नई दिल्ली: कांग्रेस की महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा को राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जुलाई 2024 में महिला आरक्षण की मांग को लेकर जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के मामले में कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया है। अब 5 जून को उनकी सजा पर बहस होगी।
कोर्ट ने तय किए आपराधिक आरोप
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने अलका लांबा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, यह फैसला सुनाया। इस मामले में सरकारी अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की, सरकारी काम में बाधा डालने, सार्वजनिक रास्ता जाम करने और अदालती आदेश की अवहेलना जैसे आरोप लगे थे।
कौन-कौन सी धाराएं लगीं?
मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 132, 221, 223(a) और 285 के तहत मुकदमा चल रहा था। 25 मई 2026 को कोर्ट ने अलका लांबा को इन आरोपों में दोषी करार दिया।
अलका लांबा का बयान
कोर्ट के फैसले के बाद अलका लांबा ने कहा, “यही होने वाला था, मुझे इसकी उम्मीद थी। जुलाई 2024 में मानसून सत्र के दौरान महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मैं अपनी बहनों के साथ महिला आरक्षण लागू करने की मांग लेकर जंतर मंतर पर संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन कर रही थी। पुलिस पर दबाव या अपनी कुर्सी बचाने के लिए मुझ पर केस दर्ज किया गया।
मैं 2025 से 2026 तक इसी कोर्ट में चक्कर काटती रही। आज पता चला कि मुझे दोषी पाया गया है। मेरा एकमात्र अपराध यही था कि मैंने महिला आरक्षण और महिला सुरक्षा के लिए आवाज उठाई। 5 जून को सजा सुनाई जाएगी। मैं इसका स्वागत करती हूं, मुझे डर नहीं लगता।”
क्या था पूरा मामला?
जुलाई 2024 में अलका लांबा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान रास्ता रोके जाने और अधिकारियों के काम में बाधा डालने के आरोप में केस दर्ज हुआ था। अब इस मामले में दोषसिद्धि होने के बाद सजा पर 5 जून को अंतिम बहस होगी।
यह फैसला महिला कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

