कौशांबी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में एक मुस्लिम परिवार ने सामूहिक रूप से हिंदू धर्म अपनाकर सभी का ध्यान खींचा है। मंझनपुर कस्बे के दुर्गा मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ मेहंदी अली राजपूत, उनकी पत्नी सायमा और तीन साल की बेटी उर्वा ने सनातन धर्म में वापसी की। परिवार ने हिंदू धर्म के दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) से प्रभावित होकर यह फैसला लिया। अब मेहंदी अली का नाम अनुज प्रताप सिंह, सायमा का सौम्या अनुज सिंह और बेटी उर्वा का उर्विजा अनुज सिंह हो गया है।
धर्म परिवर्तन और नए नाम
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना सराय अकिल थाना क्षेत्र के पुरखास गांव की है। 43 वर्षीय मेहंदी अली राजपूत, उनकी 23 वर्षीय पत्नी सायमा और बेटी उर्वा ने परिवार की आपसी सहमति से हिंदू धर्म अपनाया। मंझनपुर के दुर्गा मंदिर में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित समारोह में उन्होंने हवन-पूजन किया और हिंदू धर्म की परंपराओं को स्वीकार किया। धर्म परिवर्तन के बाद परिवार ने नए नाम अपनाए और अब हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन जीने का संकल्प लिया। अनुज प्रताप सिंह ने बताया कि यह फैसला पूरी तरह सोच-समझकर और स्वेच्छा से लिया गया।
पहले हिंदू थे, फिर लौटे सनातन धर्म में
जानकारी के अनुसार, मेहंदी अली राजपूत मूल रूप से हिंदू थे, लेकिन कुछ समय पहले उन्होंने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया था। अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, और उन्होंने परिवार सहित सनातन धर्म में वापसी का फैसला किया। अनुज प्रताप सिंह ‘वन अंब्रेला चैरिटेबल ट्रस्ट’ के संस्थापक भी हैं। इस धर्म परिवर्तन समारोह में हिंदू रक्षा समिति के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने परिवार का स्वागत किया।
‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ से प्रेरणा
अनुज प्रताप सिंह ने बताया कि हिंदू धर्म का दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ उन्हें गहराई से प्रभावित करता रहा। उन्होंने कहा, “यह विचारधारा पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है, जो हमें एकजुटता और मानवता की प्रेरणा देती है। इसी से प्रभावित होकर हमने हिंदू धर्म अपनाने का फैसला किया।” हिंदू रक्षा समिति के जिला संयोजक वेद प्रकाश सत्यार्थी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि परिवार ने स्वेच्छा से और पूरे विश्वास के साथ यह कदम उठाया है।
सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश
यह घटना कौशांबी में चर्चा का विषय बनी हुई है। परिवार का यह कदम न केवल धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत विश्वास को दर्शाता है, बल्कि हिंदू धर्म के समावेशी दर्शन को भी रेखांकित करता है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना ने एक बार फिर साबित किया कि सनातन धर्म की शिक्षाएं सभी को एकजुट करने की ताकत रखती हैं। स्थानीय लोग इस फैसले का सम्मान कर रहे हैं और इसे सामाजिक एकता का प्रतीक मान रहे हैं।
धर्म परिवर्तन का वैध प्रक्रिया
पुलिस और प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, यह धर्म परिवर्तन पूरी तरह वैधानिक और स्वैच्छिक था। परिवार ने सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं, और मंदिर में आयोजित समारोह शांतिपूर्ण रहा। हिंदू संगठनों ने इस कदम को ‘घर वापसी’ करार देते हुए इसे सनातन धर्म की उदारता का उदाहरण बताया।
यह घटना न केवल कौशांबी, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। अनुज प्रताप सिंह और उनके परिवार का यह फैसला धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता की मिसाल बन रहा है। अब देखना यह है कि यह परिवार अपने नए जीवन और हिंदू रीति-रिवाजों के साथ कैसे आगे बढ़ता है।

