लखनऊ, उत्तर प्रदेश: आगरा से बरेली तक का सफर अब महज ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने आगरा-बरेली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम तेज कर दिया है। 228 किलोमीटर लंबे इस चार लेन वाले एक्सप्रेसवे का करीब 50 फीसदी काम पूरा हो चुका है। परियोजना निदेशक उत्कर्ष शुक्ला मिश्रा ने दावा किया कि तय समय से दो-तीन महीने पहले ही प्रोजेक्ट पूरा हो सकता है। कुल लागत 7700 करोड़ रुपये है और 2027 तक पूरा टर्मिनल तैयार हो जाएगा।
चार चरणों में बन रहा एक्सप्रेसवे, दो चरणों में चल रहा यातायात
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेसवे को चार चरणों में बांटा गया है:
- पहला चरण (मथुरा से हाथरस, 66 किमी): 60% काम पूरा, कुछ हिस्सों पर यातायात शुरू।
- दूसरा चरण (हाथरस से कासगंज, 57 किमी): वाहनों का संचालन हो रहा है।
- तीसरा चरण (कासगंज से बदायूं, 46 किमी): 10% काम पूरा।
- चौथा चरण (बदायूं से बरेली): 45% काम पूरा।
परियोजना निदेशक ने बताया कि पहले दो चरणों में काफी तेजी आई है और कुछ हिस्सों पर पहले से ही वाहन दौड़ रहे हैं।
15 जिलों को मिलेगा फायदा, जाम से मिलेगी मुक्ति
यह एक्सप्रेसवे आगरा, मथुरा, हाथरस, कासगंज, बदायूं और बरेली समेत करीब 15 जिलों को जोड़ेगा। अभी आगरा से बरेली का सफर 5-6 घंटे लगता है, जो नए एक्सप्रेसवे से घटकर सिर्फ 2.5 घंटे रह जाएगा। इससे न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि जाम की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा।
क्या-क्या बन रहा है?
- 20 फ्लाईओवर
- 26 अंडरपास
- 5 बड़े पुल
- 6 रेलवे ओवरब्रिज
ये सुविधाएं आसपास के गांवों और शहरों को भी बेहतर कनेक्टिविटी देंगी।
तेज रफ्तार से चल रहा काम
एनएचएआई के अधिकारी उत्साहित हैं कि काम तय समय से पहले पूरा हो सकता है। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होने की वजह से नई सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह आधुनिक होंगे। बरेली, आगरा और मथुरा जैसे शहरों के बीच व्यापार और पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
आगरा-बरेली एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा। 2027 तक पूरा होने के बाद यह यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे की तरह राज्य का एक और महत्वपूर्ण लाइफलाइन बनेगा।

