लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में नए साल की शुरुआत के साथ ही योगी मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पंकज चौधरी की ताजपोशी के बाद अब सबकी निगाहें टीम योगी पर टिकी हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि फरवरी महीने में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल हो सकता है। इस चर्चा ने कई मौजूदा मंत्रियों की नींद उड़ा दी है, तो कई विधायकों में मंत्री बनने की उम्मीद जगा दी है। कुर्सी बचाने और हासिल करने की होड़ शुरू हो गई है।
2027 मिशन की तैयारी: संगठन के बाद सरकार में बदलाव
भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। संगठन में बड़े बदलाव के बाद अब सरकार को दुरुस्त करने की बारी है। 2022 चुनाव से पहले भी मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था, जिसमें जातीय समीकरण साधने के लिए कई नए चेहरे शामिल किए गए थे। इस बार भी जातीय गणित पर फोकस रह सकता है। चर्चा है कि एक दलित चेहरे को तीसरा डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है।
कई मंत्रियों के कामकाज पर सवाल, दिल्ली और लखनऊ दोनों नाराज
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में सूत्र बताते हैं कि कई मंत्रियों के कामकाज को लेकर शिकायतें हैं। कुछ से दिल्ली दरबार (केंद्रीय नेतृत्व) खुश नहीं है, तो कुछ की कार्यशैली से मुख्यमंत्री खुद नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसे में बड़े फेरबदल की संभावना है। जो मंत्री अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में लगे हैं, वे ज्योतिषियों से समय देख रहे हैं और अनुष्ठान करा रहे हैं। दूसरी तरफ, मंत्री बनने की उम्मीद लगाए विधायक भी पूजा-पाठ शुरू कर चुके हैं।
विधायकों की लॉटरी खुलने की उम्मीद
अगर मंत्रिमंडल विस्तार या बदलाव हुआ तो कई विधायकों की लॉटरी खुल सकती है। खासकर उन चेहरों की, जो जातीय और क्षेत्रीय समीकरण में फिट बैठते हैं। भाजपा ने कुर्मी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पुराना फॉर्मूला दोहराया है, अब मंत्रिमंडल में भी समीकरण साधने की कवायद हो सकती है।
“गुजरात मॉडल” की चर्चा
कुछ चर्चाएं गुजरात पैटर्न की भी हैं, जहां बड़े पैमाने पर बदलाव कर नई टीम बनाई गई थी। यूपी में भी ऐसा प्रयोग हो सकता है। लेकिन अंतिम फैसला दिल्ली और लखनऊ के शीर्ष नेतृत्व के बीच होगा।
नए साल के साथ मिशन-2027 की तैयारी तेज हो गई है। संगठन से लेकर सरकार तक सबकुछ दुरुस्त करने का प्लान है। मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल का “न्यू ईयर गिफ्ट” किसे मिलता है, यह फरवरी तक साफ हो सकता है। फिलहाल, कई मंत्रियों की नींद उड़ी हुई है और कई विधायकों के सपने पंख लगा चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

