुख थीं। पाकिस्तान के बहावलपुर में 8 अक्टूबर 2025 को JeM ने इस विंग का ऐलान किया, जिसकी कमान मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर संभालती हैं। सादिया के पति यूसुफ अजहर को 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक में मार गिराया गया था। शाहीन ने युवतियों को कहा, “जिसे तुम आतंक समझती हो, वह अल्लाह का नेक रास्ता है। इसके लिए परिवार, शौहर सब छोड़ना पड़ेगा।” परवेज ने युवाओं को मौलानाओं की तकरीरें सुनाईं—दिल्ली, पश्चिम बंगाल, केरल और ओमान की यात्राओं पर ले जाकर। सहारनपुर, बिजनौर जैसी जगहों पर बैठकें आयोजित कीं, जहां हिंसक जिहाद का प्रचार होता था।
भाई-बहन का संयुक्त नेटवर्क: वीडियो लिंक से भारत को ‘इस्लामिक स्टेट’ बनाने का सपना
परवेज, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर, युवा पुरुषों को हैंडल करता था। दोनों भाई-बहन ने ग्रुप में JeM के हिंसक वीडियो शेयर किए, जहां कुर्बानी के नाम पर हमलों का महिमामंडन होता था। डॉ. उमर भेजता था ये वीडियो, जिनमें भारत को ‘इस्लामिक देश’ बनाने का संदेश था। टारगेट सिस्टम था—अधिक सदस्य जोड़ने वालों को ‘शाबाशी’ और ग्रुप लीडर बनाया जाता। हापुड़ से गिरफ्तार फारुक अहमद भी ग्रुप में सक्रिय था। एटीएस ने पाया कि यह नेटवर्क JeM के साथ-साथ Ansar Ghazwat-ul-Hind (AGuH) से जुड़ा था।
फरीदाबाद से दिल्ली ब्लास्ट तक: डॉक्टरों का ‘व्हाइट कॉलर’ आतंक नेटवर्क
यह साजिश फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से शुरू हुई, जहां शाहीन और मुजम्मिल गनई फैकल्टी थे। मुजम्मिल की गिरफ्तारी से 2,900 किलो विस्फोटक और AK-47 बरामद हुए। शाहीन की कार से हथियार मिले। 2013 में कानपुर नौकरी छोड़ थाईलैंड गईं, जो संदिग्ध है। दो महीने पहले लखनऊ-कानपुर दौरा भी जांच में है। एटीएस अब ग्रुप के 100+ सदस्यों की तलाश में जुटी है। यह ‘व्हाइट कॉलर’ नेटवर्क—शिक्षित डॉक्टरों का इस्तेमाल—JeM की नई रणनीति है।
जांच तेज, पाकिस्तानी हैंडलरों पर निशाना
एटीएस ने शाहीन-परवेज के फोन से रिकॉर्डिंग, वीडियो और कॉन्टैक्ट्स बरामद किए। पाकिस्तानी हैंडलरों की पहचान हो रही है। यूपी, हरियाणा, जे-के पुलिस के साथ NIA जुड़ गई। यह साजिश दिल्ली, लखनऊ, कानपुर जैसे शहरों के धार्मिक स्थलों को निशाना बना रही थी। शाहीन का चेहरा डॉक्टर का था, लेकिन इरादे जिहाद के। जांच से और खुलासे होने हैं।
(ये जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

