बाराबंकी, उत्तर प्रदेश: बाराबंकी के टिकैतनगर में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। आधार कार्ड में नाम बदलवाने पहुंचा एक दंपति अचानक हिंदू धर्म की ओर लौट आया। पति-पत्नी ने मंदिर में वरमाला डालकर हिंदू रीति से दोबारा विवाह किया और जय श्रीराम के जयघोष के बीच सनातन संस्कृति में वापसी की मिसाल कायम की।
प्रेम से शुरू हुई कहानी, धर्म परिवर्तन तक पहुंची
टिकैतनगर थाने के एक गांव के रहने वाले रिंकू की मुलाकात मवई क्षेत्र की एक युवती से चार साल पहले फोन पर हुई थी। बातचीत बढ़ी, प्यार हुआ और तीन साल पहले दोनों घर छोड़कर दिल्ली भाग गए। वहां दोनों ने शादी कर ली। दिल्ली में एक साल रहने के बाद दोनों गांव लौट आए और उनके दो बेटे भी हुए।
इस दौरान युवती के कहने पर रिंकू ने इस्लाम कबूल कर लिया और अपना नाम अब्दुल्ला रख लिया। दंपति सामान्य जीवन जीने लगे, लेकिन आधार कार्ड में नाम संशोधन की जरूरत पड़ी। इसके लिए वे तहसील के एक वकील से मिले। वकील ने शुक्रवार को उन्हें बुलाया।
हिंदू संगठनों की दखल, भावुक पल
वकील से मिलने की खबर जैसे ही विश्व हिंदू परिषद (विहिप), हिंदू युवा वाहिनी और भवनियापुर मठ के लोगों को लगी, वे तुरंत तहसील पहुंच गए। वहां मौजूद महंत मुकुंद गिरी समेत कई पदाधिकारियों ने दंपति से लंबी बातचीत की।
उन्होंने दंपति को हिंदू धर्म की मूल भावना, संस्कृति और आस्था के बारे में समझाया। बातचीत के दौरान दंपति भावुक हो गए। अंत में दोनों ने पुनः हिंदू धर्म अपनाने का फैसला किया। इसके बाद उन्हें पास के मंदिर ले जाया गया, जहां वरमाला और सात फेरे के साथ हिंदू रीति से विवाह संपन्न हुआ। माहौल में जय श्रीराम के नारे गूंज उठे।
हिंदू संगठनों का आरोप: सुनियोजित साजिश
- विहिप नेता विनय राजपूत ने दावा किया कि कुछ मुस्लिम संगठनों के इशारे पर युवतियां हिंदू युवकों को फंसाकर धर्म परिवर्तन कराती हैं।
- उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म बदलने के बाद मुस्लिम नाम से आधार कार्ड बनते ही ऐसे युवकों को 15 लाख रुपये तक दिए जाते हैं।
- हिंदू युवा वाहिनी के सोनू सिंह ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की और सवाल उठाया कि ग्राम प्रधान ने मुस्लिम नाम से निवास प्रमाण पत्र कैसे जारी किया?
समाज में संदेश: प्रेम से ऊपर आस्था
यह घटना न केवल एक दंपति की घरवापसी की कहानी है, बल्कि प्रेम, आस्था और सांस्कृतिक पहचान के बीच संघर्ष की मिसाल भी बन गई। हिंदू संगठनों ने इसे “घर वापसी का भावुक पल” करार दिया, जबकि स्थानीय लोग इसे समाज में एकता का प्रतीक बता रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन अभी इस मामले पर चुप है, लेकिन जांच की मांग तेज हो गई है। दंपति अब अपने मूल नामों के साथ नई जिंदगी शुरू करने को तैयार है।

