पटना, बिहार: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। गठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने और सत्ता में आने पर दलित, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से तीन उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की योजना बनाई है। साथ ही, सीट बंटवारे का फॉर्मूला भी लगभग तय हो चुका है। यह रणनीति न केवल सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देती है, बल्कि तेजस्वी की यादव-केंद्रित छवि को बदलने और व्यापक वोटर समूहों को आकर्षित करने का भी प्रयास है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे ‘हवाई किले’ की संज्ञा दी है, और चुनावी समीकरणों को देखते हुए यह दांव कितना कारगर होगा, यह देखना बाकी है।
तेजस्वी होंगे CM चेहरा, तीन डिप्टी CM की योजना
महागठबंधन के सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव को गठबंधन का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया जाएगा। तेजस्वी, जो पहले दो बार उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं, इस बार नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को चुनौती देंगे। गठबंधन की रणनीति में सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए दलित, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग से तीन उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति का प्रस्ताव है। RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “यह तेजस्वी की दूरदर्शी सोच है, जो यादव-केंद्रित राजनीति से हटकर सभी वर्गों को सत्ता में हिस्सेदारी देने की कोशिश है।”
सीट बंटवारे का फॉर्मूला
RJD प्रवक्ता के अनुसार, सीट बंटवारे का खाका तैयार हो चुका है। इसके तहत:
- RJD 125 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
- कांग्रेस को 50-55 सीटें मिलेंगी।
- वाम दल (CPI, CPI(M), CPI(ML)) करीब 25 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे।
- बाकी सीटें छोटे सहयोगी दलों जैसे विकासशील इंसान पार्टी (VIP), लोक जनशक्ति पार्टी (पशुपति कुमार पारस गुट), और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच बांटी जाएंगी।
विकासशील इंसान पार्टी के प्रवक्ता देव ज्योति ने दावा किया कि गुरुवार शाम तक तेजस्वी को औपचारिक रूप से CM उम्मीदवार घोषित कर दिया जाएगा, और VIP नेता मुकेश साहनी को एक उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। हालांकि, सहयोगी दलों ने अभी तक तेजस्वी के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।
कांग्रेस और सहयोगियों का रुख
कांग्रेस नेता प्रवीन सिंह कुशवाहा ने इस रणनीति को राहुल गांधी के सामाजिक समावेशन के दृष्टिकोण से जोड़ा। उन्होंने कहा, “तीन उपमुख्यमंत्रियों का प्रस्ताव सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह गठबंधन की एकजुटता और विविधता को दर्शाता है।” दूसरी ओर, VIP के देव ज्योति ने इसे तेजस्वी की रणनीतिक चाल बताया, जो गठबंधन को व्यापक सामाजिक आधार देगी।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
एनडीए और अन्य विपक्षी दलों ने महागठबंधन की इस रणनीति पर तंज कसा है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रवक्ता राम पुकड़ शर्मा ने कहा, “यह हवाई किले बनाने की कोशिश है। महागठबंधन को पता है कि वे 100 सीटें भी नहीं जीत सकते, फिर भी ऐसी घोषणाएं कर रहे हैं।” जन सुराज पार्टी के अनिल कुमार सिंह ने इसे ‘झूठा प्रचार’ करार देते हुए कहा कि यह रणनीति मुकेश साहनी को गठबंधन में बनाए रखने की कोशिश है। उन्होंने चेतावनी दी कि इतने सारे उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति से नौकरशाही में भ्रम और आंतरिक टकराव बढ़ सकता है, जो तेजस्वी के नेतृत्व को कमजोर करेगा।
बिहार में उपमुख्यमंत्रियों का इतिहास
बिहार में उपमुख्यमंत्री का पद हमेशा से सामाजिक और राजनीतिक संतुलन का प्रतीक रहा है। अब तक 10 नेता इस पद पर रह चुके हैं। पहले उपमुख्यमंत्री अनुग्रह नारायण सिन्हा ने श्रीकृष्ण सिन्हा के साथ 11 साल से अधिक समय तक काम किया। कर्पूरी ठाकुर ने 329 दिन उपमुख्यमंत्री रहने के बाद CM बने। बीजेपी के सुशील कुमार मोदी ने 10 साल से अधिक समय तक यह पद संभाला, जो देश में दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल है। तेजस्वी यादव ने 2015 से 2025 के बीच दो कार्यकालों में तीन साल से ज्यादा समय तक उपमुख्यमंत्री रहे। वर्तमान में एनडीए सरकार में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री हैं।
रणनीति का मकसद और चुनौतियां
पटना के राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने कहा कि तीन उपमुख्यमंत्रियों का फॉर्मूला तेजस्वी के लिए कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है। यह वंशवाद के आरोपों को कम करता है, यादव-केंद्रित छवि को तोड़ता है, और दलित, मुस्लिम व EBC वर्गों को सत्ता में हिस्सेदारी का भरोसा देता है। लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। RJD पिछले 20 साल में अकेले कोई चुनाव नहीं जीत सकी, और 2020 के चुनाव में महागठबंधन बहुमत से चूक गया था, क्योंकि छोटे समुदायों ने यादव-प्रधान राजनीति के खिलाफ वोट किया था।
बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं, और बहुमत के लिए 123 सीटों की जरूरत है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, महागठबंधन की यह रणनीति सामाजिक समीकरणों को साधने और सत्ता की ओर बढ़ने का बड़ा दांव है। लेकिन क्या यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ तेजस्वी को सत्ता दिला पाएगा, या यह ‘हवाई किला’ साबित होगा? इसका जवाब आने वाले चुनावों में मिलेगा।

