अब ट्रेन ड्राइवर भूल भी जाए तो सीटी खुद बजेगी, कवच सिस्टम से हादसे होंगे खत्म!

UP News: भारतीय रेलवे के स्वदेशी कवच सिस्टम से अब लोको पायलट अगर रेल क्रॉसिंग पर सीटी बजाना भूल भी जाए, तो ट्रेन खुद 600-850 मीटर पहले ऑटोमैटिक सीटी बजा देगी। इससे मानवीय चूक से होने वाले हादसे लगभग खत्म हो जाएंगे। कानपुर-दिल्ली रूट पर 160 किमी/घंटा स्पीड से ट्रायल चल रहा है, जो 18 फरवरी तक पूरा होगा। घने कोहरे में भी सुरक्षित संचालन और ट्रेन स्पीड बढ़ने की उम्मीद।

Samvadika Desk
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स्लीपर वंदे भारत
Highlights
  • ट्रेन ड्राइवर सीटी भूल जाए तो भी खुद बजेगी – कवच की कमाल!
  • रेल क्रॉसिंग पर 600-850 मीटर पहले ऑटोमैटिक सीटी!
  • कवच सिस्टम से मानवीय चूक के हादसे लगभग खत्म!

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: भारतीय रेलवे की सुरक्षा में एक बड़ा कदम। अब अगर लोको पायलट (ट्रेन ड्राइवर) किसी रेल क्रॉसिंग पर सीटी बजाना भूल भी जाए, तो चिंता की कोई बात नहीं रहेगी। स्वदेशी ‘कवच’ सिस्टम के जरिए ट्रेन खुद 600 से 850 मीटर पहले ऑटोमैटिक सीटी बजाकर सभी को सावधान कर देगी। इससे मानवीय चूक से होने वाले हादसे लगभग खत्म हो जाएंगे। यह सुविधा कानपुर-दिल्ली रूट पर ट्रायल में है और 18 फरवरी तक पूरा हो जाएगा। यह जानकारी 23 सितंबर 2025 को सामने आई है।

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कवच कैसे काम करता है?

‘कवच’ रेलवे के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित पूरी तरह स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। यह सिस्टम ट्रेन को रेड सिग्नल पार करने, सिग्नल ओवरशूट, टक्कर और मानवीय भूल से होने वाली दुर्घटनाओं से बचाता है। खास बात यह है कि रेल क्रॉसिंग (समपार) पर अगर ड्राइवर सीटी बजाना भूल जाए, तो कवच 600 से 850 मीटर पहले ही इंजन से ऑटोमैटिक सीटी बजवा देगा। क्रॉसिंग पार होने के बाद सीटी अपने आप बंद हो जाएगी या ड्राइवर इसे मैन्युअली बंद कर सकता है।

ट्रायल तेजी से चल रहा है

उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के कानपुर सेंट्रल डिवीजन में कवच का ट्रायल 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से किया जा रहा है। पहले चरण का ट्रायल पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में सोमवार से बुधवार तक टूंडला से दादरी के बीच WAP-5 और WAP-7 इंजनों पर ट्रायल चल रहा है। NCR के कवच से जुड़े अधिकारी बता रहे हैं कि ट्रायल सफल रहा तो जोन के सभी यात्री इलेक्ट्रिक इंजनों में यह डिवाइस लगाई जाएगी।

घने कोहरे में भी सुरक्षित संचालन

सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने हिन्दुस्तान के रिपोर्टर को बताया कि कवच से ट्रेनों का संचालन पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा। खासकर घने कोहरे में जब दृश्यता कम होती है, तब भी यह सिस्टम रेल क्रॉसिंग पर ऑटोमैटिक सीटी बजाकर लोगों को सावधान कर देगा। इससे मानवीय चूक से होने वाली दुर्घटनाएँ लगभग समाप्त हो जाएंगी।

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ट्रेनों की स्पीड बढ़ेगी

कवच लागू होने के बाद ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 130 किमी/घंटा से बढ़कर 160 किमी/घंटा हो जाएगी। यह यात्रियों के लिए समय की बचत और रेलवे के लिए आधुनिकता का प्रतीक होगा। अधिकारियों का कहना है कि कवच न केवल सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि रेल नेटवर्क की क्षमता भी बढ़ाएगा।

स्वदेशी तकनीक की ताकत

कवच पूरी तरह भारतीय तकनीक है। इसे आरडीएसओ ने विकसित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य सिग्नल ओवरशूट, ट्रेन टक्कर और मानवीय गलतियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है। बरेली से लेकर पूरे उत्तर भारत में इसकी सफलता से रेल यात्रा और सुरक्षित हो जाएगी।

रेल यात्रियों के लिए राहत

यह खबर उन लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत है जो रोजाना रेल क्रॉसिंग से गुजरते हैं। अब अगर ड्राइवर सीटी बजाना भूल भी जाए, तो कवच सिस्टम खुद सावधान कर देगा। इससे न केवल हादसे रुकेंगे, बल्कि रेलवे की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। बरेली और पूरे उत्तर प्रदेश में रेल यात्रा अब और सुरक्षित होने वाली है।

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