बिजनौर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के एक परिषदीय स्कूल में शिक्षकों और स्टाफ की लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। हल्दौर ब्लॉक के तुला गांव के नवादा प्राइमरी स्कूल में कक्षा 5 के एक छात्र को क्लासरूम में ताला लगाकर शिक्षक और स्टाफ घर चले गए। बच्चा घंटों तक कमरे में बंद रहा और रोता रहा। संयोग से खंड विकास अधिकारी (BDO) के निरीक्षण के दौरान बच्चे की चीखें सुनाई दीं, जिसके बाद उसे बाहर निकाला गया। बाहर निकलते ही बच्चा अपनी मां से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगा। इस घटना से गांव में गुस्सा है, और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
स्कूल बंद, बच्चा अंदर फंसा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना तुला गांव के नवादा प्राइमरी स्कूल की है। अक्टूबर में स्कूलों का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित है। मंगलवार को स्कूल का समय खत्म होने के बाद शिक्षक और स्टाफ स्कूल बंद करके घर चले गए, लेकिन कक्षा 5 का छात्र वंश क्लासरूम में ही रह गया। उसे ताला लगाकर बंद कर दिया गया। बच्चा अंदर फंसकर चिल्लाता रहा और मदद के लिए रोता रहा, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था।
शाम करीब 4 बजे हल्दौर ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (BDO) स्कूल परिसर में बने आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे। उनकी गाड़ी जैसे ही स्कूल के पास रुकी, उन्हें बंद कमरे से बच्चे के रोने और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। BDO ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझा और स्कूल के शिक्षकों, ग्राम प्रधान और स्थानीय लोगों को बुलाया।
ताला खुला, मां से लिपटा वंश
BDO ने शिक्षकों को तुरंत स्कूल बुलाने का निर्देश दिया। ग्राम प्रधान और कुछ ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे। जब क्लासरूम का ताला खोला गया, तो वंश बाहर निकला और अपनी मां रिंकी को देखते ही उनसे लिपटकर रोने लगा। बच्चे की हालत देखकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए। रिंकी ने बताया कि वह घर पर अपने बेटे का इंतजार कर रही थी, लेकिन उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि स्कूल का स्टाफ इतनी बड़ी लापरवाही कर सकता है।
वंश ने बताया कि वह क्लास में कुछ सामान लेने गया था, और उसी दौरान शिक्षकों ने बिना चेक किए ताला लगा दिया। वह घंटों तक अंदर फंसा रहा और डर के मारे चिल्लाता रहा। इस घटना ने न केवल बच्चे को डरा दिया, बल्कि उसके परिवार को भी गहरे सदमे में डाल दिया।
ग्रामीणों में गुस्सा, शिक्षकों पर सवाल
इस लापरवाही ने गांव में शिक्षकों के खिलाफ गुस्सा भड़का दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल स्टाफ की यह गैरजिम्मेदारी बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि शिक्षक बिना क्लासरूम चेक किए स्कूल कैसे बंद कर सकते हैं। कुछ ने इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। रिंकी ने कहा, “मेरा बच्चा डर से कांप रहा था। अगर BDO साहब नहीं आते, तो पता नहीं क्या होता।”
जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी
घटना की खबर फैलते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कसाना ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को सौंप दी और जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट मांगी। BSA ने कहा, “यह बेहद गंभीर लापरवाही है। बच्चे की सुरक्षा स्कूल की पहली जिम्मेदारी है। जांच में दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों और स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
पुलिस को भी इस घटना की सूचना दी गई है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। स्कूल के प्रधानाध्यापक और स्टाफ ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, वे अपनी गलती मान रहे हैं और इसे अनजाने में हुई चूक बता रहे हैं।
सामाजिक और प्रशासनिक सवाल
यह घटना न केवल शिक्षकों की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिषदीय स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठाती है। माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों पर छोड़ते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं विश्वास को तोड़ती हैं। गांव वालों ने मांग की है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और क्लासरूम की जांच के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।
वंश की मां रिंकी ने कहा, “मेरा बच्चा अब स्कूल जाने से डर रहा है। हमारी मांग है कि दोषी शिक्षकों को सजा मिले, ताकि फिर कोई बच्चा इस तरह की डरावनी स्थिति से न गुजरे।” यह मामला अब बिजनौर में चर्चा का विषय बन गया है, और सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
एक सबक: बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
नवादा प्राइमरी स्कूल की यह घटना एक चेतावनी है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। वंश की कहानी भले ही एक बच्चे की है, लेकिन यह हर उस माता-पिता की चिंता को बयां करती है जो अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। अब यह देखना होगा कि जांच में क्या खुलासे होते हैं और प्रशासन इस लापरवाही के लिए कितनी सख्ती बरतता है।

