आगरा, उत्तर प्रदेश: आगरा में पकड़े गए धर्मांतरण गैंग के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के तार पाकिस्तान से जुड़े होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस की जाँच में पता चला कि वह पाकिस्तान के छह नंबरों से व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क में था, ताकि कोई रिकॉर्ड न बचे। पुलिस अब इन नंबरों की पहचान और उनके पीछे के लोगों का पता लगाने में जुटी है।
गजवा-ए-हिंद की साजिश
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, आगरा के सदर इलाके में दो सगी बहनों के लापता होने के मामले ने इस गैंग को उजागर किया। पुलिस ने छह राज्यों में छापेमारी कर 14 आरोपियों को पकड़ा, जिनमें से पाँच कस्टडी रिमांड पर हैं और नौ जेल में। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गैंग गजवा-ए-हिंद की मुहिम के तहत धर्मांतरण करवाता था। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने मीडिया को बताया कि अब्दुल रहमान, एसबी कृष्णा उर्फ आयशा, रहमान कुरैशी, हसन अली उर्फ शेखर राय, और मोहम्मद अली उर्फ पीयूष पवार इस शातिर नेटवर्क का हिस्सा हैं।
कलीम सिद्दीकी का शागिर्द
अब्दुल रहमान जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मौलाना कलीम सिद्दीकी का करीबी शागिर्द है। कलीम को 2021 में यूपी एटीएस ने पकड़ा था, लेकिन तब रहमान बच निकला। कलीम की सजा के बाद रहमान ने गैंग की कमान संभाली। पुलिस को शक है कि रहमान के ऊपर भी कोई बड़ा सरगना है, जिसका पता लगाने के लिए पूछताछ जारी है।
पाकिस्तान से कॉल
जाँच में सामने आया कि रहमान पाकिस्तान के छह नंबरों से व्हाट्सएप कॉल के जरिए बात करता था। इन कॉल्स का कोई रिकॉर्ड न रहे, इसलिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल होता था। पुलिस अब इन नंबरों के मालिकों और रहमान के कनेक्शन की जड़ तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। यह खुलासा गैंग की अंतरराष्ट्रीय साजिश को उजागर करता है।
हवाला से फंडिंग
पुलिस को पता चला कि गैंग को विदेशों से हवाला के जरिए फंडिंग मिलती थी, जो मुख्य रूप से राजस्थान के रास्ते आती थी। इस फंडिंग का इस्तेमाल धर्मांतरण, ब्रेनवॉश, और ट्रेनिंग के लिए होता था। गैंग का नेटवर्क इतना बड़ा है कि कई सदस्य अभी भी फरार हैं। पुलिस इस हवाला चेन को तोड़ने और बाकी आरोपियों को पकड़ने में जुटी है।
गैंग की कार्यप्रणाली
गैंग सुनियोजित तरीके से लोगों को प्रेमजाल या अन्य लालच देकर फंसाता था। फिर उन्हें ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता था। कोलकाता को इस गैंग का मुख्य केंद्र बताया गया, जहाँ ट्रेनिंग और कागजात तैयार किए जाते थे। गैंग नाबालिगों को नहीं फंसाता था, बल्कि उनके बालिग होने का इंतजार करता था।
सामाजिक और राष्ट्रीय चिंता
यह मामला गजवा-ए-हिंद जैसी खतरनाक साजिशों और अवैध धर्मांतरण के गहरे नेटवर्क को उजागर करता है। यह समाज से सतर्कता और कठोर कानूनी कार्रवाई की माँग करता है। पाकिस्तान से कनेक्शन और हवाला फंडिंग ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। पुलिस की जाँच से इस गैंग के और राज खुलने की उम्मीद है।

