वाराणसी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक दिल दहलाने वाली घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया। पत्नी से विवाद के बाद 30 वर्षीय दुर्गा सोनकर ने अपने दो मासूम बेटों को गंगा नदी में फेंक दिया और फिर खुद भी छलांग लगा दी। ग्रामीणों ने दुर्गा को बचा लिया, लेकिन 7 साल के संदीप और 5 साल के आशीष का कोई पता नहीं चला। एनडीआरएफ की टीमें बच्चों की तलाश में जुटी हैं।
पत्नी से झगड़े ने तोड़ा मन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चांदपुर (चौबेपुर) निवासी दुर्गा सोनकर का अपनी पत्नी से दिन में किसी बात को लेकर तीखा विवाद हुआ। परिजनों के अनुसार, इस झगड़े से नाराज दुर्गा ने गुस्से में आकर अपने दोनों बेटों, संदीप (7) और आशीष (5), को लेकर घर से निकल गया। वह रिंग रोड पर बभनपुरा पुल तक पहुँचा, जहाँ उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
गंगा में फेंके बच्चे
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दुर्गा ने पहले अपने दोनों बच्चों को गंगा नदी में फेंक दिया। इसके बाद उसने खुद भी नदी में छलांग लगा दी। इस दर्दनाक घटना की खबर फैलते ही आसपास के लोग हैरान रह गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
ग्रामीणों ने बचाया पिता
मुस्तफाबाद के पास गंगा में बहते हुए दुर्गा को ग्रामीणों ने देखा और उसे पानी से निकाल लिया। लेकिन उसके दोनों बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला। सूचना मिलने के करीब दो घंटे बाद एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुँची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। रात 8 बजे तक अंधेरा होने के कारण तलाश रोक दी गई।
परिवार में कोहराम
घटना की खबर मिलते ही दुर्गा के परिवार में मातम छा गया। परिजन बच्चों की तलाश में बेचैन हैं। स्थानीय लोगों और परिवार ने प्रशासन की देरी पर गुस्सा जताया। पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने भी मौके पर पहुँचकर प्रशासन की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की।
पुलिस और एनडीआरएफ की कार्रवाई
पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है और दुर्गा से पूछताछ की जा रही है। एनडीआरएफ की गोताखोर टीमें बच्चों को ढूँढने में जुटी हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद की जड़ क्या थी।
सामाजिक और भावनात्मक सवाल
यह त्रासदी पारिवारिक विवादों के गंभीर परिणामों को उजागर करती है। यह समाज से आपसी समझ, संवाद, और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की माँग करती है। बच्चों के लापता होने और पिता के इस कदम ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। पुलिस और एनडीआरएफ से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि बच्चों का पता लगे।

