लखनऊ/बलरामपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने ‘मिशन पहचान’ शुरू किया है। यूपी एटीएस और स्थानीय खुफिया इकाइयों को जांच में पता चला है कि इस गिरोह से करीब 3000 लोग जुड़े हैं। इनके नाम-पते की तलाश तेज कर दी गई है। नौ जिलों के साथ-साथ महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और नेपाल में बैठे सहयोगियों पर भी नजर है। जल्द ही बड़ी कार्रवाई की उम्मीद है, जिसमें पुलिस, प्रशासन और राजस्व विभाग के लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
मिशन पहचान: छांगुर के नेटवर्क का खुलासा
छांगुर बाबा के अवैध धर्मांतरण रैकेट की जड़ें गहरी हैं। यूपी एटीएस ने इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान के लिए ‘मिशन पहचान’ शुरू किया है। जांच में सामने आया कि इस गिरोह से 3000 से अधिक लोग जुड़े हैं, जिनमें प्रॉपर्टी डीलर, स्थानीय प्रभावशाली लोग और कुछ सरकारी कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। एटीएस ने बलरामपुर, आजमगढ़, सिद्धार्थनगर, बहराइच और श्रावस्ती में छानबीन शुरू की है। बढ़नी में एक विशेष यूनिट तैनात की गई है।
कोर्ट बाबू और प्रभावशाली सहयोगी
मिशन पहचान के तहत एटीएस ने बलरामपुर कोर्ट के बाबू राजेश उपाध्याय को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि वह छांगुर के इशारे पर नोटिस भेजने और मुकदमे दर्ज कराने में मदद करता था। उसकी पत्नी संगीता से भी पूछताछ चल रही है। इसके अलावा, छांगुर का करीबी एमेन रिजवी, जिसकी पुलिस और प्रशासन में गहरी पैठ थी, फरार है। एमेन का एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने दावा किया था कि वह कोतवाली का कामकाज संभालता है। इसकी जांच अब तेज हो गई है।
विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
छांगुर की मुख्य सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन और नवीन उर्फ जलालुद्दीन ने विदेशी खातों के जरिए रैकेट चलाया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को तीन विदेशी बैंक खातों से बड़े लेनदेन के सबूत मिले हैं। इन खातों से धर्मांतरण के लिए पैसे भेजे और मंगाए गए। ईडी ने बलरामपुर और मुंबई में 14 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें शहजाद शेख के खाते में 2 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ। नेपाल, यूएई, सऊदी अरब और तुर्की से फंडिंग के तार जुड़े होने की आशंका है।
2013 से रची गई साजिश
जांच में पता चला कि छांगुर ने 2013 में बलरामपुर की उतरौला तहसील में धर्मांतरण की नींव रखी थी। सादुल्लाह नगर थाने में एक मजार को खतौनी में दर्ज कराया गया था, जिसमें तत्कालीन विधायक आरिफ अनवर हाशमी और उनके भाई मारूफ पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुतवल्ली बनने का आरोप लगा। तत्कालीन डीएम अरविंद सिंह ने 100 पन्नों की रिपोर्ट में पुलिस और प्रशासन की संलिप्तता पर सवाल उठाए थे, लेकिन उनकी कार्रवाई रुक गई और उनका तबादला हो गया। अब यह मामला फिर से चर्चा में है।
सरकारी अधिकारियों पर शक
ईडी और एटीएस की जांच में 2019 से 2024 के बीच बलरामपुर में तैनात एक एडीएम, दो सीओ और एक इंस्पेक्टर की संलिप्तता सामने आई है। ये अधिकारी कथित तौर पर छांगुर के इशारे पर काम करते थे। उनकी भूमिका की गहन जांच चल रही है। इसके अलावा, प्रॉपर्टी डीलरों और स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने छांगुर को जमीन खरीदने में मदद की, जिसके बदले उन्हें मोटा कमीशन मिलता था।
नेपाल और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
छांगुर का नेटवर्क भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय था। आजतक की पड़ताल में खुलासा हुआ कि नेपाल के कोइलाबास इलाके में हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर धर्मांतरण कराया जाता था, और कई लड़कियाँ गायब हो गईं। नेपाल में छांगुर के सहयोगी सक्रिय थे, और कुछ पीड़ितों को सीमा पार भेजा जाता था। जांच में जाकिर नाइक और उनकी संस्था IRF से भी कनेक्शन सामने आए हैं, जिनके जरिए 64 करोड़ की विदेशी फंडिंग मिलने का दावा है।
सामाजिक और राष्ट्रीय चिंता
यह मामला केवल धर्मांतरण तक सीमित नहीं है। इसमें प्रेमजाल, ब्लैकमेलिंग, यौन शोषण और तस्करी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। छांगुर ने कथित तौर पर हिंदू लड़कियों को फंसाने के लिए मुस्लिम युवकों का इस्तेमाल किया, जो हिंदू नामों से उन्हें लुभाते थे। पीड़ितों में से कुछ ने लखनऊ में ‘घर वापसी’ की है, लेकिन कई अब भी लापता हैं। यह रैकेट राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बन गया है।
अब तक की कार्रवाई
एटीएस ने अब तक छांगुर, नीतू उर्फ नसरीन, नवीन, रशीद शाह, और कोर्ट बाबू राजेश उपाध्याय सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। छांगुर की 12 करोड़ की अवैध कोठी को बुलडोजर से ढहा दिया गया। रशीद को प्रत्येक धर्मांतरण के लिए 10,000 रुपये का कमीशन मिलता था। जांच में 40 बैंक खातों से 100 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है।
भविष्य की चुनौती
यह मामला समाज से सतर्कता और कड़े कानूनी कदमों की माँग करता है। छांगुर के नेटवर्क की जड़ें गहरी हैं, और 30-40 लोग अब भी फरार हैं। एटीएस और ईडी की टीमें इनके पीछे हैं, लेकिन नेपाल और विदेशी कनेक्शन इसे जटिल बनाते हैं। यह समाज को सोशल मीडिया और प्रलोभनों से सावधान रहने का सबक देता है।
(ये जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

