पत्नी के गहने लेना क्रूरता नहीं: दिल्ली HC ने वकील पति की FIR रद्द की, शादी को बताया अवैध

Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील पति पर पत्नी की FIR रद्द की, कहा गहने लेना क्रूरता नहीं। शादी अवैध (पहला तलाक अधूरा), इसलिए 498A लागू नहीं। आरोपों में सबूत नहीं, पुलिस ने पति का पक्ष लिया। सुप्रीम कोर्ट उदाहरण से फैसला, वैवाहिक झगड़ों में सबूत जरूरी।

Samvadika Desk
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Delhi High Court
Highlights
  • दिल्ली HC: पत्नी के गहने लेना अकेले क्रूरता नहीं!
  • 66 वर्षीय वकील पति पर दर्ज FIR को कोर्ट ने पूरी तरह रद्द कर दिया!
  • वकील ने अपनी मुवक्किल का तलाक करवाया और 2007 में उससे शादी कर ली!

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी के गहने ले जाना अकेले ‘क्रूरता’ का आधार नहीं बनता। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने 66 वर्षीय वकील पति पर दर्ज FIR को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि शादी कानूनी रूप से वैध नहीं थी, इसलिए IPC की धारा 498A (क्रूरता) लागू नहीं होती।

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मुवक्किल से प्यार, फिर अवैध शादी

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, मामला 2007 का है। वकील ने अपनी मुवक्किल का तलाक करवाया। मदद के दौरान दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और शादी कर ली। लेकिन 2010 में पता चला कि महिला का पहला तलाक अभी पूरा नहीं हुआ था। यानी उनकी शादी कभी कानूनी नहीं थी। महिला ने गुस्से में वकील पर FIR दर्ज कराई। आरोप थे: जॉइंट अकाउंट से लाखों रुपये निकाले, लॉकर से गहने चुराए, गहने गिरवी रखकर नया घर खरीदा और प्राइवेट वीडियो लीक करने की धमकी दी।

पुलिस ने भी पति का पक्ष लिया

वकील ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर FIR रद्द करने की मांग की। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि महिला ने FIR में अपना पहला तलाक छुपाया, जो धोखा है। पुलिस ने पति की याचिका का समर्थन किया। महिला ने राहत की गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने उसके तर्क खारिज कर दिए।

सुप्रीम कोर्ट का हवाला, गहने चोरी क्रूरता नहीं

जस्टिस कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट के अरविंद सिंह मामले का जिक्र किया, जहां क्रूरता को मानसिक-शारीरिक पीड़ा बताया गया। कोर्ट ने कहा, “भले पति ने 40 लाख के गहने ले लिए हों, यह 498A के तहत क्रूरता नहीं। वीडियो धमकी के लिए कोई सबूत नहीं, सिर्फ आरोप बढ़ाने की कोशिश।” शादी अवैध होने से क्रूरता का केस ही नहीं बनता। यह फैसला वैवाहिक झगड़ों में सबूतों के महत्व को रेखांकित करता है।

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