बरेली, उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी (सपा) की बरेली इकाई में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप का कथित अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कड़ा फैसला लिया है। सोमवार को सपा ने बरेली की पूरी जिला और महानगर इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई से पार्टी में अनुशासन का सख्त संदेश दिया गया है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को साफ-सुथरा बनाने की मुहिम तेज हो गई है।
गुटबाजी और वीडियो वायरल ने दी कार्रवाई को हवा
मीडिया जानकारी के अनुसार, बरेली सपा में पिछले कई महीनों से जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप और महानगर अध्यक्ष शमीम खान सुल्तानी के बीच वर्चस्व की जंग चल रही थी। दोनों गुटों में लगातार टकराव हो रहा था, जिससे संगठन की छवि धूमिल हो रही थी। हाल ही में शिवचरण कश्यप का एक कथित अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने मामला और गंभीर बना दिया। वीडियो की सत्यता की जांच के लिए पार्टी ने पर्यवेक्षक भी भेजे थे। सूत्रों का कहना है कि यह वीडियो वायरल होने के बाद शीर्ष नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना और पूरी इकाई को भंग करने का फैसला लिया।
अखिलेश यादव ने इसे पार्टी की छवि से खिलवाड़ मानते हुए सख्त एक्शन लिया। उनका मानना है कि ऐसे मामलों में कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि यह कार्यकर्ताओं के मनोबल को गिराता है और विपक्ष को हमला करने का मौका देता है।
पदाधिकारियों की लंबी लिस्ट पर गिरी गाज
इस कार्रवाई की चपेट में सिर्फ जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष ही नहीं आए, बल्कि कई प्रमुख पदाधिकारी भी पदमुक्त हो गए। भंग इकाई में शामिल प्रमुख नाम हैं:
- जिला उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह यादव
- इंजीनियर अनीस अहमद
- सुरेंद्र सोनकर
- कोषाध्यक्ष अशोक यादव
- आदेश यादव
- दीपक शर्मा
- भारती चौहान
- स्मिता यादव
इनके अलावा कई अन्य पदाधिकारियों को भी हटाया गया है। अब पार्टी नए सिरे से बेदाग छवि वाले और समर्पित कार्यकर्ताओं को कमान सौंपने की तैयारी में है। संगठन में नए चेहरों को मौका देकर गुटबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश की जाएगी।
2027 चुनाव से पहले ‘क्लीनअप’ अभियान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लिया गया है। सपा में गुटबाजी और अंदरूनी कलह से संगठन कमजोर हो रहा था, जो चुनाव में नुकसानदेह साबित हो सकता था। अखिलेश यादव ने यह संदेश दिया है कि पार्टी की छवि और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अपात्र और विवादित लोगों को बाहर का रास्ता दिखाकर संगठन को मजबूत बनाने की मुहिम चल रही है।
बरेली में सपा कार्यकर्ताओं में इस फैसले से हलचल मच गई है। कुछ लोग इसे जरूरी सुधार मान रहे हैं, तो कुछ गुटबाजी के शिकार बताकर असंतोष जता रहे हैं। अब देखना होगा कि नई इकाई किस रूप में सामने आती है और पार्टी को कितना मजबूत बनाती है।

